महत्वपूर्ण जंक्शन में अफसरों के हो रहे दौरे, पहले रुपयों के अभाव में अब लॉकडाउन से रेलवे के कामों पर ब्रेक

लॉकडाउन से रेलवे के विकास कार्यों पर भी ब्रेक लग गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में बजट के अभाव में विकास कार्यों पर ब्रेक था तो वहीं अब लॉकडाउन के चलते ब्रेक लगा हुआ है। कटनी में तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन और तीनों की विकास की बाट जोह रहे हैं। सामान्य दिनों में दिन कटनी, मुड़वारा और साउथ स्टेशन मिलकर 25 से 30 हजार लोग इस शहर से सफर करते हैं। लगभग 12 से 15 लाख रुपये से अधिक रोजाना राजस्व की प्राप्ति होती रही है।

By: balmeek pandey

Published: 30 May 2020, 11:52 AM IST

कटनी. लॉकडाउन से रेलवे के विकास कार्यों पर भी ब्रेक लग गया है। वित्तीय वर्ष 2019-20 में बजट के अभाव में विकास कार्यों पर ब्रेक था तो वहीं अब लॉकडाउन के चलते ब्रेक लगा हुआ है। कटनी में तीन प्रमुख रेलवे स्टेशन और तीनों की विकास की बाट जोह रहे हैं। सामान्य दिनों में दिन कटनी, मुड़वारा और साउथ स्टेशन मिलकर 25 से 30 हजार लोग इस शहर से सफर करते हैं। लगभग 12 से 15 लाख रुपये से अधिक रोजाना राजस्व की प्राप्ति होती रही है। इसके बाद भी तीनों स्टेशन सुविधाओं से वंचित है। बता दें कि पिछले तीन-चार वर्षों से रेलवे अधिकारियों के दौरे हो रहे हैं, स्टेशनों की समस्याओं को समझा जा रहा है, विकास की योजना बनती है, लेकिन धरातल पर नहीं उतर रहीं। वहीं लॉकडाउन के चलते शहर का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट ग्रेडर सेप्रेटर का काम भी न के बराबर चल रहा है। कटनी-बिना, कटनी-बिलासपुर थर्ड लाइन, कटनी-सिंगरौली डबल लाइन का काम भी अटका हुआ है।

कटनी स्टेशन में कई समस्याएं
चार साल पहले कटनी स्टेशन में एस्केलेटर की स्वीकृति मिल चुकी है, इसके लिए टेंडर प्रक्रिया भी हो गई है, इसके बाद भी मशीन आजतक नहीं लगीं। रेलवे स्टेशन में पांच लिफ्ट भी डेढ़ साल पहले स्वीकृत हुईं थीं, लेकिन अबतक उन्हें लगाने के लिए काम शुरू नहीं किया गया। सफदे कोच इंडीकेटर डिस्प्ले बोर्ड, सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए सर्वे हुआ है, लेकिन अबतक कैमरों का अता-पता नहीं। स्टेशन में डिजिटल गैलरी, मल्टीपर्पस शैलून, कॉमर्शियल एलइडी अबतक नहीं लग पाईं। स्टेशन के सामने का मार्ग चौड़ा नहीं हो पाया। दूसरा प्रवेश द्वार अबतक नहीं खुल पाया। यार्ड रिमॉडलिंग का काम भी ठंडे बस्ते में है।

मुड़वारा स्टेशन में नहीं विस्तार
मुड़वारा रेलवे स्टेशन में में रैम्प, एस्केलेटर नहीं हैं। वेटिंग हॉल नहीं हैं। स्लीपर वेटिंग हॉल, एसी वेटिंग हॉल, महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग व्यवस्था, फुट ओवर ब्रिज का दोनों तरफ खुलना, सीसीटी कैमरे, डिस्प्ले बोर्ड, दो, तीन, एक प्लेटफॉर्म पर कोच इंडीकेटर बोर्ड की सख्त जरुरत है। इसके अलावा स्टेशन प्रबंधक कार्यालय, एसएमसी शिकायती कक्ष, उद्घोषणा कक्ष, सुरक्षित परिसर, व्यवस्थित पार्किंग, कचरा निपटान के लिए व्यवस्था नहीं है।

साउथ में भी समस्या
साउथ रेलवे स्टेशन में भी समस्याओं का अंबार और सुविधाओं से कोसों दूर है। भी सीसीटी कैमरा लगाने की प्रक्रिया, सामने की तरफ बाउंड्रीवॉल का अभाव है। यहां पर सफाई कर्मचारी पर्याप्त नहीं हैं। स्लीपर और सेकंड क्लास के लिए वेटिंग रूम, जनरल वेटिंग रूम नहीं है। टीटी स्टॉफ की भी व्यवस्था नहीं है। अबतक स्टेशन में कैंटीन के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं हो पाई। इसी तरह एनकेजे में प्लेटफॉर्म, यात्री प्रतिक्षालय का अभाव है। शेडों में भी पुरानी मशीनें हैं जिससे आए दिन हादसे होते हैं।


खास-खास:
- कटनी जंक्शन में एक साल बाद भी नहीं बन पाया दूसरा गेट, आरओबी मरम्मत का काम भी चार माह में नहीं हो पाया पूरा। सड़क चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण पर भी नहीं काम।
- यात्रियों के दबाव के अनुसार मुख्य रेलवे स्टेशन व मुड़वारा में एफओबी की कमी है, इस पर रेलवे के अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे, जनरल वेटिंग रूमों में वेस्टर्न स्टाइल की प्रसाधन सीट नहीं, दिव्यांग यात्रियों को होती है परेशानी।
- मुड़वारा रेलवे स्टेशन, साउथ रेलवे स्टेशन में एप्रोच रोड व प्रकाश की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिससे यात्री परेशान होते हैं।
- रेलवे कॉलोनियों में जर्जर क्वार्टर, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था सही नहीं है, इस पर अधिकारियों का ध्यान नहीं है।
- तीनों स्टेशनों के आउटर में ट्रेनों को अनावश्यक रूप से खड़ा करना, जिससे हो रहीं चोरी, लूट की घटनाएं,
- कटनी-सतना में ओएचइ लाइन का कार्य पूर्ण होने के बाद भी इलेक्ट्रिक इंजन से नहीं चलाई जा रही यात्री ट्रेनें, सिर्फ चलाई जा रहीं मालगाड़ी।
- रेलवे स्टेशनों के आउटर में हाइ मॉस्ट लाइट न होने से जीआरपी व आरपीएफ को सुरक्षा में हो रही समस्या।
- यात्री ट्रेनों को खड़ी कर मालगाडिय़ों को पासिंग देने से यात्रियों को होती है मुसीबत, प्रभावित होता का कारोबार।
- एनकेजे शेडों व यार्ड में कर्मचारियों की सुरक्षा, काम का अधिक भार, रेलवे की सुरक्षा व संरक्षा में कमी।

balmeek pandey Reporting
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