गुर्दा रोगियों की हलक में जान, इंजीनियरों ने कहा, हमने सीएस को दे दी है पार्ट्स खराब होने की जानकारी, सीएस बोले मुझे नहीं बताया

गुर्दा रोगियों की हलक में जान, इंजीनियरों ने कहा, हमने सीएस को दे दी है पार्ट्स खराब होने की जानकारी, सीएस बोले मुझे नहीं बताया

Balmeek Pandey | Publish: May, 18 2019 11:09:01 AM (IST) | Updated: May, 18 2019 11:09:02 AM (IST) Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

डायलिसिस मशीन बंद, उपचार में ये बेपरवाही ने खोलकर रख दी स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल, 100 किलोमीटर दूर जबलपुर जाकर या प्राइवेट में कराना पड़ रहा डायलिसिस

कटनी. मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं व उपकरणों के रखरखाव में चल रहे कुप्रबंधन के आगे मरीजों का दर्द मिटने की बजाय बढ़ता चला जा रहा है। एक बार फिर जिला अस्पताल में गुर्दा रोगियों के इलाज में बेपरवाही का मामला सामने आया है। पिछले कई दिनों से दो डायलिसिस मशीनों में एक डायलिसिस मशीन दम तोड़ चुकी है और अब एक मशीन के सहारे ही डायलिसिस हो पा रहा है। मशीन खराब होने की दशा में अधिकांश मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पा रहा है। ऐसी परिस्थिति में मरीज व उनके परिजनों की परेशानी शायद उनसे बेहतर कोई नहीं समझ सकता। मरीजों को हो रही इस समस्या से न तो स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सरोकार है और ना ही जिला प्रशासन को। दो दिन से मशीन को सुधारने के लिए चेन्नई से आए इंजीनियर प्रयास कर रहे हैं। इंजीनियरों का कहना है कि इसके दो प्रमुख पाट्र्स खराब हैं। इसमें एक मदर बोर्ड शामिल है, दूसरा वाल्व खराब है। इसके लिए सिविल सर्जन को बता दिया गया है। वे जितने जल्दी आर्डर कर देंगे उतने जल्दी पाट्र्स आ जाएंगे। हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में सिविल सर्जन अनजान हैं। उनका कहना है कि सुधार करने पहुंचे इंजीनियरों ने मुझे अबतक नहीं बताया था कि कोई पाट्र्स खराब हैं। यह जानकारी मुझे पत्रिका के माध्यम से ही लगी है।

मरीज 12, डायलिसिस सिर्फ 2 का
जिला अस्पताल में डायलिसिस कराने के लिए 12 मरीज पंजीकृत हैं। ये ऐसे मरीज हैं, जिनकी सांसें सिर्फ और सिर्फ डायलिसिस के दम पर टिकी हैं। ऐसे में यहां पर एक मशीन के सहारे एक दिन में मात्र दो व्यक्तियों का ही डायलिसिस हो पा रहा है। ऐसे में 8 से 10 मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। इस परिस्थिति में उन मरीजों की परेशानी बढ़ गई है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। उन्हें 100 किलोमीटर की दूरी तय कर जबलपुर जाना पड़ रहा है। मरीजों को आए दिन हो रही इस समस्या से स्वास्थ्य विभाग के अफसर तनिक भी गंभीर नहीं हैं। यदि किसी भी इंसान की किडनियां काम करना बंद कर दें तो आप समझ सकते हैं कि उस पर क्या बीत रही होगी। उसके दर्द निवारण का एक मात्र सहारा होता है डायलिसिस। लेकिन जिला अस्पताल में गुर्दा रोगियों के दर्द को कम करने वाली मशीन बंद पड़ी है। 12 मरीज अब भी वेटिंग में चल रहे हैं। उन्हें अब तो जबलपुर या फिर कहीं बाहर जाने का रास्ता दिखा दिया जा रहा है।

खास-खास:
- डायलिसिस मशीन के सुधार कार्य में लगना एक लाख से अधिक का रुपये।
- बीपीएल और अंत्योदय कार्ड धारकों का नि:शुल्क होता है डायलिसिस।
- एपीएल कार्ड धारकों से लिए जाते हैं मात्र 500 रुपये।
- निजी अस्पताल में डायलिसिस के लगते हैं 2 से 3 हजार रुपए।
- गुरुवार को बिजली बंद होने से सुधार कार्य हुआ है प्रभावित।
- डायलिसिस मशीन का खत्म हो गया है वारंटी वाला समय।
- ट्रिबीटॉम चेन्नई की कंपनी को दिया गया है सुधार का जिम्मा।

इनका कहना है
डायलिसिस मशीन के तीन पार्ट खराब हैं। दो दिन से बाहर से आए इंजीनियर सुधार कार्य में लगे हैं। उन्होंने मुझे मशीन के पाट्र्स खराब होने की जानकारी नहीं दी है। वे लोग मेल पर ऊपर जानकारी भेजेंगे। वहां से स्टीमेट आता है। हेड क्वार्टर को एजेंसी रिपोर्ट करेगी। इसके बाद रुपये कहां से आएंगे, कौन बनाएगा। स्टेट वाले एजेंसी को रुपये देंगे या बजट देंगे। अस्पताल प्रशासन को मामले की जानकारी दी जाएगी कि मशीन खराब है तो फिर स्टीमेट दिया जाएगा। वहां से मिले निर्देश के बाद सुधार होगा। इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मुझे तो पाट्र्स खराब होने की जानकारी पत्रिका से लगी। इसके बाद मैने इंजीनियर से पूछा तो फिर उन्होंने मशीन के पाट्र्स खराब होने की जानकारी दी।
डॉ. एसके शर्मा, सिविल सर्जन।

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