राधाष्टमी पर लौटे द्वारकाधीश,10 साल तक अलमारी में काटा 'कारावास'

10 साल से अलमारी में 'कारावास' काट रहे थे चोरी हुए नंदलाल, 45 करोड़ की है मूर्ति

By: Hitendra Sharma

Published: 26 Aug 2020, 05:07 PM IST

कटनी. आज राधा अष्टमी है और ऱाधा अष्टमी पर लौटे द्वारकाधीश श्रीकृष्ण बापस अपने भक्तों के पास लौट आये हैं। कटनी के बाकला में 2010 में चोरी हुई भगवान श्री कृष्ण की बेशकीमती मूर्ति को बहोरीबंद थाना पुलिस ने बरामद किया है। यह मूर्ति 10 साल तक कपड़े की अलमारी में छुपा कर रखी थी। बाकल क्षेत्र के गांव राजा सलैया के मंदिर से 2010 में यह अष्ट धातु से बनी बेशकीमती मूर्ति को चोरी हो गई थी। जिसकी शिकायत बहोरीबंद थाने में दर्ज की गई। शिकायत दर्ज के बाद मुकदमा कायम कर पुलिस द्वारा मूर्ति को खोजने की कोशिश की थी।

पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि विक्रम सिंह लोधी मूर्ति चोरी की बारदातों में शामिल रहता है। पुलिस ने आरोपी से घर में भी दबिस दी, पर विक्रम लोधी द्वारा पुलिस को बार-बार गुमराह करता रहा। विक्रम ने पुलिस को दिखाने के लिए जबलपुर के तिलवारा से अष्टमूर्ति की तरह एक मूर्ति लाकर अपने घर पर रख लिया था और वही दिखा कर पुलिस को हमेशा गुमराह करता रहा। लेकिन बाकल के राजा सलैया क्षेत्र के लोगों ने बताया और मुखबिर ने पुलिस को पुख्ता जानकारी दी कि चोरी की मूर्ति का कोरबार विक्रम ही कर रही है। आखिरकार बहोरीबंद थाना प्रभारी रेखा प्रजापति से भी लोगों ने कार्यवाही करने की मांग की और कटनी पुलिस अधीक्षक ललित शाक्यवार और स्लीमनाबाद एसडीओपी पीके सरस्वत ने मिलकर योजना बनाई और पुलिस की एक टीम तैयार की जिससे कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके।

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पुलिस ने एक बार फिर विक्रम सिंह को पकड़कर पूछताछ की और आखिरकार अष्टधातु की मूर्ति की चोरी का पचा चल गया। पुलिस ने विक्रम की निशानदेही उसके घर से द्वारकाधीस की मूर्ति बरामद कर ली। पुलिस के मुताबिक भगवान की यह मूर्ति कपड़े वाली अलमारी के अंदर 10 साल से कैद थी। जिसे अंतराष्ट्रीय बाजार में बेचने की फिराक में था। पर कोई ग्राहक नहीं मिलने से इतने सालों तक वह असमारी में ही छुपाये रखा था। इस मार्ति की अंतराष्ट्रीय बाजार में कीमत 45 करोड़ रुपये है।

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