कोरोना काल में 7 महीने बाद भी मजदूर बेहाल, नहीं मिला काम, मनरेगा में भ्रष्टाचार

ग्रामीण मजदूरों का आरोप, कहीं मशीन तो कहीं ठेके पर हो रहा मनरेगा में काम

By: Ajay Chaturvedi

Published: 07 Sep 2020, 02:25 PM IST

कटनी. कोरोना संक्रमण को धीरे-धीरे सात महीने हो रहे हैं। मार्च में जब चार घंटे की मोहलत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया उसके कुछ ही दिनों पर लाखों मजदूर बेकार हो गए। बड़े शहरों से उनका पलायन शुरू हो गया। जैसे-तैसे लंबी-लंबी दूरी तय कर वो इस आस में अपने गांव-घर पहुंचे कि वहां मजूरी ही कर के परिवार का भरण पोषण कर लेंगे। तब सरकारों ने भी बड़े-बड़े वायदे किए। बड़े शहरों से अपने ही गांव-घर पहुंचे लोगों को "प्रवासी मजदूर" नाम दिया गया और वादा किया गया कि हर प्रवासी मजदूर को काम दिया जाएगा। इसके लिए सबसे मनरेगा का नाम आया। हर प्रदेश, हर जिले में मनरेगा के तहत काम का सृजन कर मजदूरो को काम देने के निर्देश जारी किए गए। लेकिन पहले दिन से जो भ्रष्टाचार मनरेगा में दिखना शुरू हुआ वह बदस्तूर सातवें महीने तक जारी है। कहीं से शिकायत आ रही है कि जिम्मेदार अपने रिश्तेदारों का नाम चढ़ा कर मजदूरी हड़प ले रहे तो कहीं मृतको के नाम मस्टर रोल में डालने की शिकायत। इससे इतर गए तो आनन-फानन में मशीन से ही काम करवा लेने की शिकायत। यानी कुल मिलाकर मजदूर आज भी बेकाम हैं।

कटनी, तेवरी, रीठी के मजदूरों की आम शिकायत है कि उन्हें काम नहीं दिया जा रहा। मनरेगा में भी जहां मानव जनित कार्य होने चाहिए वहां भी मशीन से काम कराए जा रहे हैं। रीठी के ग्राम पंचायत हरद्वारा में मजदूरों ने सरपंच सचिव पर मनमानी का आरोप लगाया है। ग्राम पंचायत के मजदूरों ने गांव मे काम न मिलने से परेशान होकर रविवार को ग्राम पंचायत का घेराव कर दिया। एक साथ इतनी बड़ी तादाद में मजदूरों को देख ग्राम पंचायत सचिव सुक्खी यादव कार्यालय से निकल भागे। इसके बाद मजदूरों ने ग्राम पंचायत के बाहर जमकर हंगामा किया।

मजदूरों का आरोप है कि ग्राम पंचायत स्तर से गांव में मनरेगा तहत जो भी निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं, वो ठेकेदारों से कराए जा रहे। इसमें ठेकेदार द्वारा दूसरी ग्राम पंचायतों के मजदूरों से काम कराया जा रहा है। ग्राम पंचायत हरद्वारा के मजदूर बेरोजगार होकर पलायन करने को मजबूर है। ग्राम पंचायत हरद्वारा निवासी बल्देव सोनी, निंदा, रामभरत पटैल, रामू पटेल, अजय पटैल सहित अन्य मजदूरों का आरोप है कि ग्राम पंचातय मे शौचालय निर्माण सहित सीसी रोड का निर्माण कार्य सरपंच सचिव द्वारा ठेका देकर कराया जा रहा है। इसके चलते गांव के मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पा रहा है। कहा कि कोरोना काल में गांव लौटे हम सभी को गांव में रोजगार नहीं मिल रहा है। इसके चलते उनके घरों मे भोजन के भी लाले पड़ने लगे है।

उधर स्लीमनाबाद, जनपद पंचायत बहोरीबंद अंतर्गत विभिन्ना ग्राम पंचायतों में 80 प्रतिशत श्रमिक मजदूरी पर आधारित है। इनमें से कुछ परिवार आज भी अति गरीबी का शिकार हैं। गांव में काम न मिलने के चलते ही ये दूसरे जिलों व बड़े शहरों में गए थे काम की तलाश में। लेकिन महामारी के चलते उन गरीबों का रोजगार तो छिन ही गया साथ ही उनके परिवार की स्थिति भी दयनीय हो चुकी है। मनरेगा के तहत कुछ मात्रा में श्रमिकों को काम दिया गया लेकिन उनके कार्य के आधार से मजदूरी देय होने से परिवार की स्थिति मजबूत नहीं हो सकी। इससे श्रमिक आज भी आर्थिक तंगी के बीच गुजारा कर रहे हैं। श्रमिकों को 100 दिन से ज्यादा काम दिया ही नहीं जा रहा व बहोरीबंद जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पहरुआ में गुजरात से मजदूरी करके लौटे हुए श्रमिकों को मनरेगा में भी जगह नहीं दी गई। श्रमिकोंबार कई बार पंचायतों के चक्कर लगाए लेकिन कोई कार्य नहीं दिया गया। ऐसे में कैसे मजदूरों की स्थिति में सुधार हो पाएगा।

यदि मजदूरों को कार्य नहीं मिल रहा तो इसका पता लगाया जाएगा, जहां भी इन्हें काम नहीं मिल रहा है। उन मजदूरों को काम मिले इसके लिए पंचायतों को निर्देशित किया जाएगा।- प्रदीप सिंह, जनपद सीईओ रीठी

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