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हाई स्कूल से महंगी प्रायमरी-मिडिल की किताबें, कमीशनखोरी में अभिभावकों की ढीली हो रही जेबें

निजी स्कूलों की साठगांठ से चल रहा खेल, पब्लिशर थोपकर लूट रहे

कटनी

Updated: April 16, 2022 09:30:19 pm

कटनी. निजी स्कूलों और स्टेशनरी दुकान संचालकों की साठगांठ से हाई स्कूल से महंगी पढ़ाई प्रायमरी और मिडिल की हो गई है। शहर के नामी निजी स्कूलों की किताबों का कक्षा 1 से 8 तक की किताबों सेट चुनिंदा स्टेशनरी दुकानों पर मिल रही है। यहीं से कमीशनखोरी का खेल शुरू हो रहा है। पब्लिशर थोपकर अभिभावकों को महंगी कीमत पर किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। बच्चों की किताबें खरीदने में अभिभावकों की जेबें ढीली हो रही है।

हाई स्कूल से महंगी प्रायमरी-मिडिल की किताबें, कमीशनखोरी में अभिभावकों की ढीली हो रही जेबें
हाई स्कूल से महंगी प्रायमरी-मिडिल की किताबें, कमीशनखोरी में अभिभावकों की ढीली हो रही जेबें

प्रमुख निजी स्कूलों के किताब के दाम...
प्रायमरी...
कक्षा 1 - 2500-2700 रुपए
कक्षा 2 - 2700-3000 रुपए
कक्षा 3 - 3100-3400 रुपए
कक्षा 3 - 3400-3600 रुपए
कक्षा 4 - 3500- 3700 रुपए
कक्षा 5 - 3500-3700 रुपए

मिडिल...
कक्षा 6 - 2800-3100 रुपए
कक्षा 7 - 2900-3100 रुपए
कक्षा 8 - 3000-3300 रुपए

हाई स्कूल...
कक्षा 9 - लगभग 1 हजार रुपए
कक्षा 10 - लगभग 12 सौ रुपए
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किताब का सेट, दुकान तय
बड़े प्राइवेट स्कूलों ने अलग-अलग कक्षा के लिए पब्लिशर के नाम तय किए है। इन पब्लिशर की किताबें किसी दुकान विशेष में ही उपलब्ध है। स्टेशनरी दुकानों में स्कूल के हिसाब से किताब के सेट बनें हुए है। संबंधित पब्लिशर की किताबें अन्य दुकानों में नहीं मिलने से मनमानी कीमत वसूली जा रही है। विकल्प के अभाव में एक ही दुकान में जाकर अभिभावक लुट रहे है।

कोई छूट नहीं, प्रिंट रेट पर वसूली
स्कूलों के साथ साठगांठ करके किताबों का सेट बेच रहे स्टेशनरी दुकानों पर किसी प्रकार की छूट नहीं है। अभिभावकों से प्रिंट रेट पर किताबों के दाम वसूले जा रहे है। स्कूलों को मोटा कमीशन देने के चलते पतली-पतली किताबों के कीमत भी दुकानदार कई गुना ज्यादा वसूल रहे है। लूट-खसोट में बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाने में अभिभावकों का बजट गड़बड़ा रहा है।

स्कूल से तय हो रही कीमत
निजी स्कूल ज्यादा कमाई की लालच में अब परदे के पीछे से किताबों के दाम भी तय कर रहे है। सूत्रों के अनुसार पब्लिशर और दुकान चिन्हित करने के बाद स्कूल किताबें बेचने की कीमत भी तय कर रहे है। किताबों के हर सेट पर स्कूलों को बराबर कमीशन मिल रहा है। स्टेशनरी कारोबारी से ज्यादा मोटी मलाई किताबों की बिक्री पर स्कूल मार रहे है।

कॉपी के भी मनमाने दाम
कमाई के अलग-अलग पैंतरें अपना रहे निजी स्कूलों में बच्चें को पढ़ाने पर कॉपियों क लिए भी अभिभावक ज्यादा दाम चुका रहे है। कुछ स्कूलों ने कॉपियों का भी प्रारुप तय कर रखा है। इनकी प्रचलित किताबें एक-दो दुकानों में ही मिलती है। किताब के अलावा कॉपी खरीदने पर भी 700-900 रुपए खर्च करने पड़ रहे है। इसके अलावा अन्य स्टेशनरी सामग्री भी अपेक्षाकृत महंगी है।

आंख मूंदे बैठा प्रशासन
शहर में सुभाष चौक, स्टेशन रोड, अहिंसा तिराहा क्षेत्र में स्टेशनरी की कई दुकानें है। यहां खुलेआम किताबों में खुल्लमखुल्ला लूट का खेल चल रहा है। बड़े स्कूलों की दुकान तय है सिर्फ वहीं पर उनकी किताबों का सेट मिल रहा है। किताबों में लूट पर लगाम लगाने के लिए सरकार के आदेश है। किसी स्कूल की सामग्री सिर्फ एक दुकान से खरीदने के लिए अभिभावकों को बाध्य करने पर कार्रवाई का प्रावधान है। लेकिन नया शिक्षण सत्र शुरु होने के बावजूद प्रशासन आंख मंूदें बैठा है। इस लूट पर लगाम लगाने कोई जांच एवं कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है।

एक सी किताबें, लूट में रोड़ा
हाई स्कूलों में निर्धारित पाठ्यक्रम और पब्लिशनर होने से प्रायमरी और मिडिल कक्षाओं जैसी लूट का मौका नहीं है। बोर्ड के अनुसार सभी स्कूलों में कक्षा 9 और 10 का पाठ्यक्रम और किताबें तय हैं। इस कारण लगभग सभी स्टेशनरी की दुकानों पर हाई स्कूल की किताबें मिल जाती है। इसके कारण स्कूल और दुकान संचालक मिलकर मनमानी नहीं कर पा रहे है। लेकिन कक्षा 1 से 8 तक स्कूल अपने अनुसार कुछ किताबें पाठ्यक्रम में शामिल कर लेते है। इनकी ओर से चुनी गई अतिरिक्त किताबों के दाम ही सेट में सबसे ज्यादा हैं।

इनका कहना है
निजी स्कूलों व स्कूल स्टेशनी कारोबारियों द्वारा यदि पुस्तकों व कॉपियों के अधिक दाम वसूले जा रहे हैं तो इसकी जांच की जाएगी। किसी भी हाल में मनमानी नहीं चलेगी। अभिभावक सीधे भी शिकायत कर सकते हैं।
पीपी सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी।

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