MP के इस शहर में प्रतिबंधित फेंसीडिल कफ सीरप के बाद सामने इन नकली दवाओं का कारोबार

कटनी में सालाना फल-फूल रहा ६० करोड़ के नकली दवाओं का कारोबार, हिमाचल प्रदेश से कटनी पहुंच रहीं नकली मल्टीविटामिन सिरप, यहां से प्रदेशभर में सप्लाई

By: balmeek pandey

Published: 09 Dec 2017, 11:19 AM IST

कटनी. हिमाचल प्रदेश के पेंटाशाही में बन रही नकली (मिस ब्रांड) मल्टीविटामिन सिरप कटनी पहुंच रही है, यहां से इसकी सप्लाई प्रदेशभर के अलग-अलग शहरों में हो रही है। हर माह कटनी शहर से पांच प्रकार की नकली दवाओं की सप्लाई का कारोबार लगभग ५ करोड़ रुपए मासिक व सालाना लगभग ६० करोड़ रुपए से अधिक का है। इसका खुलासा स्टेट लेबोटरी (राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला) से मिली रिपोर्ट के बाद हुआ है। इसमें खाद्य सुरक्षा प्रशासन कटनी द्वारा उन मेडिकल स्टोर संचालकों के खिलाफ प्रकरण न्यायालय में पेश किया है, जहां से नकली दवाओं के सैंपल लिए गए थे।

इनके खिलाफ पेश किया प्रकरण
-रामा मेडिकल स्टोर्स एजेंसीज, गर्ग चौराहा
-रामा मेडिकल एजेंसीज, गर्ग चौराहा
-सुनील मेडिकल स्टोर्स, माधवनगर
-गुरुनानन मेडिकल स्टोर्स, साधूराम स्कूल के पास

खास-खास
- विकोजिंक, लाइजिड, ऑक्सीलोर, ब्रिला, आस्ट्रो मल्टीविटामिन सिरप के लिए गए थे सैंपल।
- अमानक व मिसब्रांड के संदेह पर २३० दवाओं के लिए गए थे नमूने।
- १५ केस न्यायालय में भेजे गए, जिसमें से ९ पर निर्णय पारित हुए और ४ कारोबारियों पर जुर्माना भी अधिरोपित किया गया।
- ४ कारोबारियों पर लगाया गया ३ लाख ६० हजार रुपए जुर्माना।

पैकिंग नंबर, पता गलत:
इन दवाओं में डेट ऑफ पैकिंग, बैच नंबर, वेस्ट विफोर, निर्माण का संपूर्ण पता, फूड लायसेंस नंबर आदि सही नहीं होता है।

सजा का प्रावधान:
नकली (मिस ब्रांड) दवाओं पर ३ लाख तक, अमानक पर १० लाख तक जुर्माना और असुरक्षित ब्रांड पर ६ माह से लेकर उम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। मानव स्वास्थ्य के लिहाज से भी असुरक्षित प्रोडक्ट होने पर ६ माह से लेकर उम्र कैद की सजा का प्रावधान है।

प्रतिबंधित फेंसीड्रिल कफ सिरप का बड़ा कारोबार आ चुका है सामने
कटनी शहर नकली और प्रतिबंधित दवा का पिछले कुछ सालों से गढ़ बनता जा रहा है। २ अप्रैल २०१५ को कुठला पुलिस ने प्रतिबंधित कफ सिरप फेंसीडिल की ३७ हजार २०० शीशियां जब्त की थी। ३५ लाख ८१ हजार ६१० रुपए की सीरप जब्त की गई थी। इस सीरप की तस्करी इंदौर, ग्वालियर से जबलपुर के रास्ते कटनी पहुंचती थी। इसका कारोबार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुका था। जिसके बाद इसकी जांच तत्कालीन एनकेजे थाना प्रभारी गायत्री सोनी को सौंपी गई थी। करोड़ों रुपए के इस अवैध कारोबार में ट्रांसपोर्टर सहित देश के विभिन्न हिस्सों से कारोबारी संलिप्त पाए गए बिहार से लेकर बंगलादेश तक इसका जाल फैला था।

- हिमाचल की कंपनी बनाती थी कप सीरप
- चूने की बिल्टी में कफ सीरप का होता था कारोबार
- कॉल डिटेल से उजागर हुआ था करोड़ों का कारोबार
- लखनऊ से भी जुड़े थे तार
- कटनी, जबलपुर, छिदवाड़ा, इंदौर के कारोबारी थे शामिल।
- जबलपुर से बुक होकर पहुंची थी सीरप।
- कोलकाता निवासी डीके और पटना निवासी नरेश चलाते थे अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क।
- बगैर सेल्टैक्स चुराए लाखों का कारोबार हो रहा था।
- हवाला की तरह बंटता था फेंसीडिल का पैसा।
- याददास्त के लिए घातक थी ये सीरप।
- हर माह ४० लाख से अधिक की होती थी खपत।
- गुरुनानक मेडिकल एजेंसी, फार्म ट्रेडर्स, रामा फार्मा डिस्ट्रीब्यूटर, सुदर्शन ट्रेडर्स, आहूजा मेडिकल एजेंसी, विशाला मेडिकल, आरपी मेडिकल थे स्टाकिस्ट।
- छिंदवाड़ा व जबलपुर से जब्त हुई थीं और सीरप।

इनका कहना है
जिले में दवाओं के सेम्पल लिए गए थे। जांच में ५ सिरप मिस ब्रांड पाई गई हैं। इस पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
डॉ. अशोक अवधिया, सीएमएचओ खाद्य सुरक्षा प्रशासन।

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