बारिश न होने से सूखने लगीं फसलें, किसान परेशान

-चालू वर्षा काल में जिले में कुल 325.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई
-जिले की कुल सामान्य वर्षा 1124.4 मिमी

By: Ajay Chaturvedi

Published: 31 Jul 2020, 07:48 PM IST

कटनी. किसान करे तो क्या करे, न ऊपर वाले की मेहर न शासन-प्रशासन की। कहीं अति वृष्टि से परेशान तो कहीं अवर्षण से चिंता की लकीरें। अब अगर कटनी जिले की बात करें तो यहां के किसान बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। मुकम्मल बारिश न होने से उऩकी फसल सूख रही है। सिंचाई के पर्याप्त संसाधऩ न होने से वो बेबस हैं। बस टकटकी लगाए बैठे हैं। यहां सावन में गर्मियों के जैसा माहौल देखने को मिल रहा है। इससे किसान चिंता में हैं। सूखते खेतों ने किसानों को चिंता में डाल दिया है।

चालू वर्षाकाल में जिले में अब तक कुल 325.9 मिमी औसत वर्षा रिकार्ड की गई है जबकि जिले की कुल सामान्य औसत वर्षा 1124.4 मिमी है। यानी 798.5 मिमि कम वर्षा हुई है। पिछले साल इस अवधि में कुल वर्षा 374.4 मिमी दर्ज की गई थी। तहसीलवार अब तक हुई वर्षा में कटनी तहसील में 494.6 मिमी, रीठी तहसील में 344.4 मिमी, बड़वारा तहसील में 280.0 मिमी, बरही तहसील में 493.0 मिमी, विजयराघवगढ़ तहसील में 277.5 मिमी, बहोरीबंद तहसील में 325.7 मिमी, स्लीमनाबाद तहसील में 257.0 और ढीमरखेड़ा तहसील अंतर्गत 135.1 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है।

कम बारिश के चलते फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। ऊपर से बिजली कटौती ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। तालाब भी अभी नहीं भर सके हैं। इससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के कई गांवों में कृषि फीडर के ट्रांसफार्मर बंद पड़े हैं। कम बारिश और तापमान बढ़ने से खरीफ फसलों की वृद्धि रुकने की भी आशंका किसानों को सता रही है।

पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष रकबा बढ़ा है। किसानों के मुताबिक आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई और मौसम में नमी नहीं आती है तो ये नुकसान बढ़ सकता है। किसानों ने बताया कि हमने जैसे-तैसे रोपाई तो कर दी है लेकिन बारिश न होने से परेशानी बढ़ गई है। स्लीमनाबाद के मटवारा व देवरी गांव के किसानों ने बताया कि किसानों की फसलें सूख रही हैं। ऊपर से बिजली कटौती ने किसानों को परेशान कर रखा है। इससे खेतों में लगी धान सूख रही है।

जिले में कुल 89 जलाशय हैं जिनमें अधिकतर अभी खाली पड़े हैं। किसानों का कहना है कि उनके यहां के जलाशय में इस बार की बारिश में पर्याप्त पानी नहीं इकट्ठा हो पाया है। ऐसे में यदि आगे बारिश नहीं हुई तो धान की फसल को नुकसान पहुंचेगा।

"बारिश न होने से रोपाई प्रभावित हुई है। फिर भी 80 फीसद बोवनी हो गई है। किसानों को सलाह है कि जिन खेतों में नमी नहीं है, वहां पानी देकर रोपाई करें। जो फसलें बड़ी हो गई हैं उनमें निड़ाई कर लें। कीड़ों की निगरानी करते रहें, कीट नियंत्रण के उपाय करें। अगस्त में बारिश होने की संभावना है।"-अशोक राठौर, उपसंचालक कृषि

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