फर्जीवाड़ा: सरकारी रिकॉर्ड में पहाड़ और घास मद में दर्ज जमीन हो गई निजी के नाम

तहसीलदार करेंगे जांच, कैसे हो गया ये गड़बढ़ घोटाला
खदान बंद होते ही सरकारी दर्ज करने का प्रावधान

कटनी। बरगवां के पास अरबों रुपये की सरकारी जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण की जांच राजस्व विभाग ने शुुरू कर दी है। यहां लाल पहाड़ी के पास की जमीन पूर्व में सरकारी रिकॉर्ड पर पहाड़ और घास दर्ज है। अब तहसीलदार जांच करेंगे कि सरकारी जमीन डन और दूसरे व्यक्तियों के नाम पर कैसे चढ़ गई।
खनिज के लिए आबंटित जमीन खदान बंद होने के बाद वापस सरकारी दर्ज करने का प्रावधान है। प्रक्रिया तहसीलदार द्वारा पूरी की जाती है। बता दें कि बरगवां में लाल पहाड़ी के आसपास का बड़ा क्षेत्र राजस्व दस्तावेज में सरकारी जमीन दर्ज है। यहां सरकारी छात्रावास है और डॉक्टरों के लिए भी सात एकड़ से ज्यादा जमीन आवास के लिए आबंटित हुई है। ऐसे में बीच-बीच की जमीन का अंश निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इधर, लाल पहाड़ी की पूरी जमीन सरकारी रिकॉर्ड में निजी व्यक्तियों से हटाकर सरकारी दर्ज किए जाने की प्रक्रिया शुरू होते ही भू-माफियाओं में हडक़ंप है।
सीएम के आदेश के बाद खुलासा: शहर के बीचोंबीच बेशकीमती जमीन पर भू-माफियाओं द्वारा अतिक्रमण किए जाने का खुलासा प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा माफिया दमन कार्रवाई का आदेश देने के बाद हुआ। नागरिकों ने बताया कि भू-माफिया ने राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी कर सरकारी जमीन को गलत तरीके से निजी चढ़ाया गया। रिकॉर्ड में हेराफेरी की गई।

इनका कहना है -लाल पहाड़ी और आसपास की जमीन पूर्व में पहाड़ और घास दर्ज है। यह जमीन किसी भी निजी व्यक्ति के नाम नहीं की जा सकती है। इस मामले में शिकायत भी मिली है, जिसकी जांच शुरू कर दी है। सरकारी जमीन गलत तरीके से निजी व्यक्तियों के नाम है तो वापस सरकारी दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी। -मुनव्वर खान, तहसीलदार

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sudhir shrivas
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