#patrikabuildupindia बंजर खेतों में हरियाली, रोजगार में स्थानीयता से बदलेगी तकदीर

कोरोना संकट काल में बाहर से लौटे मजदूरों के साथ ही जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए जरूरी है हर घर हो आत्मनिर्भर, प्रत्येक हाथ को मिले काम.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 27 May 2020, 01:56 PM IST

कटनी. कोरोना संक्रमण के इस संकट काल में अब जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाने के लिए फिर नई ऊर्जा और नए जोश के साथ मैदान पर उतरना होगा। बंजर खेतों में हरियाली, आत्मनिर्भर हर घर और प्रत्येक हाथ को रोजगार से एक बार फिर हम इस चुनौती से पार सकेंगे। खेती, पशुपालन, रोजगार और पलायन पर पत्रिका द्वारा आयोजित चर्चा में जानकारों के जो विचार सामने आए उसके अनुसार सरकार और उनके कर्ताधर्ता को अब जमीन पर उतरकर काम करना होगा।

उद्योगों की बात करें तो शहर में दाल मिल और राइस मिल की संख्या ही दो सौ से अधिक है। इसके अलावा रिफेक्ट्रीज और अन्य इकाइयां भी हैं। खनिज के क्षेत्र में मार्बल से लेकर आयरनओर, बाक्साइड और दूसरी खदानें हैं। इन उपक्रमों में हर माह दस हजार से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिल सकता है। इसके लिए सरकार और स्थानीय प्रशासन को आगे आकर पहल की जरूरत है।

खास-खास
- उद्योगों के सामने चुनौती यह है कि उत्पादन शुरू भी कर दें तो बड़े बाजार जैसे मुंबई, दिल्ली व इंदौर सहित अन्य शहरों में माल की डिमांड नहीं है। अभी भी इन शहरों में पचास प्रतिशत काम बंद है।
- ट्रेनों की आवाजाही बंद होने के बाद शहर में इससे जुड़े हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। समाजसेवी और दूसरे माध्यमों से अब तक इन्हे मदद मिलती रही, लेकिन अब जरूरी होगा इनको काम मिले।


फैक्ट फाइल
- 29 हजार 231 लोग अब तक बाहर से लौटे हैं। जरूरी होगा इन लोगों को लिए स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना।
- 56 हजार श्रमिकों को मनरेगा योजना में काम से जोड़ा गया है। इस संख्या और बढ़ाने की जरूरत है।
- 2 सौ से ज्यादा दाल मिल और राइस मिल में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर तो हैं, जरूरी है बाजार खुले।

शहर के उद्योगपति मनीष गेई बताते हैं कि बाहर से लौटे श्रमिकों को अब काम से जोडऩा होगा। इसके लिए जरूरी है कि सरकारी योजना में निर्माण के जो भी काम रुके हुए हैं, उन्हे जल्द से जल्द चालू किया जाए। ठेकेदारों को रूके हुए भुगतान शीघ्र जारी काम शुरू करवाई जाए और कोशिश रहे कि इसमें स्थानीय लोगों को ही काम दिया जाए। फ्लाईओवर, बांध, पुल, सड़क निर्माण प्रारंभ कर शहर से लेकर गांव तक लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराया जा सकता है। ये काम शुरू होंगे तो निश्चित तौर पर जो लोग घरों में बैठे हैं उन्हे काम मिलेगा। काम मिलेगा तो बाहर जाने की नौबत नहीं आएगी।

मध्यप्रदेश लघु उद्योग संघ के सचिव सुधीर मिश्रा ने बताया कि जिले से पलायन बढ़ा है तो इसके पीछे प्रमुख कारण है दलालों का सक्रिय होना। कटनी और आसपास रोजगार के पर्याप्त अवसर हैं। छोटे-बड़े उद्योगों के साथ ही खनिज और दूसरे उपक्रम में बड़े पैमाने पर लोगों को काम से जोड़ा सकता है। बस इसके लिए जरूरी है कि ऐसे उपक्रमों के कर्ता-धर्ता स्थानीयता को महत्व दें। पूर्व में पलायल के बाद जो श्रमिक दलालों के चंगुल में फंसे वे जब भी वापस आना चाहे तो भारी क्षति का सामना करना पड़ा, भुगतान इत्यादि नहीं मिला यह कहकर वापिस कर दिया कि बकाया राशि काम पर लौटने पर भरण पोषण के लिए दी जाएगी।
जैविक कृषि एक्सपर्ट रामसुख दुबे के अनुसार कोरोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान किसान जैविक खेती के माध्यम से आत्मनिर्भर हो सकते हैं। जैविक खाद के अंतर्गत केचुआ खाद, नाडेप टांका खाद, गोबर कंपोस्ट एवं कीट नाशक के अंतर्गत गौमूत्र, अकौआ धतूरा नीम आदि की पत्तियों से कीटनाशक बनाकर खाद एवं कीट नाशक का उपयोग अपनी फसलों में करके बाजार में लगने वाला पैसा बच सकता है। केंचुआ खाद एवं केचुआ विक्रयकर रुपये कमा सकते हैं। जीरो बजट की खेती फार्मूला अपनाकर कृषक आत्मनिर्भर होंगे, कृषि में क्रांतिकारी परिवर्तन होगा।
मानवजीवन विकास समिति के सचिव निर्भय सिंह बताते हैं कि धरती लोगों की आवश्यकता पूरी कर सकती है, लालच नहीं। इसी सिद्धांत के तहत गांव में ग्रामीण अर्थव्यवस्था जमीन आधारित ही टिक सकती है। उन्नत खेती, सब्जी उत्पादन, समूहों के माध्यम से घरेलू उत्पाद, स्वरोजगार, नए-नए फसल चक्र से महामारी जैसे विपदा का सामना भी कर सकने की ताकत होगी। आगे आने वाली पीढ़ी का स्वास्थ्य भी ठीक होगा। खेती, मुर्गी पालन, बकरी पालन, छोटे-छोटे कुटीर उद्योग धंधे को अपनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है। गांव में अनाज बैंक, श्रम बैंक, ग्राम कोष जैसी अवधारणाओं पर अमल करना होगा। गांव की अर्थव्यवस्था वाटिका को मजबूत रखने के लिए अधिक से अधिक लोगों को काम दिया जाए, पलायन को रोकने मजबूत योजना बने।
दयोदय पशु सेवा केंद्र के महामंत्री प्रमोद जैन के अनुसार संपूर्ण विश्व में कोरोना महामारी से प्रत्येक जीव भयभीत है। हमें स्वयं अपनी आत्मरक्षा के साथ स्वावलंबन की ओर बढऩा होगा। एकदफा पुराने भारत की ओर उस स्वर्णिम युग की ओर वापस होना होगा जहां हर घर में स्वयं का रोजगार था, स्वयं का पशुपालन था। लोग अपने घर में ही अपने उपयोग का सामान व्यवस्थित कर लेते हैं। आज यह परिस्थिति है कि हम दूसरों पर आश्रित हैं। ऐसी परिस्थिति में हम यदि पशुपालन, उससे होने वाले उत्पाद स्वयं की गोबर गैस उत्पादन एवं गोमूत्र से कीटनाशक आदि का उत्पादन करके पंचगव्य का उत्पादन करके निरोगी भी हो सकते हैं और लोगों को भी निरोग कर सकते हैं। वर्तमान के परिपेक्ष में गोवंश का संरक्षण और संवर्धन अति आवश्यक है। मवेशियों के माध्यम से खेती, गौ पालन से दूध, दही, छाछ, घी का कारोबार, खाद, कीटनाशक उत्पाद से आय प्राप्त कर सकते हैं।

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