जरूरतमंदों के पक्के आवास के सपने पर भारी ठेकेदारों की मनमानी

ढाई हजार से ज्यादा परिवारों को मिलनी है पक्के मकान की सौगात, तीन साल से चल रहे प्रोजेक्ट में एक साल पहले ही पूरा हो जाना था काम.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 29 Dec 2020, 11:44 AM IST

कटनी. शहर में जरूरतमंद परिवारों के पक्के मकान का सपना पूरा करने के लिए ढाई हजार से ज्यादा मकान निर्माण के दो आवासीय प्रोजेक्ट में ठेकेदारों की मनमानी का साया है। 2017 से शुरू हुई परियोजना का काम बेहद ही धीमी गति से चल रहा है। खासबात यह है कि समय-समय पर कार्य में तेजी लाने के मामले में नगर निगम के अफसरों की बेपरवाही भी सामने आती रही है।

तीन साल पहले शुरू हुई परियोजना का काम दो साल में पूरी हो जानी थी, लेकिन तीन साल बाद भी काम अधूरा है। फेज वन में ठेकेदार की मनमानी कलेक्टर के निरीक्षण में सामने आई। आठ दिन पहले नोटिस और कार्रवाई के निर्देश दिए गए, लेकिन नगर निगम के जिम्मेंदारों ने इस पर भी ठोस कार्रवाई नहीं की।

कलेक्टर के निरीक्षण सामने आई निर्माण में लापरवाही
शासकीय निर्माण कार्यों का जायजा लेने 22 दिसंबर को कलेक्टर प्रियंक मिश्रा शहर में विभिन्न स्थानों पर पहुंचे। प्रेमनगर में फेज-2 के तहत 1744 ईडबल्यूएस और 1056 एलआईजी मिलाकर कुल 2800 आवासों का निर्माण किया जा रहा है। 4 ब्लॉकों में बन रहे इन आवासों में 26 जनवरी को 112 लोगों को गृह प्रवेश दिए जाने की बात आयुक्त ने बताई। यहां पेयजल की सुगम व्यवस्था के लिये 5 लाख लीटर क्षमता का सम्पवेल भी बनाने की जानकारी भी कलेक्टर को दी गई। इसी दौरान फेज-1 निर्माण में लापरवाही की बात सामने आने पर कलेक्टर ने कार्रवाई के निर्देश दिए।
कलेक्टर प्रियंक मिश्रा बताते हैं कि फेज वन में लेटलतीफी पर कार्रवाई के निर्देश नगर निगम आयुक्त को दिए हैं। प्रेमनगर में गुणवत्तापूर्ण निर्माण समय पर पूर्ण करने कहा गया है।

यह भी जानें
- शहर में प्रेमनगर व झिंझरी में पीएम आवास योजना के तहत निर्माणाधीन प्रोजेक्ट में काम की गति बेहद धीमी है।
- 117.46 करोड़ रुपये की लागत से बिलहरी मोड़ झिंझरी में बीआरपी एसोसिएट ने 30 नवंबर 2017 को निर्माण का अनुबंध कराया। 18 माह में निर्माण पूरा होना था। 792 जरुरतमंद परिवारों के लिए आवास का निर्माण होना है।
- आवास के निर्माण में काम की धीमी गति की मुख्य वजह भुगतान न होना भी रहा है। झिंझरी में निर्माणाधीन प्रोजेक्ट के लिए 7900 वर्गमीटर कॉमर्शियल भूमि बेचकर नगर निगम को राशि का इंतजाम करना है।

raghavendra chaturvedi Bureau Incharge
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