mp election 2018: मैं डॉक्टर बताऊंगा मर्ज, यहां ट्रैफिक को लगा सियासत का रोग

mp election 2018: मैं डॉक्टर बताऊंगा मर्ज, यहां ट्रैफिक को लगा सियासत का रोग

raghavendra chaturvedi | Publish: Sep, 12 2018 09:48:25 AM (IST) Katni, Madhya Pradesh, India

हम वोट देकर भूल जाते हैं और हमारी इस भूल को नेता अपनी कामयाबी मान लेते हैं, इस मर्ज का इलाज संभव- एक कदम हम भी तो आगे बढ़ाएं

कटनी. भगवान राम ने भरत से पूछा था क्या आपके राज में अवैतनिक सलाहकार हैं। क्योंकि वैतनिक सलाहकार तो वही बताएंगे जो राजा को सुनना पसंद है। ऐसे सलाहकार को भला जनता की परेशानी से क्या वास्ता। शहर के जाने माने रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय निगम भी शहर में लगातार बढ़ रही ट्रैफिक समस्या से आमजनों की तरह परेशान हैं। डॉ. निगम बताते हैं कि ट्रैफिक की समस्या दिनोंदिन जितनी विकराल रुप ले रही है। उसके सुधार के प्रयास उतने ही नाकाफी हैं।
पांच साल पहले ट्रैफिक की समस्या के निदान के लिए सड़क चौड़ीकरण का अभियान चला। कुछ रास्तों पर आधा-अधूरा चला और फिर बंद हो गया। जो शहर में विकास की राजनीति करते हैं उनके प्रयास कहीं न कहीं कथनों तक ही सीमित है। ट्रैफिक की समस्या अगर घटने के बजाए बढ़ती जा रही है तो कहीं न कहीं हम भी जिम्मेंदार हैं। सड़क पर न जाने कितनी जल्दी होती है। कई बार तो यह जल्दबाजी ही ट्रैफिक समस्या को बढ़ा देती है। ट्रैफिक नियम मानने के तो जैसे संस्कार ही नहीं हैं।
इस पीढ़ी को संस्कार सिखाने के लिए कक्षाएं खोलने की बात कही जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। मुझे अच्छे से याद है जीएसएस स्कूल में हमारे एक दोस्त ने मंहगे होटल में बर्थडे सेलिबे्रट किया। अगले दिन बात स्कूल में फैली नेलसन सर को पता चला तो उन्होंने कहा ऐसी फिजूलखर्ची क्यों? बर्थडे तो घर में भी सेलिब्रेट किया जा सकता था। दोस्त ने बात घर पर बताई और अगले दिन उसकी माँ स्कूल आ पहुंचीं, बोलीं हमारा बेटा चाहे जहां बर्थडे सेलिबेट करे। पैसा क्या नेलसन का है। हमारे पास पैसे हैं, इसलिए खर्च कर रहे हैं।
बात पैसे की नहीं है, संस्कार भी तो जरुरी है जो हमे समाज में बेहतर नागरिक बना सके। मैने बड़ी गाड़ी तब ली थी जब पार्किंग के स्थान बना सका। रात में आप शहर में निकले, ज्यादातर चारपहिया सड़क पर खड़ी मिलेगी। ऐसा नहीं है कि ट्रैफिक की समस्या को हल करने के प्रयास नहीं हुए। प्रयास तो हुए पर ज्यादातर प्रयास पूरी तरह अमल में नहीं लाया जा सका। हम वोट देने के बाद अगले पांच साल के लिए भूल जाते हैं। हमारी इस भूल को नेता अपनी कामयाबी मान लेते हैं। जिसे वोट दिया क्या कभी जाकर उससे पूछा कि वह हमारी समस्या के निराकरण क्या ठोस उपाय कर रहा है।

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