मंडी अफसरों से सांठगांठ कर लाखों रुपये मंडी टैक्स की चोरी करना फर्म को पड़ा महंगा, लाइसेंस हुआ रद्द

मेसर्स फेयर फूड ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों द्वारा मंडी अधिकारी-कर्मचारियों से सांठगांठ कर मंडी टैक्स की चोरी करना भारी पड़ गया है। जांच में गड़बड़ी उजागर होने पर फर्म की अनुज्ञप्ति मंडी द्वारा निलंबित कर दी गई है। बता दें कि 2012 से लेकर 2015 तक मंडी अधिकारियों से मिलीभगत कर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया था।

By: balmeek pandey

Updated: 15 Jul 2020, 11:20 AM IST

कटनी. मेसर्स फेयर फूड ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के संचालकों द्वारा मंडी अधिकारी-कर्मचारियों से सांठगांठ कर मंडी टैक्स की चोरी करना भारी पड़ गया है। जांच में गड़बड़ी उजागर होने पर फर्म की अनुज्ञप्ति मंडी द्वारा निलंबित कर दी गई है। बता दें कि 2012 से लेकर 2015 तक मंडी अधिकारियों से मिलीभगत कर बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया था। इसमें साधारण धान को बासमती बताकर मंडी टैक्स में चोरी की और निराश्रित शुल्क भी नहीं जमा किया गया। 20 मई के अंक में 'साधारण धान को बासमती बताकर 36 लाख रुपये मंडी टैक्स चोरी की फाइल दबीÓ नामक शीर्षक से पत्रिका ने मामले को प्रमुखता से उजागर किया। जिसके बाद मंडी सचिव पीयूष शर्मा हरकत में आए और आनन-फानन में फर्म संचालक का पक्ष लेकर उसकी रिपोर्ट भोपाल मुख्यालय भेजी। परीक्षण उपरांत जांच रिपोर्ट में मप्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने फर्जीवाड़ा पाया। इसमें 30 जून को मंडी सचिव पीयूष शर्मा को पत्र जारी कर मंडी टैक्स चोरी के मामले में वसूली के निर्देश दिए। मंडी अधिनियम 1972 एवं उपविधि 2000 के अनुसार अनुज्ञप्ति शतों का उल्लंघन पाया गया। जांच प्रतिवेदन 14 जनवरी 2016 के आधार पर पाया गया कि 2012-13, 2013-14 और 2014-15 में 35 लाख 93 हजार 719 रुपये मंडी टैक्स व 5 लाख 54 हजार निराश्रित शुल्क वसूली योग्य है। राशि जमा न करने पर अनुज्ञप्ति निलंबित की गई है।

यह है मामला
जानकारी के अनुसार मेसर्स फेयर फूड ओवरसीज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक दौलतराम मेहानी, शंकर मेहानी सहित एक अन्य के द्वारा मंडी में धान खरीदी गई। इसमें फर्म द्वारा साधारण धान खरीदी गई। इस धान में मंडी टैक्स व निराश्रित शुल्क चुकाना पड़ता है। कारोबारी को पांच साल तक बासमती धान में मंडी टैक्स की छूट मिली थी। संचालकों ने इसी का फायदा उठाकर अधिकारियों से सांठगाठ कर बासमती धान के दस्तावेज बनवा लिए। जांच में मामला उजागर हुआ, जिसके बाद 16 दिसंबर 19 को पत्र क्रमांक 4665 के माध्यम से उप संचालक मप्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने मंडी सचिव पीयूष शर्मा को तत्काल राशि जमा कराने कहा गया, लेकिन कार्रवाई नहीं की जा रही थी। पत्रिका ने सिलसिलेवार मामले उजागर किए, जिसमें मंडी प्रशासन हरकत में आया, मामले की जांच हुई और बड़ी कार्रवाई हुई है।

इनका कहना है
मेसर्स फेयर फूड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा साधारण धान को बासमती बताकर मंडी टैक्स की चोरी की गई। निराश्रित शुल्क भी नहीं जमा किया गया था। जांच में गड़बड़ी उजागर होने पर राशि जमा करने नोटिस जारी किया गया था। फर्म संचालक द्वारा राशि न जमा करने पर नियमों व शर्तों का उल्लंघन पाए जाने पर 10 जुलाई को लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है।
पीयूष शर्मा, मंडी सचिव।

balmeek pandey Reporting
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