इनके हाथों के हुनर के लोग वर्षों से हैं कायल...देखिए वीडियो

वर्षों से सोने-चांदी पर हाथ की कारीगरी से दिखा रहे कमाल, देवी देवताओं के मुकुट, कुंडल, प्रतिमाओं का देते हैं आकार

By: mukesh tiwari

Updated: 04 Apr 2019, 12:08 PM IST

कटनी. जो काम मशीनोंं से न हो, ऐसे काम को अपने हाथों से करने का हुनर शहर के सराफा कारीगर रज्जू सोनी वर्षों से करते आ रहे हैं। उनके इस हुनर के शहर के लोग ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के लोग भी मुरीद हैं। रज्जू सोने-चांदी के देवी-देवताओं के मुकुट, कुंडल, प्रतिमाएं बनाने में माहिर हैं और लोग अपने घरों के मंदिरों के साथ ही प्रतिमाओं में श्रंगार अर्पित करने के लिए सामग्री बनवाने उनके यहां पहुंचते हैं। नवरात्र को दो दिन का समय बाकी है और इन दिनों वे दिनरात अपने आर्डर को पूरा करने में जुटे हैं।
सराफा व्यापारी रज्जू पिछले २५ साल से सोने-चांदी की प्रतिमाओं के साथ ही देवी-देवताओं के मुकुट, कुंडल, बाजूबंद, हार आदि बनाते आ रहे हैं। उनका परिवार वर्षों से काम कर रहा है। लोगों की डिमांड के हिसाब से वे सोने-चांदी को आकार व डिजायन करते हैं। सराफा व्यापारियों के अनुसार शहर में इस तरह का कार्य करने वाले रज्जू एकलौते कारीगर हैं। इसके अलावा बनारस में इसी तरह का कार्य होता है। शहर के अलावा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास लगे जिलों से भी सराफा व्यापारी उनको मंदिरों के लिए सामग्री बनवाने का आर्डर देते हैं।
एक हफ्ते तक लगता है समय
एक मुकुट को बनाने में लगभग एक सप्ताह का समय लगता है। रज्जू के अनुसार कटिंग के बाद उसे जोडऩे और सफाई का काम करने में एक सप्ताह के लगभग लग जाते हैं। आधुनिक युग में जहां मशीनों से की जा रही कटिंग व डिजायन का काम हो रहा है तो ऐसे में रज्जू की कारीगरी को लोग इसलिए पसंद करते हैं कि उसमें लगभग 100 प्रतिशत चांदी आदि की शुद्धता रहती है जबकि मशीन से कटिंग के दौरान 60 से 70 प्रतिशत शुद्धता का काम होता है।

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