video: गरीबों की थाली में हावी अफसरों की बेपरवाही

शहर में दम तोड़ रही दीनदयाल अंत्योदय रसोई योजना, जरुरमंद परिवारों को बीते कई माह से भोजन में नहीं मिली सब्जी.

अधिकारियों की जवाबदेही ऐसी कि नगर निगम आयुक्त को मीटिंग में व्यस्त होने के बहाने परेशानी सुनने तक की फुर्सत नहीं.

प्रभावित लोगों ने कहा भोजन की गुणवत्ता सही नहीं होने से स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर.

 

By: raghavendra chaturvedi

Updated: 15 Mar 2020, 08:00 PM IST

Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

कटनी. भवन निर्माण में काम करने वाले संतोष साहू के साथ मजदूरी करने वाले धीरालाल, गोपाल सिंह व लखन लाल 14 मार्च की दोपहर प्रियदर्शनी बस स्टैंड के पास दीनदयाल रसोई योजना में भोजन करने पहुंचे तो रोज की तरह थाली में चावल, दाल और रोटी ही नसीब हुई। भोजन कर रहे इन चारों ने बताया कि दो माह से ज्यादा समय से वे बीच-बीच में भोजन करने यहां आते हैं। भोजन में दाल व चावल तो मिलती है, लेकिन कभी भी सब्जी नहीं मिली। मैनेजर से शिकायत करने पर कहा जाता है कि नगर निगम से पैसे नहीं मिल रहे हैं तो निर्धारित मीनू का पालन कैसे हो।
जरुरतमंदों ने बताया कि उनके लिए प्रारंभ की गई दीनदयाल रसोई योजना नगर निगम के अधिकारियों की बेपरवाही की भेंट चढ़ गया है। तीन साल से ज्यादा समय से संचालन के दौरान कभी भी नगर निगम के अधिकारियों ने जरुरतमंद परिवारों के चलाई जा रही इस केंद्र के बेहतर संचालन पर ध्यान नहीं दिया।

पहले केंद्र चलाने वाले को एक साल से पैसे नहीं मिला तो काम छोड़ दिया। अब नगर निगम के अधिकारी एक कर्मचारी के रिश्तेदार से केंद्र चलवा रहे हैं। इसमें अनाज के नाम पर गड़बड़ी की भी आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि केंद्र संचालन के लिए हर माह 35 क्विंटल अनाज मिलता है। इसमें चावल और गेहूं शामिल है। संचालकों की यह कोशिश रहती है कि भोजन की गुणवत्ता ऐसी हो कि ज्यादा लोग भोजन नहीं करें, और मुनाफा हो सके।

खासबात यह है कि इस पूरे मामले से नगर निगम आयुक्त आरपी सिंह भी बेपरवाह हैं। दीनदयाल रसोई का बेहतर संचालन नहीं होने के सवाल पर मीटिंग में व्यस्त होने की बात कहकर सवाल सुनना ही वे मुनासिफ नहीं समझते हैं।
जरुरतमंद लोगों के लिए चलाई जा रही इस योजना के क्रियान्वन पर पत्रिका ने स्टिंग की तो भुगतान को लेकर भी चौकाने वाले मामले सामने आया। केंद्र में बैठे कर्मचारी मोहित दुबे ने बताया कि केंद्र नगर निगम कर्मचारी रोहित दुबे चलवा रहे हैं। नगर निगम के अतिक्रमण प्रभारी महेंद्र शर्मा दीनदयाल रसोई केंद्र के नोडल अधिकारी हैं। बिल की राशि प्राप्त करने के लिए कई बार चक्कर लगाने के बाद भी उनके द्वारा राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा है।

वहीं पूर्व में दीनदयाल रसोई चला रहे विपिन बिलौहा बताते हैं कि उनके समय पर प्रतिदिन दो से तीन सौ लोग भोजन करते थे। निगम ने कर्मचारी को जवाबदारी सौंपी तो यहां भोजन करने वाले जरुरतमंदों की संख्या घटकर प्रतिदिन 30 से 40 तक सीमित हो गया। अनुबंध के अनुसार प्रत्येक थाली के अनुपात में पांच रुपये नगर निगम को देना था, लेकिन निगम ने पैसे नहीं दिए तो केंद्र संचालन से अलग होना पड़ा। चार माह का पैसा भी निगम से नहीं मिला। भुगतान मांगने पर महेंद्र शर्मा ने कहा था काम छोड़ दें।

इधर जरुरतमंद लोगों का कहना है कि उनको बेहतर भोजन उपलब्ध करवाने के लिए चलाई जा रही योजना में नगर निगम अधिकारियों की बेपरवाही के कारण सीधा नुकसान उन लोगों को हो रहा है जो यहां भोजन करने आते हैं। भोजन की गुणवत्ता सही नहीं होने से स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

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