प्रभारी मंत्री के लोकार्पण के पांच दिन में एक भी मरीज को नहीं मिला लाभ, ओटी में लटका ताला

-सिविल सर्जन ने कहा-जीवाणु का पता लगाने भोपाल भेजी गई है रिपोर्ट, आने के बाद ही मरीजों को मिल पाएगी सुविधा

 

कटनी. जिला अस्पताल के ट्रामा सेंटर में बनी इंटरनेशनल मॉड्यूलर ओटी का लोकार्पण प्रभारी मंत्री द्वारा किए जाने के पांच दिन बाद भी इलाज व ऑपरेशन में मरीजों को लाभ नहीं मिल रहा है। प्रभारी मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर के मॉड्यूलर ओटी का लोकार्पण 13 फरवरी को किया था। लोकार्पण के दौरान स्वास्थ्य विभाग ने दावा किया था कि ऑपरेशन थियेटर में जटिल ऑपरेशन होंगे और जरुरतमंद मरीजों को बड़े शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इधर लोकार्पण के पांच दिन बाद भी मरीजों को मॉड्यूलर ओटी में इलाज की सुविधा नहीं मिलने से मायूसी हाथ लगी है। 10 माह में 80 लाख रुपये की लागत से तैयार माड्यूलर ओटी में फिलहाल ताला लटका है।

गलियारे में रखवाई लोकार्पण पट्टिका
अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर का प्रभारी मंत्री से लोकार्पण कराने के लिए जिला प्रशासन द्वारा पत्थर बनवाया गया था। उसमें बकायदा सभी अतिथियों के नाम का उल्लेख किया गया। पत्थर को बाहर रख कर प्रभारी मंत्री से लोकार्पण कराया। इसके बाद लोकार्पण पट्टिका को उठाकर गलियारे में रखवा दिया गया। अफसरों ने उसे व्यवस्थित भी नहीं कराया।

नहीं हो पाएंगे गंभीर ऑपरेशन-
जिले के सरकारी अस्पताल में बने अत्याधुनिक ऑपरेशन थियेटर में किसी भी प्रकार का गंभीर ऑपरेशन सुविधा होने के बाद भी नहीं हो सकेगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि यहां पर विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। इसके अलावा कर्मचारी भी नहीं है। जिसके वजह से सिर्फ छोटे ऑपरेशन ही हो पाएंगे।

स्टॉफ की कमी के लिए नहीं हुआ पत्राचार
जिले के सरकारी अस्पताल में लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टर की कमी बनी हुई है। इसको पूरा करने के लिए न तो जनप्रतिनिधियों द्वारा ध्यान दिया जा रहा है और न ही प्रशासन द्वारा। जिम्मेदारों की उदासीनता के कारण मरीजों को जिला अस्पताल में बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

-कल्चचर रिपोर्ट भोपाल भेजी गई है। जिसमें यह पता लगाया जाएगा कि ओटी में जो पेंट या अन्य उपकरण लगाए गए हैं उसमें कोई जीवाणु तो नहीं है। वहां से जब रिपोर्ट आएगी इसके बाद ही मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। तीन बार जानकारी भेजी जाती है। वहां से आने के बाद ही ऑपरेशन शुरू हो पाएगा। जो ऑपरेशन पहले से हो रहे हैं वहीं हो पाएंगे। विशेषज्ञों की कमीं बनी हुई है। जिस वजह से गंभीर ऑपरेशन नहीं हो पाएंगे।
डॉ. एसके शर्मा, सिविल सर्जन।

dharmendra pandey Reporting
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