जिस पर विरासत के संरक्षण का जिम्मा उसे नहीं दिया एक साल से मेहनताना

ऐसे हो रही हमारी विरासत का संरक्षण, देश का केंद्र बिंदू और सुरक्षा में तैनात चौकीदार को एक साल से नहीं मिला मेहनताना

By: Hitendra Sharma

Published: 10 Oct 2020, 10:13 AM IST

कटनी. विंध्याचल पर्वत की केचुआ पहाडिय़ों की ढलान पर कटनी जिले का करौंदी गांव देश का केंद्र बिंदू (Center point of india) है। 1956 में डॉ. राममनोहर लोहिया ने इस स्थान को आदर्श गांव बनाने का सपना संजोया तो दिसंबर 1987 में तत्कॉलीन प्रधानमंत्री चंद्रशेखर करौंदी पहुंचे और उसी साल से स्मारक निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। पर्यटन के लिहाज से जिस स्थान की ख्याति देशभर में हो सकती है, उसके संरक्षण व सुरक्षा को लेकर होने वाले प्रयास नाकाफी हैं।

देश के केंद्र बिंदू को भूले जिम्मेदार
जगह-जगह से टूटी आकर्षक आकृतियां और मैदान में कचरे के ढेर यहां आने वालों को उदास करती है। एक साल पहले गांव के चंद्रशेखर नाम के युवक चौकीदारी सौंपी गई। उनकी पत्नी कल्ली बाई बताती हैं कि बतौर मेहनताना साढ़े चार हजार रूपये हर महीने देने की बात कही गई। एक साल से मजदूरी नहीं मिली तो 181 सीएम हेल्पलाइन में सीएम तक से गुहार लगाई।

ऐसे हुई थी खोज
इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर के संस्थापक प्राचार्य एसपी चक्रवर्ती की अगुवाई में 1956 में इस स्थान की खोज के बाद भौगोलिक रुप से देश का केंद्र बिंदु माना गया। समुद्र तल से 389.31 मीटर की उंचाई, अक्षांश 23-30-48 व देशांश 80-9-53 है।

विरासत के महत्व की समझ ही दिलाएगी पहचान
कलेक्टर एसबी सिंह बताते हैं कि करौंदी में पुरातत्व विभाग ने काम करवाया है। डीएमएफ फंड से भी काम हुए हैं। इस स्थान को पर्यटन महत्व के रूप में पहचान दिलाने के लिए जरूरी है कि स्थान का महत्व यहां के ग्रामीण भी समझें। इसके लिए जागरूकता प्रयास किए जा रहे हैं। हमने जिला पंचायत के सीइओ को करौंदी गांव भेजा था। इस स्थान को और बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

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