इस छोटी सी गलती के चलते सैकड़ों हो गए जानलेवा बीमारी के शिकार, स्वास्थ्य विभाग की भी खुली पोल

जागरुकता अभियान हो रहा फेल, असुरक्षित यौन संबंध के चलते हर साल बढ़ रहे एड्स के मरीज

By: balmeek pandey

Updated: 02 Dec 2018, 04:54 PM IST

कटनी. एक दिसंबर को विश्वभर में एड्स दिवस के रूप में मनाया गया। इस विश्व एड्स दिवस पर दुनियाभर का नारा 'बचाव ही इलाजÓ है। लोग इस बीमारी के इलाज के अभाव व कम जानकारी की वजह से लोग इसे श्राप मानते हैं। एड्स पीडित मरीजों को अछूत माना जाता है। कई लोगों में ये गलतफहमी है कि एड्स छूआछूत से फैलता है। जिले में एड्स का संक्रमण पैर पसारे हुए है। प्रतिवर्ष पॉजिटिव रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। हर माह दो एक से दो लोग एड्स के शिकार हो रहे हैं। बीते ग्यारह महीने में 19 एड्स के नए पीडि़त सामने आए हैं। इनमें 7 महिलाएं हैं तो वहीं पुरुषों की संख्या 12 है। संक्रमण के शिकार में वे लोग शामिल हैं जो कि रोजगार की तलाश में दूसरे शहर गए और वहां से संक्रमित होकर लौट आए। कटनी जिले में एड्स का संक्रमण कम होने का नाम नहीं ले रहा। जिले में 2005 से लेकर नंवबर 2018 तक 241 एड्स के मरीज सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अबतक एक लाख 78 हजार 486 लोगों की जांच की गई। जिसमें 241 एचआइवी के पॉजिटिव मरीज निकले। जबकि मरने वालों की भी संख्या एक दर्जन के ऊपर पहुंच गई है। जांच के दौरान की गई काउंसलिंग में यही तथ्य सामने आए हैं कि एचआइवी संक्रमण असुरक्षित यौन संबंध कारण हुआ है। इस जानलेवा बीमारी से लोग अब भी अनजान बने हुए हैं।

यह हो रही खास पहल
विश्व एड्स दिवस पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा खास पहल की जा रही है। राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि इ-रिक्शा में प्रचार-प्रसार के माध्यम से शहर में 12 हजार कंडोमों का वितरण किया जाएगा। इसमें लगे कर्मचारी लोगों को बताएंगे कि यौन संबंध बनाने से पहले इसका उपयोग क्यों जरुरी है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन में आइसी वितरण का कार्यक्रम होगा। इसके अलावा शहर व जिलेभर के कॉलेजों में एड्स पर वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिता का आयोजन होगा। एड्स से बचाव के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुरस्कृत किया जाएगा।

सजगत ही बचाव
एड्स पीडि़त मरीजों को अछूत माना जाता है। कई लोगों में ये गलतफहमी है कि एड्स छूआछूत से फैलता है। एड्स का इलाज दवाओं से ज्यादा जागरूकता और सजगता से संभव है। और एड्स से बचाव के लिए सावधानी का बरता जाना। पीडि़तों की बढ़ती संख्या ने महकमे के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। अब लोगों को जागरूक करने नए सिरे से अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। एड्स को नियंत्रित करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। राघवेंद्र शर्मा ने बताया कि पीडि़त व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध स्थापित करने, दूषित रक्त, संक्रमित सुई के उपयोग, एड्स संक्रमिता मां से उसके होने वाली संतान के कारण एड्स फैल रहा है। वजन का काफी हद तक कम हो जाना, लगातार खांसी बनी रहना, बार-बार जुकाम का होना, बुखार, सिरदर्द, थकान, शरीर पर निशान बनना, (फंगल इंफेक्शन के कारण) हैजा, भोजन से अरुचि, नसिकाओं में सूजन इसके लक्षण हैं। सजगत के चलते इससे बचा जा सकता है।

balmeek pandey Reporting
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