यहां अनाथों के नाथ बन रहे परिवार... पढि़ए खबर

फास्टर केयर में अनाथ बच्चों की परवरिश करने वालों की संख्या में इजाफा, एक साल में १३ बच्चों को लोगों ने अपनाया

By: mukesh tiwari

Published: 08 Apr 2018, 12:18 PM IST

कटनी. कहते हैं जिनका कोई नहीं उनका खुदा होता है, यह कहावत जिले में इन दिनों चरितार्थ हो रही है। महिला सशक्तिकरण विभाग की फास्टर केयर योजना(पालन पोषण व देखरेख) में लोग ऐसे बच्चों को अपने परिवार के साथ रखने के लिए आगे आ रहे हैं, जिनका संसार में कोई सहारा नहीं है। एक साल पूर्व नियम में बदलाव के बाद शुरुआत में मात्र छह लोग ही ऐसे पालक परिवार बनकर सामने आए थे, जो अनाथ बच्चों को अपने साथ रखकर उनका भरण पोषण करने के साथ शिक्षा दे रहे थे लेकिन अब उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है। अभी तक १३ पालक परिवार अनाथ बच्चों का सहारा जिले भर में बने हुए हैं। जिनकी हर माह विभाग मॉनिटरिंग भी कर रहा है।
परिवार की मानी जा रही नैतिक जिम्मेदारी
इससे पहले ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता नहीं हैं, उनको परिवार के ही सदस्यों को सौंपा जाता था और उसके लिए विभाग की ओर से हर माह अनाथ बच्चों की शिक्षा दीक्षा के लिए दो हजार रुपये की राशि भी मिलती थी। अब नए नियम में विभाग ने ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता नहीं हैं और परिवार के दूसरे सदस्य उनकी देखरेख कर रहे हैं तो यह उनकी नैतिक जिम्मेदारी मानी जा रही है। ऐसे परिवारों को कोई भी भरण पोषण राशि विभाग नहीं दे रहा है लेकिन दूसरे परिवार उनको अपनाते हैं प्रोत्साहन राशि दी जा रही है।
पांच साल बाद मिलेगी प्राथमिकता
ऐसे परिवार जो अनाथ बच्चों को फास्टर केयर योजना में अपनाते हैं, यदि वे उन्हें गोद लेना चाहते हैं तो पांच साल बाद उन्हें लंबी प्रक्रिया से भी गुजरना नहीं होगा। वे सीधे आवेदन देकर न्यायालय से बच्चे को गोद ले सकेंगे। फास्टर केयर के लिए बाल कल्याण समिति या महिला सशक्तिकरण विभाग में सीधे आवेदन देकर भी बच्चों का पालक परिवार बन सकता है।
इनका कहना है...
पालन पोषण व देखरेख योजना में अनाथ बच्चों को अपनाने वाले पालक परिवारों की संख्या बढ़ रही है। समाज में जागरुकता आ रही है और ऐसे परिवार सीधे विभाग से संपर्क कर बच्चों को समाज की मुख्यधारा जोडऩे आगे आ सकते हैं।
वनश्री कुर्वेती, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी

mukesh tiwari
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