लोग बोले बिल्डरों के हाथ की कठपुतली बना 'केडीए', दस साल चली प्रक्रिया और झिंझरी आवासीय योजना बंद

कम कीमत में प्लॉट दिलाने की थी योजना, अधिकारियों की बेपरवाही का बड़ा उदाहरण बना झिंझरी आवासीय प्रोजेक्ट, बिल्डर के इशारे पर लेटलतीफी और प्रक्रिया में काम अटकाने से लेकर विलंब के लगते रहे हैं आरोप.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 28 Feb 2021, 02:07 PM IST

कटनी. न्यायालय के समीप झिंझरी में कटनी विकास प्राधिकरण (केडीए) द्वारा 35 सौ से ज्यादा व्यावयासिक व आवासीय कॉम्प्लेक्स निर्माण की योजना दस तक चली कवायद के बाद आखिरकार बंद कर दी गई। अधिकारी इसके पीछे तर्क दे रहे हैं कि 85.6 हेक्टेयर क्षेत्रफल में योजना विकसित करने के लिए नगर निगम को जमा करने के लिए विकास शुल्क उपलब्ध नहीं होने के कारण विलंब हुआ।

बीते वर्ष राज्य सरकार द्वारा दस प्रतिशत से ज्यादा काम नहीं होने वाली योजनाओं को बंद करने संबंधी आदेश जारी करने के बाद झिंझरी आवासीय योजना की फाइल बंद कर दी गई है। इधर, झिंझरी आवासीय योजना में लेटलतीफी शहर के नागरिकों ने कहा कि अधिकारियों की बेपरवाही के कारण लोगों को आवास के लिए कम कीमत में प्लॉट उपलब्ध नहीं हो सका। अधिकारियों पर बिल्डर के इशारे पर योजना में लेटलतीफी करने के आरोप भी लगते रहे हैं।

केडीए की झिंझरी आवासीय और व्यावसायिक योजना की लेटलतीफी पर 2016 में हाइकोर्ट में जनहित याचिका लगाने वाले राजेश नायक सौरभ बताते हैं कि कटनी विकास प्राधिकरण (केडीए) की स्थापना 2009-10 में हुई, लेकिन अभी तक प्राधिकरण जनहित की एक भी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं कर सका है। यह बिल्डरों के हाथ की कठपुतली बनकर रह गया है।

कटनी के समीप झिंझरी में 2011 में प्राधिकरण ने व्यावयासिक व आवासीय कॉम्प्लेक्स निर्माण के लिए 85.6 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहीत की। इसमें 35 सौ से ज्यादा आवासीय व व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स निर्माण किया जाना है। इसके अलावा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए भी कम दरों पर 500 आवास बनाए जाने की प्रक्रिया थी। अब योजना बंद कर दिए जाने से सरकारी व्यवस्था की खामियां खुलकर सबके सामने आ गई है।

केडीए के सीइओ व एसडीएम बलबीर रमण बताते हैं कि राज्य शासन का नियम बीते वर्ष आया था कि जिन योजनाओं में दस प्रतिशत से ज्यादा काम नहीं हुआ उसे बंद कर दिया जाए। झिंझरी आवासीय योजना में पूरे क्षेत्रफल के लिए नगर निगम में 9 करोड़ रूपये विकास शुल्क जमा करने का बजट नहीं था। इसलिए योजना बंद कर अब छोटे-छोटे टुकड़ों में बनाकर चालू की जाएगी।

दस साल ऐसे हुई बेपरवाही, अब योजना ही बंद
केडीए द्वारा झिंझरी में आवासीय योजना 2011 में प्रारंभ की गई। इसके बाद 2013 से 2015 तक जमीन के भूमि अधिग्रहण का प्रकाशन हुआ। 2015 से 2018 तक पर्यावरण की एनओसी लेने की प्रक्रिया चली और 2018 से जनवरी 2021 तक नगर निगम से एनओसी लेने के लिए प्रक्रिया चली। अंतत: 24 फरवरी की बैठक में योजना को बंद करने का निर्णय ले लिया गया।

raghavendra chaturvedi Bureau Incharge
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