सपना ही रह गई धुआं मुक्त रसोई, उज्जवला योजना का सिलेंडर बुझा तो फिर नहीं जला

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना की एक हकीकत...तीन साल पहले मिले उज्जवला योजना के सिलेंडर को ग्रामीणों ने दोबारा नहीं भराया...

By: Shailendra Sharma

Published: 15 Sep 2021, 04:10 PM IST

कटनी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत पूरे देश में परिवारों को घरेलू गैस सिलेंडर का लाभ दिया गया। जोर-शोर से योजना का प्रचार प्रसार किया गया और ये सपना संजोया गया कि उज्जवला योजना से धुआं मुक्त रसोई का सपना साकार होगा। लेकिन एक हकीकत ये है कि कई जगहों पर उज्जवला योजना का सिलेंडर जो एक बार बुझा तो फिर दोबारा नहीं जल पाया और धुआं मुक्त रसोई का सपना अधूरा ही रह गया। बात कटनी जिले की करते हैं जहां भी ज्यादातर परिवारों ने उज्जवला योजना के तहत मिले रसोई सिलेंडर को दोबारा नहीं भरवाया।

 

सपना ही रह गई धुआं मुक्त रसोई
कटनी जिले के बहोरीबंद विकासखंड के नेगवां गांव में भी आदिवासी परिवारों को प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत गैस सिलेंडर का वितरण किया गया था। लेकिन गांव में उज्जवला योजना के तहत लाभांवित होने वाली आदिवासी महिलाओं की लगभग एक जैसी ही कहानी है। फिर चाहे श्यामबाई आदिवासी हों या फिर समझरानी या फिर आजादरानी या सुमन। सबका कहना है कि प्रधानमंत्री उज्जवला योजना में उन्हें गैस का सिलेंडर तो मिला, लेकिन मिलने के तीन साल बाद भी उसकी एक बार भी रिफलिंग नहीं हुई। जिससे इन परिवारों के लिए धुआं मुक्त रसोई आज भी सपना है। रसोई गैस की रिफलिंग में कई परिवारों को महंगाई के कारण परेशानी हो रही है तो वहीं ज्यादातर परिवार ऐसे भी हैं जिनके लिए लकड़ी ही भोजन पकाने में ईंधन का प्रमुख साधन है।

 

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क्या कहते हैं अधिकारी ?
खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जिन परिवारों को पूर्व में कनेक्शन मिला है, वे घर से ही रिफलिंग करवा सकते हैं। इसके लिए गांव-गांव 23 एजेंसियों के माध्यम से गैस सिलेंडर की आपूर्ति करवाई जा रही है। वहीं बता दें कि इन दिनों एक बार फिर जिले में उज्जवला योजना 2.0 आ रही है जिसके तहत 21 हजार परिवारों को नए गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। खाद्य आपूर्ति विभाग द्वारा इसके लिए जिलेभर में शिविर आयोजित कर महिलाओं के आवेदन भरवाए जा रहे हैं।

 

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फैक्ट फाइल
- 23 एजेंसियों के माध्यम से घरेलू गैस का वितरण ।
- 140 कैंप आयोजित कर लोगों को दी गई जानकारी ।
- 6 हजार 794 आवेदन पहले से एजेंसियों के पास थी जमा ।
- 11 हजार 682 महिला आवेदकों ने कुछ दिनों में पूरी प्रक्रिया ।
- 18 हजार 476 लोगों ने पीएम उज्जवला योजना में दिखाई दिलचस्पी ।
- 16 हजार 444 लोगों के आवेदन की प्रक्रिया।

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