लॉकडाउन में घरवापसी को बेताब लोगों की पीड़ाः अब किससे कहें, दो बार गए कलेक्ट्रेट, नहीं हो रही सुनवाई

पत्रिका की पड़ताल में हुआ खुलासा
-यूपी बाराबंकी जिले के हैं मूल निवासी
-उम्र से लाचार, नहीं चल सकते पैदल

By: Ajay Chaturvedi

Published: 16 May 2020, 04:24 PM IST

कटनी. कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन में सारा काम-काज ठप है। ऐसे में काम की तलाश में घर बार छोड़ कर परदेश आए लोग किसी कीमत पर घर लौटने को बेताब हैं। हजारों, लाखों लोग पैदल ही लौट रहे हैं। कोई ट्रकों में सवार हो कर वतन लौट रहा है। कोई जान की बाजी लगा दे रहा है। ऐसे में कुछ ऐसे लोग भी हैं जो शासन- प्रशासन के भरोसे ही हैं। लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही। इसका खुलासा किया है टीम पत्रिका ने।

पत्रिका की टीम कोरोना लॉकडाउन में फंसे लोगों का हाल जानने निकली तो एक ऐसा परिवार मिला जो शिद्दत से घरवापसी करना चाहता है। लेकिन उनके लिए कोई इंतजाम तक नहीं हो पा रहा है। ऐसा ही एक परिवार है जो उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का रहने वाला है। कटनी में ढोलक बेचने आई एक 62 साल की वृद्ध अपने बच्चों संग लॉकडाउन में फंस गई है।

वृद्धा बताती हैं कि वह दो बार कलेक्ट्रेट गईं। वहां जो अधिकारी मिला उससे फरियाद लगाई। लेकिन उनसे सिर्फ आश्वासन ही मिला कि जल्द ही कोई व्यवस्था करते हैं। अब उस व्यवस्था के ही इंतजार में हैं। फिलहाल ये परिवार बरगवां के खाली मैदान में टेंट के नीचे तिरपाल तान कर रहने वाले मजदूरों के साथ शेयर कर जीवन बसर कर रहे हैं। पत्रिका टीम से बातचीत में बुजुर्ग वसीमुन ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया। वहीं मजदूरों ने कहा कि प्रशासन तो दूर अब तो स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी भोजन पहुंचाना बंद कर दिया है।

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