जीआइएस आधारित होगा प्रॉपटी टैक्स, नगर निगम में बढ़ेगा करोड़ों रुपये राजस्व

दिल्ली की कंसलटेंसी कंपनी रुद्राभिषेक एंटरप्राइजेज लिमिटेड को किया गया सर्वे के लिए नियुक्ति, अब नहीं हो पाएगी टैक्स चोरी

 

By: balmeek pandey

Updated: 24 Jul 2021, 09:01 PM IST

कटनी. शहर में हजारों लोग अभी भी ऐसे हैं जो टैक्स जमा नहीं कर रहे या चोरी कर रहे हैं। इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि नगर निगम में या तो दर्ज नहीं हैं या फिर आवासीय में व्यवसायिक उपयोग हो रहा है। अब कुछ दिनों बाद नगर निगम के खजाने में करोड़ों रुपये के राजस्व की बढ़ोत्तरी हो जाएगी। कटनी नगर निगम ने जीआइएस बेस्ड प्रॉपर्टी टैक्स रजिस्टर तैयार करने के लिए आरईपीएल की नियुक्ति की है। जीआइएस बेस्ड प्रॉपर्टी टैक्स का रजिस्टर तैयार करने और तकनीकी मदद के साथ बहुउद्देश्यीय घरेलू सर्वे करने के लिए दिल्ली की कंसलटेंसी कंपनी रुद्राभिषेक एंटरप्राइजेज लिमिटेड (आरइपीएल) को नियुक्त किया है। बता दे कि जीआइएस सर्वे में बरती जा रही लापरवाही को पत्रिका ने उजागर किया, जिसके बाद अफसर हरकत में आए और अब सिस्टम को एक्टिव किया जा रहा है।
नगर निगम की योजना और प्रबंधन क्षमता और अधिक प्रभावशाली बनेगी, यह वैध, विश्वसनीय और प्रामाणिक स्थानिक और गैरस्थानिक जानकारी से संभव होगा। आरपीईएल बड़े पैमाने पर जीआइएस बेस्ड बेस मैप बनाएगा, इसमें हाइ रेजोल्यूशन के सैटेलाइट डेटा और संबंधित क्षेत्र के ग्राउंड सर्वे का इस्तेमाल किया जाएगा। इस बेस मैप में सभी प्रमुख फिजिकल फीचर्स मौजूद होंगे। जैसे हर प्लॉट की बाउंड्री और निर्माण (ढांचा), यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (प्रॉपर्टी) की पहचान संख्या, ई नगर पालिका प्रॉपर्टी आईडी) आदि शामिल रहेगा।

डिमांक को करेगा अपग्रेड
बहुउद्देशीय घरेलू सर्वे में शहर की सभी कॉलोनियों के साथ झुग्गी बस्तियों में भी सर्वे किया जाएगा। यह जीआईए डेटाबेस के एकीकरण के साथ प्रॉपर्टी टैक्स की डिमांड को अपग्रेड करेगा। गैरस्थानिक डेटा बहुउद्देशीय होगा जिसका उपयोग इंजीनियरिंग, रेवेन्यू टैक्सेशन और टाउन प्लानिंग, जैसे नगर निगम के विभिन्न विभागों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। पारदर्शी तरीके से टैक्स का भुगतान होगा। टैक्स संग्रह का अतिरिक्त लाभ भी हासिल होगा। आरईपीएल के सीएमडी प्रदीप मिश्रा बताया कि टेक्नोलॉजी में इससे टैक्स कलेक्शन में बड़ा सुधार होगा।

इन टैक्सों में मिलेगा लाभ
आरईपीएल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर डॉ. हरीश शर्मा ने बताया कि किसी जगह का एक परफेक्ट डेटा बेस होने से नगर निगम की योजना, प्रशासन और प्रबंधन में कई तरीकों से सुधार करके उसको और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाया जा सकेगा। यूनिक आइडेंटिफिकेशन से सर्वे को ज्यादा से ज्यादा व्यवस्थित ढंग से करने में मदद मिलेगी। प्रॉपर्टी टैक्स, वॉटर एंड सैनिटेशन टैक्स और चार्जेस को सुधारने में मदद मिलेगी।

अभी यह है स्थिति
-47 हजार 974 अभी हैं शहर में प्रॉपर्टियां।
-7 करोड़ 13 लाख रखा गया था राजस्व का लक्ष्य।
-9 करोड़ 12 लाख रुपये हुई है राजस्व की वसूली।

इनका कहना है
जीआइएस बेस्ड बेस मैप बनेगा, इसमें हाइ रेजोल्यूशन के सैटेलाइट डेटा और संबंधित क्षेत्र के ग्राउंड सर्वे का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे टैक्सेशन के लिए संपत्तियों की संख्या बढेंगी और करोड़ों का राजस्व भी।
जागेश्वर पाठक, नोडल अधिकारी राजस्व।

balmeek pandey
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned