रेमडेसिविर इंजेक्शन का स्टॉक निल, डीआइ ने कहा- दो सौ की डिमांड में 60 इंजेक्शन की आपूर्ति

जरूरतमंदों ने कहा रसूखदारों को नहीं हो रही कमीं, अधिकारी बोले-जबलपुर कलेक्टर को फोन लगाने के बाद हुई बिलिंग.

- सीएस और डॉक्टरों की कमेटी के अप्रुवल के बाद मरीज को दवा.

- इंदौर से पहुंचेगी रेमडेसिविर इंजेक्शन की सरकारी सप्लाई, कब आएगी तय नहीं.

- रेमडेसिविर के लिए गिड़गिड़ा रहे लोग, निजी अस्पतालों में नहीं मिल रहे 6 डोज.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 13 Apr 2021, 11:53 AM IST

कटनी. शहर में सोमवार शाम रेमडेसिविर इंजेक्शन का स्टॉक निल हो गया। इस बीच स्थिति यह रही कि सरकारी अस्पताल में भर्ती मरीजों को तो इस इजेंक्शन की जरूरत नहीं रही, लेकिन निजी अस्पताल में भर्ती कई मरीज इंजेक्शन के लिए परेशान रहे। इन मरीजों के परिजनों ने बताया कि अस्पताल में भर्ती रसूखदारों को इंजेक्शन की कमीं नहीं हो रही है। वहीं आमजनों को पैसे देने के बाद भी इंजेक्शन नहीं मिल रहा है। रेमडेसिविर उपलब्ध कराने के लिए दलाल भी सक्रिय हैं, जो ज्यादा कीमत पर उपलब्ध करवाने की बात कहते हैं।

इंजेक्शन उपलब्धता को लेकर ड्रग इंस्पेक्टर स्वप्निल सिंह ने बताया कि दो सौ इंजेक्शन की डिमांड के बाद 40 से 60 इंजेक्शन की बिलिंग हो पाती है। रविवार को स्थिति यह रही कि शहर के जनप्रतिनिधि व आला अधिकारियों ने जबलपुर कलेक्टर को फोन लगाया, तब जाकर दवा उपलब्धता के लिए बिलिंग हो सकी। सोमवार शाम स्टॉक निल होने के बाद उम्मींद है कि देररात तक कटनी दवा पहुंच जाए।

शहर के अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन का डोज देने के लिए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के निर्देश पर अप्रुवल कमेटी बनी है। सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा व अन्य डॉक्टरों की टीम की अप्रुवल के बाद ही सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को इंजेक्शन दिया जा रहा है।

सोमवार शाम तक शहर के तीन निजी अस्पतालों में चांडक अस्पताल में 30 इंजेक्शन, धर्मलोक में 15 और एमजीएम में 10 इंजेक्शन उपलब्ध रहा। शहर में दो स्टाकिस्ट रामा फार्मा और गुरूनानक फार्मा के माध्यम से दवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

कटनी शहर में कोरोना पॉजिटिव मरीजो के लिए सरकारी सप्लाई में रेमडेसिविर इंजेक्शन इंदौर से आनी है। इंदौर के एमजीएम अस्पताल में उपलब्ध स्टॉक में दस प्रतिशत जिला अस्पताल को भेजा जाना है। खासबात यह है कि दवा की यह डोज कटनी कब पहुंचेगी, इस बारे में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी कुछ भी नहीं बता पा रहे हैं। ड्रग इंस्पेक्टर एक दो दिन में दवा के पहुंचने की संभावना जता रहे हैं।

शहर में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट, डॉक्टर का पर्चा होने के बाद भी इंजेक्शन मुहैया नहीं कराए जा रहे। परिजनों का आरोप है कि शहर के निजी अस्पताल पूरा पैकेज लेने के बाद भी पूरा उपचार नहीं दे पा रहे। इस बीच जिले को मिलने वाले रेमडीशिविर इंजेक्शन के आवंटन की पूरी जिम्मेदार ड्रग इंस्पेक्टर स्वप्निल सिंह की बताई जा रही है। दवा कारोबारियों की मानें तो ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा ध्यान न दिए जाने से इसमें एकाधिकार चल रहा है। रविवार को एक व्यक्ति अपने पिता को बचाने के लिए पूरा दिन दवा कारोबारियों से गिड़गिड़ाता रहा। किसी भी हाल में इंजेक्शन का इंतजाम करने के लिए परेशान होता रहा, लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला।

इन लोगों को नहीं मिल पाया इंजेक्शन
- आदर्श कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में खटवानी मरीज को नहीं मिला इंजेक्शन।
- कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल में संगतानी मरीज को नहीं मिला इंजेक्शन।
- कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित एक अन्य निजी अस्पताल में आहूजा मरीज को नहीं मिला इंजेक्शन।
- आदर्श कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में तिवारी मरीजा को नहीं मिला इंजेक्शन।

ड्रग इंस्पेक्टर स्वप्निल सिंह बताते हैं कि रेमडेसिविर इंजेक्शन कमेटी के अप्रुवल के बाद लग रही है। इसके अलावा इंजेक्शन की कीमत अलग-अलग कंपनियों की अलग-अलग है। इसमें नौ सौ रूपये से 54 सौ रूपये तक की रेमडेसिविर इंजेक्शन है। निर्भर करता है कि स्टॉकिस्ट के पास कौन की कंपनी की दवा है, उसी आधार पर बिक्री के निर्देश दिए गए हैं।

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raghavendra chaturvedi Bureau Incharge
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