राजस्थान में प्रति घनमीटर रायल्टी 640 रुपये, कटनी में ले रहे एक हजार

मार्बल उद्योग के दम तोडऩे की इस प्रमुख वजह पर ध्यान नहीं दे रहे अधिकारी और जनप्रतिनिधि.

कारोबारियों को मिल रहा सिर्फ आश्वासन, अब व्यापार बढ़ाने के लिए कंपनी बनाने की तैयारी.

कटनी. राजस्थान की तुलना में ज्यादा रायल्टी ने कटनी के मार्बल उद्योग की कमर तोड़ दी है। यहां मार्बल की रॉयल्टी राजस्थान की तुलना में कई गुना अधिक है। इतना ही नहीं ओवरबर्डन की रायल्टी भी अधिक होने के कारण कटनी का मार्बल व्यवसाय बाजार की प्रतिस्पर्धा में नहीं टिक पा रहा है। कटनी में मार्बल का व्यवसाय करने वाले उद्योगपतियों की मांग है कि मार्बल पर रॉयल्टी कम करने के साथ ही ओवरबर्डन पर विसंगति दूर की जाए।
कारोबारियों का कहना है कि उनकी इस मांग पर बीते कई वर्षों से ध्यान नहीं दिया गया। अब उम्मीद है कि अब सरकार उनके हित में सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ेगी, इधर बीते कई वर्षों की उपेक्षा बाद इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई है।
समस्या पर प्रभारी खनिज अधिकारी संतोष सिंह बताते हैं कि कटनी में मार्बल उद्योग को लेकर अब सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। खनिज विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी इस सिलसिले में मार्बल खदान संचालकों की बैठक ली है। ओवरबर्डन पर सरकार ने रॉयल्टी कम कर दी है, आदेश का इंतजार है। मार्बल पर भी रॉयल्टी कम करने की संभावना है। मार्बल व्यवसायियों की परेशानी को देखते हुए एक कंपनी भी बनाई जा रही है, जो यहां से निकलने वाले मार्बल के लिए बाजार तैयार करेगी। ताकि व्यवसायियों को उनके उत्पाद का बेहतर लाभ मिल सके।

ऐसे समझें मार्बल पर रॉयल्टी का गणित
प्रदेश में मार्बल पर प्रतिघनमीटर एक हजार रुपये की रायल्टी है। राजस्थान में प्रतिटन रायल्टी 240 रुपये। एक घनमीटर मार्बल बराबर 2.67 टन। इस मानक पर राजस्थान में प्रतिघनमीटर रायल्टी 640 रुपये है। यानी मध्यप्रदेश से प्रतिघमीटर 360 रुपये कम। यह स्थिति तब है जब राजस्थान में मार्बल की क्वालिटी कटनी में मिलने वाले मार्बल से कहीं बेहतर है।

ओवर बर्डन ऐसे पहुंचा रहा नुकसान
कटनी में मार्बल इकाइयों के बंद होने के पीछे दूसरा बड़ा कारण है, ओवर बर्डन, जिसे खंडा भी कहते हैं। मार्बल खदान में पूरे उत्पादन का लगभग 60 प्रतिशत मटेरियल बेकार चला जाता है। पत्थर में जरा भी क्रेक या फैक्चर आ जाए तो उसका उपयोग नहीं हो पाता। इस अनुपयोगी खनिज को खंडा माना जाता है। इस पर रायल्टी 5 सौ रुपये प्रतिघन मीटर है। इस पर रायल्टी कम हो तो क्रेक पत्थर को छोटी साइज में काटकर बेचने की इकाइयां स्थापित हो जाएगी। रोजगार के अवसर बढ़ेगे और शेष बचे मटेरियल का उपयोग होने से मार्बल खदान संचालकों को नुकसान की भरपाई होगी।

खास-खास
- मार्बल खदान के बंद होने से सरकार को मिलने वाली रायल्टी में तो नुकसान हुआ ही, आसपास गांव में बसे लगभग ढाई हजार से ज्यादा युवाओं का रोजगार भी छिन गया।
- ओवर बर्डन का उचित प्रबंधन नहीं होने से नुकसान हो रहा। यह एक तरह से गिट्टी की तरह पत्थर का टुकड़ा है। गिट्टी में पचास रुपये और ओवर बर्डन में दस गुना ज्यादा यानी पांच सौ रुपये की रायल्टी लगने से खदान संचालक इसे सड़क व दूसरे कार्यों के लिए भी नहीं बेच पा रहे हैं।
- कई खदान में 2 से 3 एकड़ क्षेत्र में ओवर बर्डन का पहाड़ बन गया। इस स्थान पर मार्बल खनन नहीं होने से भी नुकसान हुआ।

raghavendra chaturvedi
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