scriptSarpanchi preparation for 2 years and old delimitation spoiled mathema | दो साल से सरपंची की तैयारी और पुराने परिसीमन ने बिगाड़ दिया गणित | Patrika News

दो साल से सरपंची की तैयारी और पुराने परिसीमन ने बिगाड़ दिया गणित

- 2019 में लागू परिसीमन की तैयारी में जुटे उम्मीदवार गुस्से में.

- 2014 में चुनकर आए कई जनप्रतिनिधियों ने आरक्षण में सीट बदलने के बाद चुनाव लडऩे का बदल दिया था इरादा, जनता से बना ली थी दूरी.

-अचानक 2014 का परिसीमन लागू होने के बाद बिगड़ गया चुनावी गणित.

कटनी

Updated: December 25, 2021 11:09:21 pm

कटनी. परिसीमन, आरक्षण और असमंजस की स्थिति ने पंचायत चुनाव का समीकरण बिगाड़ दिया है। सबसे ज्यादा परेशान वे सम्भावित उम्मीदवार हैं, जिनकी सीट अचानक बदल गई। 2019 में कांग्रेस सरकार के समय लागू परिसीमन के बाद ग्राम पंचायत में पंच, सरपंच से लेकर जनपद सदस्य और जिला पंचायत की दावेदारी करने वालों ने चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी थी।

Sarpanchi preparation for 2 years and old delimitation spoiled mathematics
बहोरीबंद में चुनाव चिन्ह लेने के लिए पहुंचे अभ्यर्थी.

इन दो वर्षों के दौरान उन्होंने मेल-जोल बढ़ाने, अपनी छवि अच्छी बनाने के लिए दिल खोलकर खर्च किया। समय और पैसा खर्च हो जाने के बाद अचानक पता चला कि चुनाव-2014 के परिसीमन के आधार पर होगा। इस फैसले से कई जगह चुनाव लडऩे की तैयारी करने वालों की दावेदारी ही समाप्त हो गई। कुछ जगह आरक्षित सीट बदलकर अनारक्षित हुई, तो वहां दावेदारों की ज्यादा संख्या अब खेल बिगाड़ रही है। ऐसे में चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे तमाम 'नेताजीÓ गुस्से में हैं। वे प्रक्रिया को गलत ठहरा रहे हैं। पैसे खर्च करने के अपने फैसले को खुद ही कोस भी रहे हैं।

पंचायत चुनाव, परिसीमन और असमंजस
- बहोरीबंद के बचैया ग्राम पंचायत में 2014 की ओबीसी 2019 में बदलकर आदिवासी हुई तो गणेश आदिवासी ने सरपंची की पूरी तैयारी की। सभी को साधने में दो साल कड़ी मेहनत भी की। अब फिर से पुराना परिसीमन लागू हुआ तो गणेश दो टूक कहते हैं कि ऐसे निर्णय से दुख तो होता है। इतना ही नहीं यहां सरपंच रहीं तुलसा बाई दो साल सक्रिय नहीं रहीं और अचानक अब सक्रियता भी लोगों को नागवार गुजर रही।
- मछली को दाना खिलाने में पुण्य मिलता है, तो मान लिया कि लोगों को खिलाने में भी वही पुण्य तो मिलेगा ही। अब चुनाव नहीं लड़ पा रहे हैं तो तकलीफ तो होती है। सरकार को परिसीमन लागू ही नहीं करनी थी, कम से कम अनावश्यक खर्च से बच जाते। यह कहना है विलायतकला मेंं सरपंची की तैयारी में जुटे श्यामलाल कुशवाहा का। 2019 में सीट सामान्य होने पर उनके सहित सुखीलाल व अन्य लोग भी तैयारी में जुटे थे। अब फिर से सीट हरिजन होने के बाद सरपंच रहे बाबूलाल फिर मैदान में हैं।
- सुपेली ग्राम पंचायत में 2014 में सरंपच सीट ओबीसी थी और 2019 में हरिजन हुई तो सरपंच रहे जवाहर पटेल दो साल ज्यादा सक्रिय नहीं रहे। उन्हें भी लग रहा था कि चुनाव तो लड़ नहीं पाएंगे तो ज्यादा सक्रियता किस काम की। इस बीच सरपंच बनने के लिए संतू चौधरी ने पूरी मेहनत की। कोरोना संकट काल में मदद से लेकर लोगों को साधने में खर्च भी किए। अब 2014 की परिसीमन लागू होने के बाद दोनों ही दुखी हैं।
- ढीमरखेड़ा ग्राम पंचायत में 2014 की सामान्य सीट 2019 में हरिजन हुई तो सरंपच रहे विजय मांझी भी निष्क्रिय हो गए। इस बीच रुकमणि झारिया, बंटी दाहिया सहित अन्य लोग सरपंची की तैयारी में जुटे रहे। अब अचानक पुराना परिसीमन लागू होने के बाद ओंकार शर्मा, श्रीकांत पटेल व वर्तमान सरपंच के भतीजे प्रदीप बर्मन सहित अन्य लोग समीकरण बनाने में जुटे हैं, लेकिन ये सब मानते हैं कि अचानक पुराने परिसीमन में चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।
- कटनी जिले में ओबीसी आरक्षण के कारण जिला पंचायत सदस्य के 4, जनपद सदस्य के 31, सरपंच के 103 और पंच के 1011 सीट पर चुनाव को लेकर असमंजस की स्थिती बनी हुई है।
- 23 दिसंबर को नामांकन की जांच के बाद जिला पंचायत के एक और जनपद के पांच सदस्य क्षेत्र निर्विरोध निर्वाचित हो गए। जनपद सदस्यों में कटनी से एक और बड़वारा व बहोरीबंद से दो-दो सदस्य शामिल हैं।

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