माने या न माने लेकिन यहां छुपा है शिव का कोई अनोखा रहस्य...देखें आखिर क्या है ये राज

माने या न माने लेकिन यहां छुपा है शिव का कोई अनोखा रहस्य...देखें आखिर क्या है ये राज

By: Ashtha Awasthi

Published: 25 Apr 2018, 02:00 PM IST

जबलपुर/कटनी। हिन्दू धर्म मान्यताओं में देवों के देव महादेव पुकारे जाने वाले शिव मूर्त या सगुण और अमूर्त या निर्गुण रूप में पूजे जाते हैं यानी शिव ऐसे देवता है कि जिनकी भक्ति और पूजा साकार और निराकार दोनों रूप में होती है। शिव को अनादि, अनंत, अजन्मा माना गया है यानी उनका कोई आरंभ है न अंत है। न उनका जन्म हुआ है, न वह मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इस तरह भगवान शिव कोई अवतार न होकर साक्षात ईश्वर माने जाते हैं।

वैसे तो भगवान शिव हर जगह मौजूद हैं लेकिन मध्य प्रदेश भी भगवान शंकर की ऐतिहासिक धरोहरों की खान हैं। कई स्थान तो ऐसे हैं जो पर्यटन के लिए विशेष महत्व रखते हैं। उन्हीं में से एक है कटनी जिले की बहोरीबंद तहसील में स्थिति रूपनाथ धाम..। यह स्थान भगवान भोलेनाथ का प्रमुख स्थान माना जाता है। स्थानीय निवासियों की मानें तो इस स्थल पर भगवान भोलेनाथ की बारात ठहरी हुई थी। बरातियों की प्यास बुझाने के लिए ही यहां तीन कुंड बनाए गए थे। जिन्हें आज श्रीराम, सीता और लक्ष्मण कुंड के नाम से जाना जाता है। इन कुंडों की खास विशेषता यह है कि 12 महीनों इनमें कंचन पानी भरा रहता है। 300 से 400 मीटर की ऊंची पहाडिय़ों, झरनों, वृक्ष की आकर्षक लताओं और मंदिरों से सुजज्जित यह स्थान बेहद रमणीक है। यहां हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं।

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यहां पर कुछ दिन ठहरी थी बरात

स्थानीय निवासी सतीश सिंह सेंगर ने बताया कि ऐसी मान्यता है कि यहां पर भगवान शिव की बरात ठहरी थी। इस पहाड़ में भगवान शिव माता पार्वती के साथ कई दिनों तक प्रवास किया था। इसी के कारण इस स्थान का नाम रूपनाथ पड़ा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना। संजू गर्ग ने बताया कि भगवान शिव रूपनाथ में बनी विशाल गुफा से होकर मझौली के पास कटाव धाम की गुफा से निकलकर कटाव की नदी में स्नान करने जाते थे।

अद्भुत है यहां का प्राकृतिक सौंदर्य

यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य की खान है। बारिश के सीजन में वॉटरफाल का अनुपम नजारा यहां पहुंचने वाले लोगों को सम्मोहन में तो बांधता ही है, साथ ही मंदिर और कुंड बड़े ही दार्शनिक हैं। पिकनिक स्पॉट के लिए भी यह स्थल बड़ा फेमस है। मान्यता यह भी है कि सम्राट अशोक भी यहां पहुंचे थे, जिसका प्रमाण यहां शिलाओं पर उकेरी गई अनूठी लिपि भी है। प्रतिवर्ष 14 जनवरी से 18 जनवरी तक लगने वाला मेला आकर्षण का केंद्र रहता है। श्रावण सोमवार में भी यहां पर विशेष आयोजन होते हैं।

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ऐसे पहुंचे रूपनाथ धाम

इस स्थान पर पहुंचने के लिए कटनी जिला मुख्यालय से 70 किलोमीटर का सफर तय कर बहोरीबंद पहुंचना होगा। बहोरीबंद से 7 किलोमीटर मझौली रोड पर स्थित है रूपनाथ धाम। यहां पर बचैया से सिहोरा मार्ग, बहोरीबंद-सिहोरा मार्ग, मझौली से रूपनाथ धाम मार्ग और बहोरीबंद से रूपनाथ मार्ग से पहुंचा जा सकता है। रेल र्मा से कटनी से सलैया स्टेशन उतरने के बाद सलैया से बाकल-बहोरीबंद होते हुए रूपनाथ धाम पहुंचा जा सकता है।

ये है इस जगह की खासियत

- राम, सीता और लक्ष्मण तीन कुंड
- अशोक सम्राट का शिलालेख
- बड़ा विशालकाय तालाब
- भगवान भोलेनाथ का मंदिर
- बारिश के सीजन में वॉटरफॉल
- 300 मीटर की ऊंचाई वाला पहाड़ा
- मंदिर का प्रवेश द्वार
- चट्टो के सहारे मंदिर की सीढिय़ा
- धर्मशाल
- यज्ञशाला
- कुंडों के कारण वहां की शीतलता
- पहाड़ी और वन का सुंदर नजारा

 

Ashtha Awasthi
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