गांव के अस्पताल में बैठकर ग्रामीण जिला अस्पताल के डॉक्टरों से लेंगे सलाह

कैमोर, तेवरी, स्लीमनाबाद और ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य में मरीजों को मिलेगी टेलीमेडिसिन जैसी इलाज की सुविधा, नवंबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होगी सुविधा

By: [email protected] shrivas

Published: 05 Nov 2016, 10:02 PM IST

कटनी. कैमोर, तेवरी, स्लीमनाबाद और ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराने के लिए आने वाले मरीजों को अब इन केंद्रों में डॉक्टर के नहीं मिलने पर भी बिना इलाज वापस नहीं लौटना पड़ेगा। साथ ही दूसरी अस्पताल में जाकर इलाज भी नहीं कराना पड़ेगा। इन केंद्रों पर मरीजों की बीमारी का परीक्षण जिला अस्पताल में बैठे डॉक्टर कर सकेंगे। परीक्षण के बाद प्रारंभिक तौर दी जाने वाली दवाएं डॉक्टर नर्स व दसूरे स्टॉफ को बताएंगे। जिसे मरीज को मुहैया कराई जाएगी।  
इन स्वास्थ्य केंद्रों पर हर दिन करीब 150 मरीज उपचार कराने आते हैं। कई बार डॉक्टर के न होने या स्पेस्लिस्ट डॉक्टर के अस्पताल में पदस्थ न होने के कारण मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है। मरीजों की इन परेशानियों को देखते हुए कलेक्टर विशेष गढ़पाले ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में हाइटेक तरीके से मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जरूरी इंतजाम करने की बात कही। इसके बाद वीडियो कॉनफ्रेसिंग के माध्यम से जिला अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा गांव में बैठे मरीज को इलाज की सुविधा प्रदान करने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई। इसमें जिला अस्पताल में एक कंट्रोल रूम बनाया जाएगा। ब्राड-बैंड कनेक्शन और वेब कैमरे के माध्यम से अस्पताल को जिला अस्पताल से कनेक्ट किया जाएगा। मरीजों को सही ढंग से उपचार मिल रहा है या नही इस पर नजर रखने के लिए सिस्टम कलेक्टर कक्ष से भी जोड़ा जाएगा। सीएमचओ डॉ. केपी श्रीवास्तव ने बताया  कि योजना को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। कलेक्टर के आदेश के बाद पहले चरण में कैमोर, तेवरी, स्लीमनाबाद और ढीमरखेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रोंं का चयन किया गया है। 15 नंवबर तक इन चारों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। 
ऐसे होगा इलाज 
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराने आए मरीजों को पहले की ही भांति ओपीडी की पर्ची कटानी होगी। डॉक्टर की अनुपस्थिति में वह केंद्र में मौजूद कर्मचारी के पास जाएगा। बीमारी के बारे में उसको जानकारी देगा। इसके बाद वीडियो कॉनफ्रेंसिंग के माध्यम से मौजूद कर्मचारी जिला अस्पताल के डॉक्टर को मरीज की बीमारी के बारे में बताएगा। बीमारी जानने के बाद जिला अस्पताल से डॉक्टर केंद्र में मौजूद कर्मचारी को मरीज को कौन सी दवा और कितने दिन के लिए देनी यह सब जानकारी देंगे। मरीज की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल आकर इलाज कराने की सलाह दी जाएगी। 
 

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