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सांपों का कहर: 7 साल में 414 की गई जान, 16 करोड़ बांटा मुआवजा

जिले में सांपों का कहर रहा है। पिछले सात वर्षों में जिले में सर्प काटने के कारण ४१४ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। दूसरी ओर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को राहत राशि के रूप में १६ करोड़ से अधिक राशि बांटी गई है। जिले में लगातार बढ़ रही सर्पदंश की घटनाओं के बाद उनसे होने वाली मौतों की एक वजह जागरूकता का आभाव भी बताई जा रही है। सर्पदंश पर उपचार के लिए अस्पताल न जाकर झाड़ फूंक में समय बर्बाद कर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। जिले में प्रशासन ने भी ग्रामीण क्षेत्रों मे सर्पदंश की बढ़ी घटनाओं के मद्देनजर सावधानी के तौर पर जागरूकता अभियान चलाया है।

कटनीJun 28, 2024 / 06:24 pm

brajesh tiwari

झाड़ फूंक व समय पर उपचार न कराने से भी बढ़ रही मौतों की संख्या, जागरूकता से बचाई जा सकती है जान
कटनी. बारिश की शुरूआत से ही सांप काटने की घटनाएं बढ़ गई है। आएदिन लोग सर्पदंश का शिकार होकर अपनी जांच गंवा रहे है। सबसे ज्यादा सर्पदंश की घटनाएं ग्रामीण अंचलों में हो रही है और ग्रामीण झाड़ -फूंक और नीम-हकीम से मरीज को ठीक कराने के चक्कर में पड़कर जान गवां रहे है। जबकि दवाओं से इसका उपचार कर पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। सर्पदंश की घटनाओं का आकड़ा देखे तो कई वर्षों से जिले में सांपों का कहर रहा है। पिछले सात वर्षों में जिले में सर्प काटने के कारण ४१४ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। दूसरी ओर प्रशासन द्वारा पीड़ित परिवारों को राहत राशि के रूप में १६ करोड़ से अधिक राशि बांटी गई है। जिले में लगातार बढ़ रही सर्पदंश की घटनाओं के बाद उनसे होने वाली मौतों की एक वजह जागरूकता का आभाव भी बताई जा रही है। सर्पदंश पर उपचार के लिए अस्पताल न जाकर झाड़ फूंक में समय बर्बाद कर लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। जिले में प्रशासन ने भी ग्रामीण क्षेत्रों मे सर्पदंश की बढ़ी घटनाओं के मद्देनजर सावधानी के तौर पर जागरूकता अभियान चलाया है। कई स्थानों पर एंटी स्नेक बाईट जागरूकता कार्यशाला में जानकारी दी गई है।
राहत यह कि घटना रहा मौतों का ग्राफ- राहत यह है कि जिले में मौतों का आकड़ा प्रतिवर्ष घट रहा है। वर्ष २०१७-१८ में सर्पदंश से ७५ लोगों की मौत हुई थी। वर्ष २०१८-१९ में ४९, वर्ष २०१९-२० में ७३, वर्ष २०२०-२१ में ६१, २०२१-२२ में ५०, २०२२-२३ में ५४ व २०२३-२४ में ५२ लोगों की मौत हुई है। सात वर्षों का आकड़ा देखा जाए तो सर्पदंश से मौतों का ग्राफ घटता दिख रहा है।
४ लाख रुपए दिया जाता है मुआवजा-
सर्पदंश से शिकार पीड़ित के परिवार को शासन द्वारा राहत राशि प्रदान की जाती है। राजस्व पुस्तक परिपत्र ६ (४) में निहित प्रावधानों के अनुसार राहत राशि ४ लाख रुपए प्रदान की जाती है। इसके अलावा मवेशियों की मौत पर भी राशि देने का प्रावधान है। पांच वर्षों में मवेशियों की मौत पर करीब १८ हजार रुपए की राशि दी गई है।

सांप की 236 प्रजातियां देश में पाई जाती है-
देश में सांप की 236 प्रजातियां पाई जाती है। इसमें चार बेहद जहरीले होते हैं। कोबरा (नाग), रस्सेल वाइपर, स्केल्ड वाइपर और करैत शामिल हैं। सांप काटने से भारत में सबसे अधिक मौत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में हर साल 83,000 लोग सर्पदंश के शिकार होते हैं वहीं, 11,000 की मौत मौके पर ही हो जाती है।

हर सांप विषैला नहीं होता
काटने वाले सभी सांप विषैले नहीं होते है। इसलिए सर्पदंश पीड़ित को घबराना नहीं चाहिए। सामान्यत: जहरीले सांपों के डसने पर दांतों के दो निशान अलग ही दिखाई देते है। जबकि गैर विषैले सांप के डसने पर दो से ज्यादा निशान हो सकते है। परंतु ये निशान दिखाई नहीं देते है। इसलिए सांप के डसने पर निशान नहीं दिखाई देने पर यह सोचना गलत होगा कि सांप ने नहीं डसा है। सांप के डसने पर करीब- करीब 95 प्रतिशत मामलों मे पहला लक्षण नींद का आना है। इसके साथ ही निगलने या सांस लेने में तकलीफ होती है। आमतौर पर सांप के डसने के आधे घंटे बाद लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
सात साल में हुई मौतों व राहत राशि वितरण की स्थिति
वर्ष मौत राहत राशि
२०१७-१८ ७५ ३,०३,३८,०००
२०१८-१९ ४९ १,९७,५०,०००
२०१९-२० ७३ २,९२,००,०००
२०२०-२१ ६१ २,४४,२५,०००
२०२१-२२ ५० २,००,००,०००
२०२२-२३ ५४ १,८८,००,०००
२०२३-२४ ५२ २,०८, ००,०००
कुल ४१४ १६,३३,१३,०००

सांप डसने पर बरते सावधानियां
& जख्म को साबुन व पानी से धोएं।
& सांप के डसने के बाद उस स्थान का रंग बदले तो समझे सांप जहरीला है।
& सांप के जहर का प्रभाव 15 मिनट से 12 घंटे के बीच शुरू होता है।
& सांप के डसने के स्थान पर बर्फ न लगाएं।
& मरीज का तापमान, नब्ज, सांस की गति और रक्तचाप का ध्यान रखें।
& मिर्च या नीम के पत्ते खा लेने से जहर नहीं फैलता जैसी अफवाहों में न पड़ें।
& सांप के डसने वाली जगह पर किसी भी तरह की छेड़छाड़ न करें।
& उस जगह को कपडे से भी न बांधे और न ही सांप के जहर को मुंह से बाहर निकालें।

लक्षण
& दर्द और सूजन।
& ऐंठन, मतली, उल्टी।
& अकड़न या कपकपी।
& एलर्जी-पलकों का गिरना।
& घाव के चारों ओर सूजन।
& पेट दर्द, सिर दर्द सहित अन्य।
&पीड़ित की जिंदगी बचाने के लिए एक- एक सेकंड का समय कीमती होता है। जिंदगी से बढ़कर कुछ नहीं है, इसलिए सभी सावधान और सतर्क रहें। तत्काल नजदीकी अस्पताल में पीड़ित को पहुंचाएं। झाड़-फूंक का सहारा न लें। जिले के जिला चिकित्सालय सहित सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों मे एंटी स्नैक वेनम इंजेक्शन पर्याप्त संख्या में उपलब्ध है।
अविप्रसाद, कलेक्टर

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