विश्व मदर्स डे पर पढि़ए एक ऐसी मां की कहानी जिसने बेटियों को जन्म तो नही दिया, पर बेटियों के लिए जन्म देने वाली मां से बढ़कर है

विश्व मदर्स डे पर पढि़ए एक ऐसी मां की कहानी जिसने बेटियों को जन्म तो नही दिया, पर बेटियों के लिए जन्म देने वाली मां से बढ़कर है
The story of two mothers of the district on World Mother's Day

Dharmendra Pandey | Publish: May, 12 2019 03:01:01 PM (IST) Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

मां... जन्म दिए बिना ही पांच बेटियों की कर रही परवरिश तो दूसरी 13 साल से बीमार बेटे को सीने लगाए घूम रहीं

 

कटनी. मां...शब्द छोटा जरूर है पर इसमें पूरा विश्व समाया है। हर एक बच्चे की पूरी दुनिया मां के आसपास ही घूमती है। बच्चों की ताकत और उसकी ऊर्जा का सबसे बड़ा माध्यम होता है। विश्व मां दिवस के अवसर पर आज हम आपको दो ऐसी मां की कहानी बता रहें हैं जो मां बेटे के रिश्ते से कहीं बढ़कर हैं। इसमें एक हैं कटनी एसपी डॉ. हिमानी खन्ना, वे पांच बेटियों की जिम्मेंदारी बखूबी निभा रहीं हैं। उन्होंने बेटियों को जन्म तो नहीं दिया है, लेकिन पांचों बेटियों के लिए मां से कम भी नहीं हैं। दूसरी ने बच्चे को जन्म तो दिया, लेकिन अब तक उसके कान मां शब्द नही सुन पाए। बेटा 13 साल का हो गया, लेकिन वह हर पल बिस्तर पर लेटा रहता है। मां भी पिछले 13 से बेटे को सीन से लगाए इसी उम्मीद से जी रही है कि एक दिन उसका बेटा स्वस्थ जरूर होगा।

6 साल से अपनी निगरानी में रखकर करवा रहीं सिविल सर्विसेज की तैयारी:
जिले की पुलिस अधीक्षक डॉ. हिमानी खन्ना पिछले कई साल से पांच बेटियों को अपने पास रखकर सिविल सर्विसेज की तैयारी करवा रही हैं। बेटियों के रहने खाने से लेकर सारी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है। पुलिस अधीक्षक डॉ. खन्ना ने बताया कि उनके पति साल 2013 में पन्ना पुलिस अधीक्षक थे। इस दौरान पन्ना के सरकारी स्कूल में पढऩे वाली अफसाना ने कक्षा 12वीं में टॉप किया। वह काफी गरीब परिवार से थी। उससे मिली तो ऐसा लगा कि वह आगे कुछ कर सकती है। उसमें आगे बढऩे का जज्बा था। अफसाना के घर जाकर परिजनों से बात की। एक माह तक परिजनों को समझाने में लग गया। इसके बाद वे मान गए। तब से अफसाना उन्हीं की निगरानी में रहती है। ग्वालियर कॉलेज दाखिला दिलाया। विश्वविद्यालय स्तर पर उसका बेहतर परिणाम रहा। आइएएस की परीक्षा में इंटरव्यू तक पहुंची। इसके अलावा चार बेटियों की और परवरिश कर रही है। चारों बेटी उनके पास 2017 में आई थी।

पति का सिर से उठा गया साया, बेटे को स्वस्थ कर सही जीवन देना ही मकसद:
गायत्री कॉलोनी निवासी नीलम नामदेव के पति की ट्रेन हादसे में मौत हो गई थी। बेटा भी पैदा होते सैरेवल पॉलिसी नामक गंभीर बीमारी का शिकार हो गया। दिल्ली, मुंबई, कलकत्ता, तमिलनाडू, इंदौर, भोपाल जैसे शहरों में जाकर इलाज करवाया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।
पिछले 13 साल से बेटा हर समय विस्तर पर लेटा रहता है। उम्र के साथ शरीर के अंगों में बढ़ोत्तरी तो हो रही, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नही हो रहा है। मां नीलम को अब भी कुछ चमत्कार होने की उम्मीद है। इसी उम्मीद के सहारे वह अपना जीवन काट रही है।
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