किसानों के खून-पसीने की कमाई बर्बाद, करोड़ों रुपये की हजारों क्विंटल धान अफसरों की लापरवाही से खराब, देखें वीडियो

खून और पसीना बहाकर कई माह तक मेहनत करके किसानों द्वारा फसल तैयार की जाती है, लेकिन जब इसकी सुरक्षा की बारी आती है तो जिम्मेदार अमला इसकी कीमत नहीं समझता। ऐसा ही कुछ नजारा सामने आया है बड़वारा क्षेत्र के नेशनल हाइवे किनारे स्थित मझगवां 'ओपन कैप' का। यहां पर किसानों से समर्थन मूल्य में खरीदी गई 58 हजार मिट्रिक टन धान का भंडारण किया गया है। इस धान की सुरक्षा का जिम्मा जिला विपणन विभाग के हाथों में है। धान की सुरक्षा को लेकर बड़ी बेपरवाही विभाग व जिला प्रशासन की सामने आई है।

By: balmeek pandey

Published: 15 Feb 2020, 11:01 AM IST

Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

कटनी. खून और पसीना बहाकर कई माह तक मेहनत करके किसानों द्वारा फसल तैयार की जाती है, लेकिन जब इसकी सुरक्षा की बारी आती है तो जिम्मेदार अमला इसकी कीमत नहीं समझता। ऐसा ही कुछ नजारा सामने आया है बड़वारा क्षेत्र के नेशनल हाइवे किनारे स्थित मझगवां 'ओपन कैपÓ का। यहां पर किसानों से समर्थन मूल्य में खरीदी गई 58 हजार मिट्रिक टन धान का भंडारण किया गया है। इस धान की सुरक्षा का जिम्मा जिला विपणन विभाग के हाथों में है। धान की सुरक्षा को लेकर बड़ी बेपरवाही विभाग व जिला प्रशासन की सामने आई है। तीन माह पहले से कलेक्टर शशिभूषण सिंह समीक्षा कर रहे थे, लेकिन विपणन के अधिकारियों ने पानी फेर दिया। यहां पर भंडारित की गई हजारों क्विंटल धान बर्बाद हो गई है। अधिकांश धान में पानी पडऩे के कारण वह जमकर पौधों में बदल गई है। हैरानी की बात तो यह कि अफसर भी सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के नाम पर औपचारिकता निभाई और मझगवां में धान बर्बाद हो गई। पत्रिका ने जब इसकी पड़ताल की तो चौकाने वाले तथ्य सामने आए। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि बारिश के पूर्व धान को ढंका नहीं गया था, जिस कारण धान भीगने से खराब हुई है। अब कैप को अलग कर धूप में सुखाया जा रहा है, लेकिन धान और खराब होती जा रही है।

Thousands quintals of paddy ruin in open cap majhgwan
IMAGE CREDIT: patrika

हर माह खर्च हो रहे लाखों रुपये
ओपन कैप की सुरक्षा के लिए अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इनको हर माह लाखों रुपये की तनख्वाह के साथ हजारों रुपये के सुरक्षा गार्ड रखे गए हैं। धान की सुरक्षा के लिए 14 गार्ड रखे गए हैं। इनको हर माह 6 हजार 400 रुपये वेतन दिया जा रहा है। एक माह में इनके वेतन में हर माह 89 हजार 600 रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा कैप कवर में हर साल लाखों रुपये फूंके जा रहे हैं इसके बाद भी अनाज की सुरक्षा नहीं हो पा रही।

 

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खास-खास:
- ओपन कैप में रखे अनाज को कवर करने के लिए 350 कैप कवर किए गए हैं क्रय, 300 कैप कवर पहले से हैं मौजूद।
- अनाज की सुरक्षा के लिए लगाई गई हैं लाइटें, अग्निशमन यंत्र का भी किया गया है इंतजाम फिर भी नहीं हो पा रही सुरक्षा।
- तीन माह में उठाना रहता नान को ओपन कैप में भंडारित धान, जनवरी, फरवरी, मार्च माह तक का है रहता है समय।
- मार्फेड अधिकारियों का अजीबो-गरीब तर्क कि वेयर हाउसों में रखी धान हुई है खराब, फिर तो यह खुले में रखी हुई है।

दफ्तर से नहीं निकले अफसर
जिले में बड़ी मात्रा में धान खराब होती रही, अधिकारी कागजों में सुरक्षा को लेकर दिशा-निर्देश जारी करते रहे, लेकिन विभागों के अफसर दफ्तरों से बाहर नहीं निकले। इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मझगवां ओपन कैप में इतनी बड़ी मात्रा में धान भंडारित है और खराब हो गई है, लेकिन विपणन अधिकारी उसे देखने तक नहीं पहुंचे। सिर्फ कर्मचारियों के हाथों ही इतनी बड़ी मात्रा में अनाज की सुरक्षा है।

 

सवालों में विभागों की मॉनीटरिंग
इसबार धान की सुरक्षा के लिए व्यापक पैमाने पर योजना बनाई गई थी। धान की खरीदी, भुगतान, सुरक्षा का जिम्मा जिला खाद्य एवं आपूर्ति विभाग, सहकारिता विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम व विपणन विभाग के जिम्मे थी। किसी भी विभाग के अफसर ने संजीदगी नहीं दिखाई और हजारों क्विंटल धान बर्बाद हो गई है। लाखों रुपये फूंकने के बाद भी धान को सुरक्षित नहीं रखा जा सका। ऐसे में विभागों की मॉनीटरिंग भी सवालों में है।

 

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इनका कहना है
धान की सुरक्षा करना मार्फेड की जिम्मेदारी थी, मिलिंग के लिए अभी भोपाल से कोई पॉलिसी नहीं आई। जब कोई निर्देश आएंगे तभी हम इस दिशा में आगे बढ़ पाएंगे।
पीयूष माली, जिला प्रबंधक नॉन।

मैं पिछले माह ओपन कैब गई थी, अभी नहीं जा पाई। धान बारिश के कारण खराब हुई है। काफी सुरक्षा की गई है, लेकिन शीत के कारण जम आई है। कैप कवर अलग कराए गए हैं।
शिखा वर्मा, जिला विपणन अधिकारी।

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