इस जिले में 'ट्रामा' सेंटर के नाम पर स्वास्थ्य विभाग कर रहा 'ड्रामा', जानिये कैसे

इस जिले में 'ट्रामा' सेंटर के नाम पर स्वास्थ्य विभाग कर रहा 'ड्रामा', जानिये कैसे

Balmeek Pandey | Publish: Jul, 23 2018 12:10:02 PM (IST) | Updated: Jul, 23 2018 12:11:31 PM (IST) Katni, Madhya Pradesh, India

ट्रामा सेंटर खुले 66 दिन बीते, बगैर डॉक्टर हो रहा उपचार, नहीं हुई विशेषज्ञों, डॉक्टरों व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों की पदस्थापना, दिखावा बना ट्रामा सेंटर

कटनी. 17 मई को प्रदेश के वित्त एवं जिले के प्रभारी मंत्री जयंत मलैया ने 4 करोड़ 19 लाख रुपए की लागत से बने ट्रामा सेंटर का लोकार्पण किया था। लोकार्पण के साथ ही लोगों को बेहतर उपचार की आस बंध गई थी। हैरानी की बात तो यह है कि ट्रामा सेंटर शुरू हुए 66 दिन का समय बीत गया है, लेकिन यहां पर स्वास्थ्य विभाग से एक भी स्टॉफ की पदस्थापना नहीं की गई। जिस ट्रॉमा सेंटर का लोकार्पण किया है, वहां ट्रॉमा सेंटर जैसा कुछ नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने इसे ट्रॉमा सेंटर दिखाने का फिलहाल 'ड्रामाÓ किया है। इसे जिला अस्पताल का इमरजेंसी कक्ष बना दिया गया है। ट्रॉमा सेंटर के मानकों का नामोनिशान नहीं है। न उपकरण हैं और न स्टाफ। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसा उपचार यहां मिल रहा होगा।

घायलों को भी कर देते हैं रेफर
ट्रॉमा सेंटर का उद्देश्य दुर्घटना में घायल लोगों और गंभीर मरीजों को तत्काल प्राणरक्षक चिकित्सा सेवा और सर्जरी आदि है, लेकिन यहां के ट्रॉमा सेंटर में रोज यह 'ड्रामा' देखा जाता है कि चोट या फैक्चर में भी घायल मरीज को जबलपुर के लिए रेफर कर दिया जाता है। उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में कटनी जिला सहित सतना, पन्ना, दमोह, उमरिया आदि जिले के मरीज भी यहां आते हैं। तमाम मरीज रेफर कर दिए जाने से रास्ते में दम तोड़ देते हैं। ट्रॉमा सेंटर के आइसीयू और मेजर ओटी में ताला लटक रहा है।

2011 से स्वीकृत हैं पद
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग मंत्रालय के आदेश अनुसार 2011 में पद स्वीकृत हो चुके हैं। फरवरी 2018 में प्रत्येक जिले के मान से पदों का सृजन कर पदों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इसमें मेडिकल विशेषज्ञ 02, शल्य क्रिया विशेषज्ञ 2, निश्चेतना विशेषज्ञ 3, अस्थि रोग विशेषज्ञ 3, चिकित्सा अधिकारी 11, स्टॉफ नर्स 25, रेडियोग्राफर 2, लैब टैक्नीशियन 2, ओटी टैक्नीशियन, ड्रेसर, वाडब्वाय, सफाई कर्मचारी के 4-4, वाहन चालक के 2 पद स्वीकृत हैं।

इनका कहना है
ट्रामा सेंटर में चिकित्सक सहित अन्य स्टॉफ की पदस्थापना किए जाने के लिए दो से तीन बार विभागीय अधिकारियों को पत्राचार किया जा चुका है, अभी तक उस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला है। स्टॉफ की कमी के कारण उपचार में समस्या जा रहा है।
डॉ. एसके शर्मा, सीएस।
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ट्रामा सेंटर में डॉक्टरों सहित नर्सिंग स्टॉफ, विशेषज्ञों सहित अन्य कर्मचारियों की पदस्थापना अबतक क्यों नहीं हो पाई इस संबंध में शीघ्र पता लगाया जाएगा। इसके लिए आवश्यक पहल की जाएगी।
संदीप जायसवाल, विधायक कटनी।

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