चार किसान भी होंगे तो मोदी और शाह के समझ में बात आ जानी है: उमाभारती

पूर्व मुख्यमंत्री ने कटनी में कहा कि तिरंगा और गंगा के बाद अब गाय के नाम जिंदगी.

- अमरकंटक से ओरछा यात्रा में अल्प प्रवास पर कटनी में रुकीं उमा भारती ने कहा कि किसानों को अपनी बात ऐसे रखनी चाहिए कि दूसरे किसी को परेशानी नहीं हो, चार किसान भी होंगे तो मोदी और अमित शाह के समझ में बात आ जानी है.

- भारत वर्ष का परिचय ही है धर्म प्राण-कृषि प्रधान, उमा भरती ने कहा-मैं किसान की बेटी, लोग खेत झांके भी नहीं रहते और स्वयं को बताते हैं किसान.

By: raghavendra chaturvedi

Published: 01 Dec 2020, 11:10 PM IST

Katni, Katni, Madhya Pradesh, India

कटनी. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने कहा कि तिरंगा और गंगा के बाद अब आगे की जिंदगी गाय के नाम। हेलीकाप्टर से अमरकंटक से ओरछा प्रवास में लंबी उड़ान के कारण वे कुछ समय के लिए सोमवार को कटनी में रुकीं। यहां मीडिया से चर्चा में कहा कि अमरकंटक में चतुर्दशी और पूर्णिमा में कार्तिक स्वामी के दिव्य स्थान पर रूकने का सौभाग्य मिला। वहां जंगल भ्रमण में संयोग से गाय ने बछिया को जन्म दिया तो शाम को आदिवासी परिवार के घर पहुंचकर उसका नाम तारा रखा और मन में सकंल्प कर आगे की जिंदगी गाय के नाम लिख दी।

किसानों के आंदोलन के मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को अपनी बात ऐसे रखनी है कि दूसरे किसी को परेशानी नहीं हो। चार किसान भी पहुंच जाएंगे तो मोदी और अमित शाह के समझ में बात आ जानी है। दोनों ऐसे हैं जो समस्याओं को समझते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का आग्रह और निमंत्रण बिल्कुल ठीक है। सरकार ठीक कह रही है कि किसान तो अन्नदाता है, सबको खिला रहा है। वह किसी को कष्ट नहीं दे। लव जिहाद पर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज के कदम को अच्छा बताया.

 

पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने कहा कि इस देश को किसान ही चला रहे हैं। भारत वर्ष का परिचय ही है धर्म प्राण-कृषि प्रधान। किसान कर्र्जदार हो गया है। आत्महत्याएं बहुत हुई है। जबकि किसान की मांगे बहुत छोटी होती है। समय पर खाद मिले, बीज मिले, फसल का उचित मूल्य मिले और समय पर बिजली मिल जाए। इतना हो जाए तो किसान कर्जदार नहीं रहेगा बल्कि कर्जदाता हो जाएगा। समस्या शरद जोशी और महेंद्र सिंह टिकैत के समय भी बहुत तरीके उठी थी। पर दुर्भाग्य था कि दोनों में विवाद हो गया। जबकि वह समय किसानों का स्वर्णिम युग था।

तथाकथित किसानों पर तंज सकते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उमाभारती ने कहा कि मैं किसान की बेटी हूं। कई लोग खेत झांके भी नहीं रहते और स्वयं को किसान बताते हैं। उन्होंने कहा कि किसान समस्या में है, और उसके प्वाइंट तय है। यह बात जरूर है कि उसमें व्यापकता बहुत है। इसके लिए किसानों को संवेदनशीलता और धैर्य से अपनी कहनी होगी। उन्होंने किसानों से एकजुट रहने की अपील की और कहा कि सबको एक रहना, आपस में झगड़ा नहीं करें, उससे बात नहीं पाती। सरकार को भी एक मौका दें, सरकार उनकी बात सुने।

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