scriptUnmatched carving possible in Katni stone | VIDEO : कटनी के पत्थर में बेजोड़ नक्काशी संभव | Patrika News

VIDEO : कटनी के पत्थर में बेजोड़ नक्काशी संभव

कटनी में चल रहे स्टोन फेस्टिवल में जबलपुर से कटनी पहुंचे कलाकार ने कहा, शिल्पकला में मलाई की तरह कटता है कटनी का स्टोन

कटनी

Updated: November 17, 2021 12:44:08 pm

कटनी. पत्थर गीत गाते हैं, पत्थर शब्दों, वाक्यों में बदलते हैं। पत्थर गीत भी बनते हैं, पत्थर गीत भी गाते हैं। सच में... पत्थर बात करते हैं, संवाद करते हैं, जीवन का आधार बनते हैं। पत्थर प्रेम भी करते हैं, श्रद्धा की संभावना बनते हैं। ये बातें किसी कवि की नहीं बल्कि कटनी स्टोन आर्ट फेस्टीवल आधारशिला में अपने हुनर का जादू दिखाने जागृति पार्क माधवनगर आए जबलपुर के शिल्पकार विनय अंबर ने कटनी के स्टोन की तारीफ करते हुए यह कविता कही।

Unmatched carving possible in Katni stone
जबलपुर के शिल्पकार विनय अंबर ने कटनी के स्टोन की तारीफ की.

अंबर ने कटनी के स्टोन को लेकर अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वे पिछले चार साल से कटनी के पत्थर पर शिल्पकला का काम कर रहे हैं और यहां के पत्थर क्वालिटी अद्भुत है। उन्होंने कहा कि कटनी के पत्थर पर काम करने की गुंजाइश बहुत है क्योंकि इसके कई टाइप है। यह हार्ड भी है तो साफ्ट भी है और इस कारण तराशने के दौरान यह मलाई की तरह कटता है।

शिल्पकार अंबर ने कहा कि, जबलपुर में पिछले कई साल से अलग-अलग कलाओं को प्रमोट करने आर्ट फेस्टीवल का आयोजन होता है। जिसमें पिछले चार साल से कटनी का पत्थर शिल्पकारों को उपलब्ध कराया जा रहा है। कटनी के स्टोन पर अभी तक लगभग 50 शिल्पकार काम कर चुके हैं और उसमें उन्हें और अधिक संभावनाएं नजर आईं, जिसके अनुभव के रूप में कलाकृतियां आज भी उनके पास हैं।

कटनी में आयोजित स्टोन आर्ट फेस्टीवल को लेकर उन्होंने कहा कि, शिल्पकारों को यह एक बड़ा मंच मिला है और ब्रांडिंग का कार्य ऐसे आगे भी चलता रहा तो कटनी का स्टोन बड़ा मुकाम हासिल करेगा। शिल्पकार अंबर ने कटनी स्टोन को लेकर अपने अनुभव बांटते हुए कहा कि उनकी एक कार्यक्रम के दौरान इतिहासकार चंद्रकांत राय से मुलाकात हुई थी। चर्चा के दौरान उन्होंने बताया था कि आठवीं शताब्दी में रंगमंच थियेटर की शुरूआत कटनी के बिलहरी से हुई थी। बिलहरी में बाद में थियेटर को पत्थरों से रखकर बंद कर दिया गया। बिलहरी के कलात्मक मंदिरों में लगा स्टोन भी कटनी का है, जो आज भी जीवंत कला का उदाहरण है।

शिल्पकार विनय अंबर का कहना है कि वे कई साल से कटनी के स्टोन पर काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि कटनी में निकलने वाले पीले स्टोन में दाना निकलता है और वहीं उसकी खूबसूरती का राज है। तभी कई साल से शिल्पकला के लिए जाने जाने वाले कई मंदिर आज भी वैसे के वैसे खड़े हैं। उन्होंने कहा कि पीले पत्थर पर काम करना बहुत आसान होता है। अंबर का कहना है कि जिले में निकलने वाले कुछ मार्बल में भी शिल्प की बहुत संभावनाएं हैं।

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