भूख हड़ताल पर बैठीं मां-बेटी, 5 साल से लोन के लिए काट रहीं हैं विभागों के चक्कर

लोन पास न होने पर बेटी के साथ भूख हड़ताल पर बैठी महिला, बोली- टूटती जा रही है आत्मनिर्भर बनने की आस...

By: Shailendra Sharma

Published: 30 Sep 2020, 05:24 PM IST

कटनी. मैं आत्मनिर्भर बनना चाहती हूं और लगातार पांच साल से लोन के लिए एप्लाई कर रही हूं लेकिन हर बार कोई नया कारण बताकर मेरा लोन स्वीकृत नहीं किया जाता है। ये कहना है कि कटनी में कलेक्ट्रेट के सामने बेटी के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठी तलाकशुदा महिला का। महिला का कहना है कि वो आत्मनिर्भर बनकर अपना और अपनी बेटी का भविष्य बनाना चाहती है लेकिन उसे लोन नहीं दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री रोजगार योजना, मुख्यमंत्री उद्यमी योजना, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना और अन्य योजनाओं के तहत महिला लोन एप्लाई कर चुकी है, बीते पांच सालों से उद्योग विभाग के चक्कर लगा रही है लेकिन अभी तक उसे लोन नहीं मिला है।

कलेक्ट्रेट के सामने बेटी के साथ भूख हड़ताल
कलेक्ट्रेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठी महिला का नाम रश्मि जायसवाल है जो शहर के वृंदावन कॉलोनी की रहने वाली हैं। उन्होंने बताया कि वो तलाकशुदा हैं और 12वीं क्लास में पढ़ने वाली अपनी बेटी के साथ अलग रहकर जिंदगी बिता रही हैं। रश्मि ने बताया कि वो लोन लेकर छोटा मोटा व्यापार कर आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं जिससे उनका और उनकी बेटी का भविष्य संवर सके लेकिन अभी तक लोन स्वीकृत नहीं हुआ है। पांच साल से उद्योग विभाग के चक्कर लगा रही हैं, उद्योग विभाग के जिला प्रबंधक, कलेक्टर, आयुक्त, प्रमुख सचिव, मुख्यमंत्री सहित प्रधानमंत्री कार्यालय को भी अपनी समस्या बता चुकी हैं लेकिन कोई हल नहीं निकला है। रश्मि का कहना है कि जब भी लोन के लिए बैंक में एप्लाई करती हैं तो उन्हें कह दिया जाता है कि तुम्हारा लोन स्वीकृत नहीं होगा। उन्होंने आगे बताया कि पहले उन्हें उम्मीद थी कि सरकारी नौकरी लग जाएगी इसलिए मेहनत कर चार बार पीएससी का एक्जाम भी दिया लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। बेटी के भविष्य की चिंता में प्राइवेट नौकरी करती हैं ताकि बेटी को अच्छे से पढ़ा सकें लेकिन वो सपना भी अधूरा सा ही नजर आता है।

 

जब भूखे ही मरना है तो यहीं पर मरूंगी- पीड़िता
बेटी के साथ भूख हड़ताल पर बैठी रश्मि सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाकर इतनी थक चुकी हैं कि अब कहती हैं कि अगर भूखे ही मरना है तो वो कलेक्ट्रेट के सामने ही भूख हड़ताल करते हुए अपने प्राण छोड़ेंगी। उन्होंने युवाओं को रोजगार के लिए चल रही तमाम योजनाओं पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि ये सारी योजनाएं खोखली योजनाएं हैं और ये सिर्फ हितग्राहियों को परेशान कर रही हैं।

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