सिटी गर्ल्स व वीमेंस के लिए फिटनेस फर्स्ट, जिम सेंटरों में इस एक्सरसाइज से संवार रहीं सेहत

छोटे शहरों में भी अब महानगरीय जीवन शैली दिखने लगी है। कटनी में भी अब गल्र्स व वीमेंस जिम में घंटों पसीना बहा रहीं हैं। उनके लिए फिटनेस फस्र्ट हो गई है। उनका मानना है कि हेल्थ अच्छी है तो सबकुछ अच्छा है।

By: balmeek pandey

Published: 07 Mar 2020, 01:03 PM IST

कटनी. इन्हें फूल की तरह नाजुक कहलाना पसंद नहीं, न ही ये आसानी से टूट जाने वालों में से हैं, वो जिंदगी के 'दंगल' में गिरकर दोबारा खड़े होने में यकीन रखती हैं। वो अपना रास्ता खुद बनाती हैं क्योंकि इनका मानना है कि लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं। छोटे शहरों में भी अब महानगरीय जीवन शैली दिखने लगी है। कटनी में भी अब गल्र्स व वीमेंस जिम में घंटों पसीना बहा रहीं हैं। उनके लिए फिटनेस फस्र्ट हो गई है। उनका मानना है कि हेल्थ अच्छी है तो सबकुछ अच्छा है। खुद को फिट रखना सेहत के साथ-साथ एक ट्रेंड भी बनता जा रहा है। आजकल की व्यस्त लाइफ में भी लोग अपने फिटनेस को लेकर काफी अवेयर हैं। एक आम इंसान से लेकर हाई प्रोफेशनल व्यक्ति भी अपनी फिटनेस को लेकर जरूर सोच रहा है, सोच ही नहीं रहा बल्कि अपने टाइम और मैनेजमेंट के हिसाब से वर्कआउट भी कर रही हैं। खुद को फिट एंड फाइन रखने के लिए लोग डाइट से लेकर योगा, जिम, एरोबिक्स, डांस, जुंबा जैसे क्लासेस ज्वाइन कर रही हैं।

 

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यह एक्साइज है हिट
एक्सपर्ट रोहित मेहरोत्रा के अनुसार इस दिनों क्रॉसफिट को एक्सरसाइज का स्पोर्ट कहा जा सकता है। ये एक्सरसाइज का एक ऐसा तरीका है जिससे आप अपने शरीर को फिट रख सकते हैं। इसे किसी भी शरीर वाला इस्तेमाल कर सकता है। चाहे कोई इंसान पतला है या मोटा, वो अपनी शारीरिक फिटनेस को और बेहतर कर सकता है। ये कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस का हार्डकोर स्टाइल है, जो आपको बेहतर शरीर प्राप्त करने में मदद करता है। इस एक्सरसाइज से आप अपने शरीर की ताकत को एक स्किल्ड तरीके से बेहतर कर सकते हैं। इसमें हर दिन आपके शरीर के एक हिस्से पर काम होता है जिससे आप शरीर के सिर्फ एक हिस्से या फिर पूरे हफ्ते एक ही एक्सरसाइज ना करते रहें। इसकी एक्सरसाइज एक नॉर्मल जिम से अलग होती हैं, इसलिए इसके एक्सपर्ट भी अलग होते हैं।

 

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सेल्फ डिफेंस के लिए भी जिम
शहर स्थित एक जिम में रेग्युलर एक्सरसाइज करने वाली स्नेहा गुप्ता का रूटीन इन दिनों जरा बदला है। वे अपने ट्रेनर से हैवी वेट ट्रेनिंग की डिमांड कर रही हैं। हैवी वेट ट्रेनिंग से वे खुद को फिट और स्ट्रॉन्ग बनाना चाहती हैं। स्नेहा कहती हैं कि लेडीज या गल्र्स के जिम जाने का मकसद सिर्फ वेट लॉस करना या फिट रहना ही नहीं होता है। मैं जिम इसलिए जाती हूं, ताकि खुद को स्ट्रॉन्ग बना सकूं। अक्सर हमें ईव टीजिंग जैसी प्रॉब्लम्स फेस करनी पड़ती हैं। ऐसे में जब फिटनेस के लिए जिम जाते हैं तो क्यों न थोड़ी हैवी वेट ट्रेनिंग ले ली जाए, जिससे सिर्फ बाहर ही नहीं बल्कि खुद को अंदर से भी स्ट्रॉन्ग बना सकें।

 

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रेसलिंग न सही, खुद को बनाना है स्ट्रॉन्ग
शहर के एक जिम में हैवी वेट ट्रेनिंग ले रहीं मुस्कान सिंह कहती हैं कि फिट रहना मुझे पसंद है। ढाई महीने में 7 किलो वजन कम किया है। पहले मैं सिर्फ फिट रहने के लिए ही जिम आती थी लेकिन अब खुद को अंदर से स्ट्रांग बना रही हूं। मैं रेसलिंग तो नहीं कर सकती लेकिन खुद को स्ट्रॉन्ग बनाकर अपनी फैमिली और बच्चों को फिट रहने के लिए प्रेरित तो कर सकती हूं। जिम आने से सेल्फ कॉन्फिडेंस डिवलेप होता है। तभी मैंने अब हैवी वेट ट्रेनिंग शुरू कर दी है। हालांकि जिम में ज्यादातर लेडीज फिटनेस के लिए आती हैं। कुछ ऐसी भी हैं, जो फिटनेस से आगे निकलकर स्ट्रॉन्ग बनना चाहती हैं।

 

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जो फिट रहेगा वो हिट रहेगा
रोहित बताते हैं कि आजकल का कल्चर भागदौड़ भरी जिंदगी का हो चुका है। एक तरह से लोगों ने भी ये मान ही लिया है कि सफलता में कुछ परसेंट फिटनेस का भी रोल होता है। क्योंकि जब इंसान फिट होगा तभी ना वो ज्यादा मेहनत कर सकेगा। और इसीलिए हर उम्र के लोग अब अपनी फिटनेस को लेकर काफी सचेत रहते हैं। शहर के कई ऐसे जिम हैं जहां वर्कआउट करने के लिए हर उम्र वर्ग के लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। कोई अपना वजन कम कर रहा है, तो कोई अपना फिगर। किसी को अपनी मशल्स की चिंता है। कोई यहां स्टेमिना बढ़ा रहा है। लड़कियों में भी जिम में जाकर वर्कआउट करने का क्रेज देखने को मिल रहा है।

balmeek pandey Reporting
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