कौशांबी. प्रदेश सरकार भले ही प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि परिषदीय स्कूलों की बदहाली दूर नहीं हो पा रही है। परिषदीय स्कूलों मे पढ़ाने वाले शिक्षक कई कई दिन तक स्कूल नहीं पहुँचते। ऐसे स्कूलों मे पढ़ने वाले छात्र चाहकर भी अच्छी शिक्षा नहीं हासिल कर पाते हैं। स्कूल की व्यवस्था भगवान भरोसे ही रहती है। सरकार की ओर से मिलने वाली सुविधाएँ भी छात्र/छात्राओं को नहीं मिलता है। इस सच्चाई से खुद सिराथू से भाजपा विधायक शीतला प्रसाद पटेल रूबरू हुये। परिषदीय स्कूल की सच्चाई देख विधायक ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से फोन पर दोषी अध्यापकों के खिलाफ सख्त कार्यवाही को कहा है। शासन की ओर से परिषदीय स्कूलों मे संचालित योजनाओं की हकीकत जानने निकले सिराथू से भाजपा विधायक शीतला प्रसाद पटेल को कड़ा विकास खंड के अकबरपुर प्राथमिक स्कूल की जो बदहाल तस्वीर दिखी उसे देख वह दंग रह गए।


अकबरपुर प्राथमिक स्कूल के सभी कमरों का मरम्मतीकरण कराया जा रहा है। स्कूल परिसर मे चारो तरह ईट, गिट्टी व बालू बिखरी पड़ी है। हैंडपंप के पास थोड़ी से बची जमीन पर एक से पाँच तक के सभी बच्चों की सामूहिक क्लास लगाई जाती है। एमडीएम शेड जो साल भर पहले तैयार हो जाना चाहिए उसमे अभी काम लगा है, जो काम चल रहा है वह भी दोयम दर्जे का हो रहा है। शौचालय ऐसा जिसकी ओर कोई देखने की हिमाकत भी न करे। स्कूल की बदहाली देख विधायक सिराथू ने बेसिक शिक्षा अधिकारी को फोन लगाया और हकीकत से रूबरू करते हुये दोषियों के खिलाफ सख्त कारवाही करने को कहा। विधायक का कहना है कि शासन की मंशानुरूप परिषदीय स्कूलों मे बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा दिलाना ही उनकी सरकार के प्राथमिकता है।


कड़ा विकास खंड के अकबरपुर स्थित प्राथमिक स्कूल मे तैनात प्रधानाध्यापक वसीम अहमद पिछले कई दिनों से बिना किसी सूचना के गायब है। स्थानीय ग्रामीणों की माने तो इस स्कूल के प्रधानाध्यापक महीने मे एक हफ्ते भी नहीं आते। ग्रामीण कुछ कहते है तो प्रधानाध्यापक उन्हे अधिकारियों के बीच अपनी गहरी पैठ का हवाला देकर चुप करा देता है। एक साल से स्कूल मे तैनात सहायक अध्यापक भारत सिंह का कहना है कि उनके यहाँ सारी व्यवस्था ठीक है लेकिन खुद सहायक अध्यकप यह भी स्वीकार करते हैं कि जब से उनकी तैनाती हुई है तब से इस स्कूल के बच्चों को सपताल मे एक दिन मिलने वाला दूध व मौसमी फल वितरित नहीं किया गया है।


इस स्कूल मे पढ़ने वाले छात्रों का कहना है कि उन्हे न तो सही तरह से शिक्षित किया जाता है और न ही सरकर की ओर से मिलने वाली सुविधाएँ दी जाती है। सही तरह से एमडीएम भी नहीं बनता। आधी से अधिक ठंड बीत गई लेकिन यहाँ के बच्चों को अभी तक स्वेटर नहीं मुहैया कराए गए। एक ओर सरकार नारा दे रही है कि सब पढ़े सब बढ़े, लेकिन सरकार द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों की जो तस्वीरें सामने आ रही है उसे देखकर नहीं लगता कि सरकार की मंशा ऐसे मे पूरी हो सकेगी। मौजूदा समय मे प्रदेश की योगी सरकार ने परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था सुधारने के लिए खजाने का मुँह खोल दिया है। पाँच लाख से लेकर आठ-दस लाख रुपये प्रत्येक स्कूलों के भवन आदि के मरम्मत के लिए निर्गत किया जा चुका है। इयतना सब होने के बाद भी परिषदीय स्कूलों की व्यवस्था सुधारने का नाम नहीं ले रही है| ऐसे मे कैसे पढ़ेगा इंडिया, कैसे बढ़ेगा इंडिया।
by Shivnandan Sahu

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