हिन्दू- मुस्लिम एकता की मिसाल है यह कस्बा, बारावफात के जुलूस में दिखा साम्प्रदायिक सौहार्द

जुलूस में एक भी डीजे, लाउडस्पीकर और तेज़ आवाज़ करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया।

कौशाम्बी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के भी आदेश का पालन करते हुए कौशाम्बी जिले के दारानगर गांव में जुलूसे मोहम्मदी बरामद किया गया। बिना साउंड व लाउडस्पीकर के मजहबी झंडे के साथ निकले जुलूस में हिन्दू-मुस्लिम एकता की झलक दिखाई दिया। जुलूस में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल रहे। साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम करने वाले दारानगर कस्बे में सभी मुख्य स्थानों से गुजरता हुवा जुलूसे मोहम्मदी अपने पुराने इलाकों में ले जाया गया।

जुलूस में एक भी डीजे, लाउडस्पीकर और तेज़ आवाज़ करने वाले उपकरणों का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं किया गया। हैंड माइक से नात व कसीदा पढ़ते हुए लोगों ने कौम के लोगों को हुजूर की आमद की मुबारकबाद दी। मौलानाओं ने कहा कि मुसलमान हमेशा से अन्याय और अत्याचार के खिलाफ रहे हैं। इस्लाम माफ करने का दीन है। बारावफात के जुलूस में दारानगर कस्बे के तमाम हिन्दू शामिल हुए। हिंदुओं के मुहल्ले में जुलूस पहुंच तो लोगों ने खुले दिल से इस्तक़बाल किया।

मौलाना अख्तर सुब्हानी कादरी ने बताया कि दारानगर कस्बे में हिन्दू-मुस्लिम आपस मे मिलकर आपसी भाईचारे को कायम रखते हुए हमेशा से त्योहार मनाते चले आ रहे है। दशहरा हो या मुहर्रम या फिर कोई और त्योहार दोनों कौम के लोग आपस मे मिलकर त्योहार मनाते चले आ रहे हैं।

BY- SHIV NANDAN SAHU

Akhilesh Tripathi
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