बच्ची के शव को 10 किलोमीटर तक कंधे पर ले गया मामा, पैसे देने से इनकार करने पर नहीं मिला था एंबुलेंस

 बच्ची के शव को 10 किलोमीटर तक कंधे पर ले गया मामा, पैसे देने से इनकार करने पर नहीं मिला था एंबुलेंस
Dead body on bicycle

बच्ची की मौत के बाद सरकारी शव वाहन चालक पर रुपए मांगने का आरोप, डीएम के निर्देश पर डॉक्टर व शव वाहन चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज

कौशाम्बी. ओडिशा में एंबुलेंस नहीं लेने पर जब कंधे पर पत्नी का शव लेकर अस्पताल से लौटते दाना मांझी की तस्वीर सामने आई थी, तो उस पूरी घटना ने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया था। अस्पताल प्रशासन के रवैये को लेकर कई सवाल भी उठे थे, कहा यह भी जा रहा था कि ऐसी घटना दुहराई ना जाये इसको लेकर सख्त कदम उठाये जायेंगे। मगर इन घटनाओं के बाद भी भारत के सरकारी अस्पतालों का रवैया बदलने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कौशांबी जिला अस्पताल का है, जहां अस्पताल प्रशासन की करतूत के कारण एक मामा को अपनी भांजी की लाश को साईकिल से कंधे पर रख कर 10 किलोमीटर ले जाना पड़ा। वहीं अस्पताल प्रशासन इस पूरे मामले से कन्नी काटता नजर आ रहा है।



सिराथू तहसील के मलाक सददी गांव का रहने वाला अनंत कुमार मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालता है। कुछ दिनों से उसकी 7 माह की बेटी पूनम की तबीयत खराब थी, पूनम को उल्टी- दस्त की शिकायत थी। अनंत अपने साले बृजमोहन को बेटी की देखरेख करने के लिए छोड़ मजदूरी करने इलाहाबाद चला गया। इस बीच सोमवार को पूनम की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ी तो मामा बृजमोहन बहन बीजिया के साथ उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचा। बृजमोहन के अनुसार उसने इमरजेंसी मे मौजूद डॉक्टर से बच्ची का उपचार करने को कहा तो उसे पर्ची बनवाने के लिए भेज दिया गया। वह जब तक पर्ची बनवाकर लौटा तब तक बच्ची की मौत हो गई। वहीं मृतक बच्ची की मां बीजिया की माने तो जिला अस्पताल में उससे शव वाहन के चालक ने कुछ रुपये की मांग की जिसे वह पूरा नहीं कर सकी, जिसके बाद मजबूरन बच्ची के शव को लेकर अपने भाई के साथ साइकिल से घर लौटना पड़ा।


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वहीं जिला अस्पताल के आरोपी डॉक्टर का कहना है कि अस्पताल पहुंचने से पहले बच्ची की मौत हो गई थी। उन्होंने परिजनों से शव वाहन की सुविधा लेने के लिए कहा था, लेकिन वाहन आने से पहले ही वह बच्ची के शव को लेकर चले गए। सीएमएस का कहना है कि शव वाहन पहुंचने से पहले परिजन बच्ची का शव लेकर चले गए थे, हालांकि वह मामले की जांच कराएंगे। वहीं इस पूरे मामले मे जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने संज्ञान मे लेते हुये ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर व शव वाहन चालक के खिलाफ मुक़दमा दर्ज करवा जांच शुरू करा दिया है। 





यह बात जब सुर्खियों में आई तो जिला अस्पताल के साथ स्वास्थ्य महकमे व जिला प्रशासन मे हड़कंप मच गया। इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात डाक्टर विवेक केसरवानी का कहना है कि बच्ची को जब उन्होने अस्पताल देखा था तो मृत अवस्था में थी। उन्होंने परिजनों से शव वाहन की सुविधा लेने के लिए खुद ही कहा था। वहीं जिला अस्पताल के सीएमएस दीपक सेठ भी सफाई देते हुये कहते है कि शव वाहन के चालक से परिजनों के बीच कुछ बात हुई थी, फिर भी परिजन बच्ची का शव साईकिल से किन परिस्थितियों मे लेकर गए इस बात की जांच कराई जा रही है।

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