शिवनंदन साहू...

कौशाम्बी. प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या के गृह जनपद कौशाम्बी में केंद्र सरकार के "सर्व शिक्षा अभियान" को क्रियान्वित करने में घोर लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले के सिराथू ब्लॉक के भगौतापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय के 75 नौनिहालों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूल का अधूरा भवन सर्व शिक्षा अभियान को मुंह चिढ़ा रहा है। इसके चलते बच्चे खुले आसमान के नीचे क, ख, ग, घ सीखने को मजबूर हैं। अधूरे स्कूल परिसर में पेयजल, बिजली और शौचालय समेत दूसरी सभी सुविधाएं नदारद हैं। स्कूल तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग भी नहीं। बच्चे पगडंडी के सहारे जैसे तैसे स्कूल पहुंचते हैं। बड़ी बात ये है कि इतनी बड़ी अव्यवस्था के बाद भी अफसर बेखबर हैं। साफ जाहिर है कि जिला व ब्लॉक मुख्यालयों मे बैठे विभागीय अधिकारी गांव के स्कूलों तक पहुंचते ही नहीं। स्कूल मे तैनात एक अध्यापक को तो महीनों से बच्चों ने देखा तक नहीं| जबकि महिला शिक्षा मित्र अवकाश पर चल रही हैं। सीएम के गृह जनपद के इस स्कूल का हाल देखकर तो बरबस ही एक ही सवाल दिमाग मे कौंधता है ऐसे कैसे पढ़ेगा, बढ़ेगा इंडिया।

 

सिराथू ब्लॉक के कैनी गांव का माजरा है भगौतपुर गांव। यहां पर सर्व शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2013-14 मे स्कूल का निर्माण शूरु हुआ। चार साल बीत गया लेकिन स्कूल अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ। हैरत की बात तो यह कि स्कूल बनकर तैयार नहीं हुआ और शिक्षकों की तैनाती कर पठन-पाठन कार्य शुरू हो गया। स्कूल भवन मे अभी तक ठीक से न तो दरवाजे लगे हैं और न ही खिड़की। कमरों का फर्श भी अब तक कच्चा है। स्कूल के भवन में दरार आ गई है। कच्चे फर्श में जलभराव रहता है।

 

परिसर में लगा हैंडपम्प का आधा हिस्सा जमीन में धंस चुका है। बिजली, पानी की व्यवस्था भी नहीं। शौचालय का भी निर्माण नहीं कराया गया है। खेतों के बीच बने इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए सम्पर्क मार्ग भी नहीं बनवाया गया है। इन सारी अव्यवस्थाओं के बावजूद इंचार्ज अध्यापक रामप्रकाश, सहायक अध्यापक ओमकृष्ण पांडेय, शिक्षामित्र आशा देवी समेत तीन लोगों को तैनात कर दिया गया। इंचार्ज अध्यापक ने बताया कि स्कूल में एक से लेकर पांच तक कुल 75 बच्चे पंजीकृत हैं। सुविधाओं के अभाव में बच्चों को स्कूल से दूर खुले आसमान के नीचे खेतों में बैठकर पठन-पाठन कराया जा रहा है।

 

भगौतापुर प्राथमिक स्कूल मे पढ़ने वाले बच्चों को मिड डे मील के तहत मिलने वाला दोपहर का भोजन पूरे दो साल से नहीं मिलता यहां पढ़ने वाले छात्र/छ्त्राओ का कहना है कि उन्हे पानी पीने के लिए वापस गांव जाना पड़ता है। स्कूल टाइम मे शौचालय के लिए खेतों का ही सहारा लेना पड़ता है। भगौतापुर स्कूल परिसर में शौचालय का निर्माण नहीं करवाया गया। ऐसे में नौनिहाल खुले में शौच जाने को मजबूर हो रहे हैं। यहां पढ़ने वाले छात्रों के क्लास स्कूल के बाहर पीपल के पेड़ के नीचे लगती है। एक ही अध्यापक होने से सभी क्लास के बच्चे एक साथ बैठते हैं।


गांव के प्राथमिक स्कूल मे सुविधाओं के अभाव की वजह से अधिकतर अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते ही नहीं। कईयों ने तो कुछ दिन भेजने के बाद नाम ही कटवा लिया है। इस स्कूल मे वही लोग अपने बच्चों को पढ़ा रहे है जो किसी दूसरे स्कूल मे नहीं पढ़ा पा रहे है। स्कूल मे बैठने के लिए बच्चो को छोड़िए अध्यापको के लिए भी कोई व्यवस्था नहीं। गांव के लोग अध्यापकों के बैठने के लिए कुर्सी की व्यवस्था करते हैं।

 

स्कूल का हाजिरी रजिस्टर व दूसरा सामान भी गांव मे किसी के घर रखा जाता है। सबसे अहम बात तो यह कि बारिश के दिनों मे छात्रों की कक्षाएं किसी न किसी ग्रामीण के घर पर लगती है। सर्व शिक्षा अभियान का मखौल उड़ाने वाले इस प्रकरण पर जब बेसिक शिक्षा अधिकारी महाराज स्वामी से सवाल किया गया तो वह भी चौंक गए। बीएसए ने तो साफ कह दिया कि उन्हें जानकारी ही नहीं है कि उनके जिले मे ऐसा कोई प्राथमिक स्कूल भी है। हालांकि उन्होंने स्कूल से जुड़ी सभी कमियों की जांच करने की बात जरूर कही।

 

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