डिप्टी सीएम केशव मौर्या के ससुराल में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली के लिए तरस रहे लोग

 डिप्टी सीएम केशव मौर्या के ससुराल में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली के लिए तरस रहे लोग
electricity crisis

विद्युतिकरण योजना में भी गांव का नाम नहीं हो सका शामिल, सास व ग्रामीणों को उम्मीद अब गांव में जरूर आएगी बिजली

कौशांबी. दामाद हमार डिप्टी सीएम..फिर भी हमरे घर में अंधेरा है। ऐसे ही शब्द निकलते हैं प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ससुराल के बाशिंदों के मुंह से।  कौशांबी के सिराथू विधानसभा में खूझा गांव में डिप्टी सीएम केशव मौर्या का ससुराल है।  इस गांव में आजादी के 70 साल बीत जाने के बाद भी अंधेरा ही अंधेरा है। कई सरकारें आई और चली गई।  भाजपा सरकार ने भले ही पंडित दीनदयाल ग्रामीण ज्योति योजना के तहत गांव गांव बिजली पहुंचाने का सख्त फरमान विद्युत विभाग को सुनाया हो, लेकिन केशव मौर्य के ससुरालियों की बदनसीबी तो देखिए विद्युत विभाग की तरफ से विधुतीकरण की जारी सूची में भी खूझा गांव का नाम नही शामिल है। खूझा गांव लोगो को बड़ी उम्मीदें थी कि इस गांव का दामाद केशव मौर्य प्रदेश का डिप्टी सीएम है, अब उनके गांव में बिजली के साथ-साथ विकास की वो तमाम राह भी खुल जायेगी लेकिन ससुरालियों की यह उम्मीदें महज एक सपना ही साबित हो रही है।




आधुनिक युग मे बदहाली का दंश झेल रहा खूझा गांव के लोग शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही पीछे है। गांव के बच्चे ढ़िबरी के सहारे पढ़ाई लिखाई तो जरूर करते है, पर उनके भविष्य पर बिजली की कमी के रूप मे अंधेरा कुंडली मार कर बैठा है। विकास की राह में कोसो दूर खूझा गांव के लोगो के लिए बिजली की कमी कितना सताती है। इस भीषण गर्मी में लोगों का बुरा हाल है। नव विवाहिता रिंकी का कहना है कि बिना बिजली मायके से उपहार मे मिला टीवी फ़्रिज कूलर आदि आधुनिक समान कूड़े के समान एक कोने में पड़े है।


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खूजा गांव के महेश की माने तो उन्हे तब भी यही उम्मीदें जागी थी जब केशव ने 2012 में सिराथू से विधायक बने थे, 2014 में वो फूलपुर संसदीय सीट से टिकट पाये और सांसद बन गए। हालांकि दो साल की विधायकी के बीच मे केशव विधायक रहते हुए भी अपने ससुरालियों को बिजली नही दिला सके। जब केशव प्रदेश के डिप्टी सीएम बन गए तो उनके ससुरालियों में फिर से दूसरी बार उम्मीदों की आस जाग पड़ी थी लेकिन तीन महीने बीतने को है आज भी बिजली नही नसीब हुई। गांव की शांति देवी बताती है कि खूझा गांव में बहन बेटियो की शादी भी बमुश्किल में होती है। गांव में जिन लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक है वो तो दूसरी जगहों के गेस्ट हाउस से शादी विवाह करते है और जो गरीब तबके के लोग है उनके बहन बेटियों की डोली आज भी पेट्रो मैक्स यानी कि गैस की रोशनी में उठती है।




 केशव मौर्य की सास राम दुलारी को उम्मीद है कि अब गांव मे बिजली जरूर आएगी। सबसे अहम बात यह है कि बिजली विभाग के अधिशाषी अभियंता प्रभाकर पांडेय को इस बात की जानकारी ही नहीं कि केशव प्रसाद मौर्य की ससुराल में बिजली न पहुंचने से अभी भी अंधेरा है। 




 देश और प्रदेश में कई सियासी उठा पटक के बाद भी खूझा गांव की ये बदहाल तस्वीरें समय की करवट को कोस रही है। गांव के लोगों को इस बात का आज भी मलाल है कि प्रशानिक अफसरों ने भी इस गांव की तरफ नजरें उठाकर नही देखा। इतना ही नहीं उनकी नुमाइंदी करने वाले राज नेताओं ने भी इस ओर अपनी दिलचस्पी नही दिखाई। समय की आधुनिकता के साथ बदली ये बदरंग तस्वीरे अब गांव के दामाद केशव प्रसाद मौर्या के साथ साथ योगी सरकार से भी गांव को रौशन किये जाने की टक टकी लगाए है।

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