डिप्टी सीएम के गृह जनपद में ताक पर कानून, ओवरलोड डंफर नियमों की उड़ा रहे धज्जी

 डिप्टी सीएम के गृह जनपद में ताक पर कानून, ओवरलोड डंफर नियमों की उड़ा रहे धज्जी
Overload vehicle

सड़क निर्माण मे लगे डंफर व दूसरे वाहन नियमों को ताक पर रख जमकर कर रहे ओवरलोडिंग

कौशांबी. सूबे के डिप्टी सीएम व लोक निर्माण विभाग मंत्री केशव प्रसाद मौर्या के गृह जनपद मे हो रहे सड़क निर्माण से जुड़े कामों में सरेआम नियम कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिले के सिराथू से लेहदरी तक लगभग 39 करोड़ रुपये मे हो रहे सड़क निर्माण मे लगे डंफर व दूसरे वाहन नियमों को ताक पर रख जमकर ओवरलोडिंग कर रहे हैं। सफ़ेद गिट्टी हो या तारकोल से मिली काली गिट्टी सभी तरह की गिट्टियों को ओवरलोडिंग कर कार्य स्थल पर पहुंचाया जा रहा है।



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गिट्टी ढोने वाले डंफर चालक की माने तो एक खेप मे वह चालीस टन माल लेकर जाते हैं, कार्य स्थल पर मौजूद कर्मचारियों की माने तो 20 से 22 टन गिट्टी डंफर मे रहता है और तो और डंफर मे 20 से 22 टन गिट्टी लादे जाने की सच्चाई को स्वीकार करने वाले लोक निर्माण विभाग के ए ई (असिस्टेंट इंजीनियर) कहते हैं कि अभी तो सड़क बनी ही नहीं जब बन जाएगी, तब ओवरलोडिंग सिस्टम उन पर लागू होगा। 

कौशांबी में पीडब्लूडी मंत्री केशव मौर्या के जन्मस्थली सिराथू से लेहदरी गंगा पुल तक हो रहे सड़क निर्माण मे यह ओवर लोड डंफर लगे हुये हैं। दिन हो या रात बेखौफ होकर यह ओवरलोड डंफर सड़कों पर फर्राटा भरते रहते हैं। एक दो टन ओवरलोड गाड़ियों का फौरन चालान करने वाले एआरटीओ की नजर इन पर नहीं पड़ रही है। सैनी कोतवाली के सामने से दिन-रात गुजरने वाले इन ओवरलोड डंफ़रो पर पुलिस की पैनी निगाह भी नहीं पड़ रही है।




यह हाल प्रदेश के डिप्टी सीएम व लोक निर्माण मंत्री केशव प्रसाद मौर्या के गृह जनपद कौशांबी का है। यहां पर पीडब्लूडी विभाग को छोड़ किसी दूसरे विभाग या फिर आम गाड़ियों को ओवरलोड करना जुर्म माना गया है। एआरटीओ कौशांबी दिन-रात सड़कों पर दौड़ भाग कर ओवर लोड वाहनों का चालान करते हैं। कौशांबी एआरटीओ का प्रति महीने राजस्व वसूली का रिकार्ड भी यही बताता है। कौशांबी का एआरटीओ विभाग राजस्व वसूली के मामले मे प्रदेश मे पिछले कई महीनों से पहला स्थान हासिल किए हुये है, यह बात और है कि पीडब्लूडी विभाग के ओवरलोड डंफर एआरटीओ अधिकारी को दिखाई नहीं देते हैं या फिर देख कर भी अनदेखा करना इनकी कोई मजबूरी है। इस मामले मे जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा से भी बात करने की कोशिश की गई लेकिन उन्होने बिना जवाब दिये बात को टाल दिया।
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