डिप्टी सीएम केशव मौर्य के जिले में सरकारी धान खरीद केन्द्रों पर सौतेला व्यवहार

Rafatuddin Faridi

Publish: Dec, 07 2017 10:25:27 (IST) | Updated: Dec, 07 2017 10:25:28 (IST)

Kaushambi, Uttar Pradesh, India

कौशाम्बी. सरकारी धान खरीद केंद्रों पर किसानों के साथ सौतेला व्यवहार धान तौल के नाम पर की कर्मचारी करते है मनमानी शिकायत बेअसर है। महीने भर में लक्ष्य का बीस प्रतिशत ही खरीद हुई है। जिले के विभिन्न धान खरीद केंद्रों पर किसानों के साथ सौतेला व्यवहार किये जाने का आरोप लगाया गया है। धान लेकर केंद्र तक पहुंचने वाले अधिकांश किसानों को निराश ही लौटना पड़ता है।

कहने को तो जिले के विभिन्न धान क्रय केंद्रों पर पांच प्रजातियों के धान की खरीद होती है, लेकिन किसी तरह मान-मनौव्वल करके ही कुछ किसान अपनी एक प्रजाति की उपज क्रय केंद्रों पर बेंच पा रहे हैं। इसमें भी तमाम किसानों को कई कई दिन तौल के लिए इंतजार करना पड़ता है। कई ऐसे धान क्रय केंद्र भी है जहां के प्रभारी पूरा पूरा दिन गायब रहते हैं, ऐसे केंद्रों को प्राइवेट कर्मचारी मनमानी तरीके से सचलित कर रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्र की मनमानी से परेशान होकर किसान सस्ते दामों पर अपने धान को बाजार मे बेंचने को मजबूर हैं।

किसान एक ओर अपनी धान की उपज को बेचने के लिए सरकारी क्रय केंद्रों के मनमानी का शिकार हो रहे हैं वही जिले के आलाधिकारी अपने कर्मचारियों की पीठ थपथपा रहे हैं। जिले मे धान की कम खरीद होता देख शासन ने अपना लक्ष्य भी 40 प्रतिशत तक कम कर दिया है। इसके बाद भी अभी तक धान की खरीद लक्ष्य से काफी दूर है। धान की उपज करने वाले किसानों को बेहतर लाभ देने के लिए शासन की मंशानुरूप जिला प्रशासन ने जिले के विभिन्न स्थानों पर 46 क्रय केंद्र खोला है। इन क्रय केंद्रों मे धान की खरीद का जिम्मा पी सी एफ, यूपी एग्रो, कर्मचारी कल्याण निगम, भारतीय खाद्य निगम, एफसीआई समेत नौ संस्थाओं को सौपा गया है।

जिले के किसानों का आरोप है कि अधिकांश क्रय केंद्रों पर उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। किसान अपने धान का सेंपल लेकर क्रय केंद्र पर जाते हैं, जांच के बाद अधिकांश किसानों के सेंपुल ख़ारिज कर दिये जाते हैं। हजारों किसानों ने हाईब्रीड धान की इस साल जमकर बुवाई किया था। बेहतर उपज होने के बाद सरकारी क्रय केंद्रों मे तौल नहीं हो रही है। क्रय केंद्रों पर सिर्फ पांच प्रजाति के धान खरीदने की बात कही जा रही है, इसमे भी जिले मे सिर्फ टाटा मंसूरी धान की बेहतर क्वालिटी को ही खरीदा जा रहा है।

सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1550-1590 रुपया प्रति कुंतल रखा है। जबकि बाजार में यही धान हजार से लेकर ग्यारह सौ रुपया प्रति कुंतल बिकता है। किसानों का कहना है कि धान क्रय केंद्रों पर उनके साथ वहां के कर्मचारी बेहद ही गलत व्यवहार करते हैं। किसानों के साथ ही धान खरीद मे लगे कई कर्मचारी दूसरे संस्थान के कर्मचारियों पर खुला आरोप लगा रहे हैं कि सब कुछ सेटिंग से हो रहा है। कौशांबी जिले मे शासन ने पहले धान खरीद का लक्ष्य 72 हजार मैट्रिक टन रखा था लेकिन महीने भर मे खरीददारी बहुत कम होने से अब इस लक्ष्य को घटा कर 47 हजार मैट्रिक टन कर दिया गया है।

जिलाधिकारी मनीष कुमार की माने तो अबतक जिले के विभिन्न धान क्रय केंद्रों से लगभग 20 प्रतिशत धान की खरीद की जा चुकी है। डीएम को उम्मीद है कि दिसंबर महीने में धान की इतनी खरीद हो जाएगी कि वह लक्ष्य के काफी करीब पहुंच जायेंगे। एक नवम्बर से शुरू हुई धान की खरीद 28 फरवरी तक चलेगी। जिलाधिकारी का दावा है कि सभी क्रय केंद्रों पर पारदर्शिता बरती जा रही है। हाईब्रीड धान को लेकर किसानों की समस्या संबंधी समस्या को जिलाधिकारी जल्द दूर करने की भी बात कह रहे हैं।

प्रदेश की योगी व केंद्र की मोदी सरकार भले ही खुद को किसान हितैषी बताती फिरती है लेकिन जिस तरह से धान की फसल उगाने वाले किसान दर दर की ठोकरे खा रहे है उससे तो सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगता दिखाई दे रहा है। धान क्रय केंद्रों पर किसानों के साथ अभद्रता की जा रही है। किसान अधिकारियों से शिकायत तो करते है लेकिन कार्यवाही के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जाती है। जिस तरह से किसानों का धान खरीदने मे क्रय केंद्र मनमानी कर रहे हैं उससे लक्ष्य को पाने मे सफलता हाथ लगेगी कहना जरा मुश्किल है।
by Shivnandan Sahu

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