यूपी पुलिस पर हबीब खां का खौफ, मौत के बाद भी की यह कार्रवाई

 यूपी पुलिस पर हबीब खां का खौफ, मौत के बाद भी की यह कार्रवाई
Habib khan

सात महीने पहले मर चुके शख्स से पुलिस को है शांति भंग का खतरा

कौशांबी. यूपी पुलिस की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है।  विधानसभा चुनाव के दौरान मुर्दे से शांति भंग का ख़तरा रखने वाली जिले की सराय अकिल थाने की पुलिस ने इस बार फिर से अपनी गलतियों को दोहराया है। सराय अकिल पुलिस ने इस बार मृतक के खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की है। मजिस्ट्रेट की नोटिस जब परिजनों को मिला तो वो भी हैरान और परेशान रह गए। वहीं जब इस संबंध में मीडिया के सवालों से पुलिस के आला अधिकारियों से सवाल किया, तो वह सवालों के जवाब देने से बचते नजर आये।


मामला सराय अकिल थाना इलाके के पठन पुरवा गांव का है। सराय अकिल थाने के इंचार्ज अनिल कुमार सिंह ने जिस व्यक्ति के खिलाफ 110-त्र (गुंडा एक्ट) की चालानी रिपोर्ट चायल तहसील के उपजिला मजिस्ट्रेट को भेजा है, उस शख्स की जनवरी माह में मौत हो चुकी है। जून माह में मृतक हबीब खां के भाई वकील खां से और पड़ोसी के बीच जमीनी विवाद को लेकर मारपीट हुई थी। जिस मामले में मृतक हबीब खां को छोड़कर एक पक्ष के तहरीर पर पुलिस ने परिवार के चार सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।


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थानेदार साहब ने परिवार के तीन सदस्यों के साथ-साथ मृतक हबीब खां के खिलाफ भी अपनी रिपोर्ट में शांति भंग का बड़ा खतरा जाहिर किया है। चालानी रिपोर्ट के मुताबिक खानपुर के मजरा पठन पुरवा गांव के हबीब खां एक शातिर अपराधी है। हबीब खां का समाज मे इतना भय है कि कोई भी व्यक्ति इसके खिलाफ गवाही आदि देने का साहस नही करता है। हबीब खां का शोहरत-आम अत्यधिक खराब है। जनहित में हबीब खाँ का स्वतंत्र घूमना शांति व्यवस्था को पूरी तरह भंग कर सकता है।






चायल तहसील के उपजिला मजिस्ट्रेट अश्विनी कुमार श्रीवत्सव ने सरांय अकिल थाने के इंचार्ज अनिल कुमार सिंह की गुंडा एक्ट के तहत भेजी गई चालानी रिपोर्ट पर सभी अभियुक्तों के खिलाफ तामिला नोटिस जारी कर दिया। मजिस्ट्रेट का तामिला नोटिस जब परिजनों को मिली तो भी सन्न रह गए। परिजन भी यही सोच में पड़ गए कि जब हबीब खां छह माह पहले दुनिया से रुख्सत हो चुका तो पुलिस ने उस पर गुंडा एक्ट की कार्रवाई क्यों की।


इस दौरान नोटिस रिसीव कराने पहुंचे पुलिस कर्मियों को जब इस बात का पता चला कि एक अभियुक्त यानि हबीब खां सात माह पहले इस दुनिया से ही चला गया तो वो उल्टे पांव थाने लौट गई। परिजन अगले दिन हबीब खां का मृत प्रमाणपत्र लेकर उपजिला मजिस्ट्रेट के दफ्तर पहुंचे और प्रमाण के साथ अपनी बातें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया। कुछ क्षण के लिए मजिस्ट्रेट भी हैरान रह गए। हालांकि मजिस्ट्रेट ने पूरे मामले में थाना प्रभारी से तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।


वहीँ मामले में जब मीडिया ने पुलिस के जिम्मेदार अधिकारी से सवाल किया तो वो मुंह मोड़ लिए। ऐसे में अभी इस बात का आधिकारिक तौर पर यह जवाब आना बाकी है कि थाना इंचार्ज के पद पर बैठे साहब से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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