जिले के 5.82 लाख मतदाताओं को रिझाने 20 दिन का समय

राजनांदगांव लोकसभा सीट अंतर्गत दो जिले के आठ विधानसभा मौजूद हैं। कबीरधाम में ही दो विधानसभा अंतर्गत पांच लाख 82 हजार से अधिक मतदाता है।

By: Yashwant Jhariya

Published: 29 Mar 2019, 01:03 PM IST

कवर्धा . राजनांदगांव लोकसभा सीट के लिए द्वंद शुरू हो चुका है। वहीं नामांकन के बाद प्रत्याशियों का प्रचार-प्रसार शुरू हो चुका है। लेकिन इस बार प्रचार आसान नहीं है, मतदाताओं की संख्या में बढ़ चुकी है, जबकि मतदान को गिनती के दिन ही बचे हैं।
राजनांदगांव लोकसभा सीट अंतर्गत दो जिले के आठ विधानसभा मौजूद हैं। कबीरधाम में ही दो विधानसभा अंतर्गत पांच लाख 82 हजार से अधिक मतदाता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जिले से तीन लाख 81 हजार 935 मतदाताओं ने मतदान किए थे। वहीं वर्ष 2014 के मुकाबले 2019 में कवर्धा शहर की जनसंख्या के बराबर दोनों विधानसभा में मतदाता बढ़ चुके हैं। मतलब ४६ हजार से अधिक मतदाता पांच साल में बढ़े। वहीं गांवों की बात करें तो ९९८ बसाहट गांव हैं। जबकि अब प्रत्याशियों के बाद केवल २० दिन का ही समय बचा है।

एक ही विस में पौने तीन लाख मतदाता
यदि ३५ साल पूर्व चुनाव की बात करें तो वर्ष १९८४ में राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र में कुल छह लाख २५ हजार मतदाता थे, जबकि मतदान तीन लाख ५२ हजार से अधिक मतदाताओं ने किया। वहीं सबसे अधिक वोट कांग्रेस के शिवेन्द्र बाहदुर को एक लाख ६५ हजार ८९१ मिले। जबकि आज की स्थिति में एक विधानसभा में ही मतदाताओं की संख्या पौने तीन लाख है।

दोनों पार्टी के सामने चुनौती
वर्ष २०१४ में राजनांदगांव लोकसभा अंतर्गत ७४.०४ प्रतिशत वोटिंग हुई थी। लोकसभा ंअंतर्गत १५ लाख ९१ हजार ३७३ मतदाताओं में से ११ लाख ७८ हजार २९६ ले मतदान किए थे। इसमें भाजपा के अभिषेक सिंह को छह लाख ४३ हजार ४७३ और कांग्रेस के कमलेश्वर वर्मा को चार लाख ७५६२ मत मिले थे। अब दोनों ही पार्टियों के लिए चुनौती है कि एक अंतर मिटाए और दूसरा उस अंतद को बरकरार रखे।

56 अतिसंवेदनशील मतदान केन्द्र
लोकसभा में चुनाव प्रचार को लेकर काफी बड़ी चुनौती है, क्योंकि जिला माओवादी प्रभावित हो चुका है। जिले के ८०२ मतदान केंद्रों में से १०२ माओवादी संवेदनशील केंद्र हैं। इसमें ५६ अतिसंवेदशनील और ४६ संवेदनशील मतदान केंद्र हैं। मुख्य रूप कवर्धा विधानसभा के ८४ गांव इससे प्रभावित हो चुके हैं। ऐसे में वनांचल गांवों में प्रचार काफी मुश्किल है।

Yashwant Jhariya Bureau Incharge
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