पांच सालों में नहीं बदली जा सकी शहर की सूरत, विकास कार्यों में पीछे रहा कवर्धा

आगामी माह से पालिका प्रशासन में नई सरकार की तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे में फिर से नई उम्मीदें रहेंगी जो इस पंच वर्षीय में नहीं हो सके।

By: Bhawna Chaudhary

Published: 27 Nov 2019, 10:23 PM IST

कवर्धा . शहर मेंं विकास का खाका नगरीय निकाय द्वारा खींचा जाता है। शहरवासियों को उम्मीद रहती है कि जिस अध्यक्ष और पार्षदों से उम्मीद कर उन्हें कुर्सी पर बैठाया वह उनके नगर के लिए बेहतर कार्य करेंगे। ऐसी ही उम्मीद कवर्धावासियों द्वारा लगाया गया, जो पूरा नहीं हो सका। आगामी माह से पालिका प्रशासन में नई सरकार की तैयारी शुरू हो चुकी है। ऐसे में फिर से नई उम्मीदें रहेंगी जो इस पंच वर्षीय में नहीं हो सके।

कवर्धा शहर में आज भी विकास की कमी सडक़ों पर गड्ढे, सडक़ पर लगते बाजार, अव्यवस्थित पार्किंग, अव्यवस्थित दुकानों के रूप में दिखाई देती है। वहीं महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट जो शहर की स्थिति को बेहतर बयां करते उस पर भी काम नहीं हो सके। जबकि नगर पालिका में हर साल करोड़ रुपए के बजट बनाए जाते हैं। वर्ष 2015-16 से 2019-20 तक पांच साल में नगर पालिका परिषद में 22958.36 लाख रुपए का बजट प्रस्तुत किया जा चुका है। इस प्रस्तावति बजट के अनुसार साल दर साल बेतहाशा राशि खर्च किए गए, बड़ी संख्या में कार्य भी हुए, लेकिन शहर की दशा सुधारने वाले कई महत्वपूर्ण योजनाएं फाइलों में वर्षों से दबे ही रह गए। शासन से हरी झंडी नहीं मिलने या अधूरी कार्ययोजना के चलते अटके पड़े हैं।

35 करोड़ के प्रोजेक्ट अधूरे
नगर पालिका अंतर्गत कवर्धा शहर में 35 करोड़ से अधिक राशि की योजनाएं अब भी केवल प्रस्ताव और फाइलों तक ही सीमित है। यह सभी योजनाएं आम जनता के हित में है। इनमें बैंकिंग काम्प्लेक्स, पार्किंग स्थल, बुजुर्गों के लिए सर्वसुविधायुक्त डे-केयर सेंटर, गोकुल नगर और पालिका बाजार जैसी कई योजनाएं हैं। वर्षों से यह योजनाएं इसलिए अधूरी पड़ी है।

इनसे भी नहीं मिला छुटकारा
पांच वर्ष का कार्यकाल अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष और पार्षदों के लिए काफी रहता है। इस दौरान वह चाहे तो शहरवासियों के लिए ऐसे बेहतर कार्य कर सकते हैं जिससे कई दशक तक उन्हें याद किया जा सके। याद तो कवर्धा पालिका में फिलहाल मौजूद अध्यक्ष और पार्षदों को भी किया जाएगा, लेकिन गंदा पानी और बदहाल सडक़ के लिए। यह ऐसी समस्या रही जिससे रोजाना ही हजारों बच्चे, महिला बुजुर्ग मतलब सभी वर्ग परेशान रहें। बावजूद इस दिशा में पालिका के जनप्रतिनिधियों में बेहतर प्रयास नहीं किए। ऐसे में यह जनप्रतिनिधि फिर से शहरवासियों से उम्मीद जगाएं हुए हैं उन्हें फिर से मौका दिया जाएगा।

Bhawna Chaudhary
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