काउंडाउन खत्म: कल मतदान, मतदाताओं को रिझाने घर-घर दे रहे दस्तक

काउंडाउन खत्म: कल मतदान, मतदाताओं को रिझाने घर-घर दे रहे दस्तक

Yashwant Kumar Jhariya | Publish: Apr, 17 2019 11:35:44 AM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 11:35:45 AM (IST) Kawardha, Kabirdham, Chhattisgarh, India

अब प्रत्याशी और पार्टी कार्यकर्ता बिना शोरगुल ही मतदाताओं से मुलाकात कर रहे हैं। मंगलवार की शाम कांग्रेस के ओर से मंत्री मोहम्मद अकबर भी कवर्धा शहर में दिखाई दिए। अलग-अलग मोहल्लों में डोर टू डोर लोगों से मुलाकात किए और पार्टी के घोषणा पत्र को सामने रखा।

कवर्धा . लोकसभा चुनाव में बिना स्टार प्रचारक ही स्थानीय नेताओं के सहारे चुनावी शोरगुल मंगलवार की शाम थम गया। इसके पूर्व तक छोटी-छोटी सभाओं के माध्यम से राजनीतिक पार्टियों का प्रचार चलता रहा।
राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र के लिए 18 अप्रैल को मतदान होना है। इसके 48 घंटे पूर्व मतलब मंगलवार 16 अप्रैल की शाम 5 बजे से चुनावी शोरगुल थम गया। अब प्रत्याशी और पार्टी कार्यकर्ता बिना शोरगुल ही मतदाताओं से मुलाकात कर रहे हैं। मंगलवार की शाम कांग्रेस के ओर से मंत्री मोहम्मद अकबर भी कवर्धा शहर में दिखाई दिए। अलग-अलग मोहल्लों में डोर टू डोर लोगों से मुलाकात किए और पार्टी के घोषणा पत्र को सामने रखा। इसी तरह भाजपा प्रत्याशी संतोष पाण्डेय और सांसद अभिषेक सिंह शहर में प्रचार के लिए निकले। व्यापारी और समाज प्रमुख से मुलाकात किए। वहीं गली व मोहल्लों में डोर टू डोर मतदाताओं के पास पहुंचे।

शहर से लीड जुटाने की कोशिश
विधानसभा चुनाव के समय कवर्धा शहर से कम वोटिंग हुई। इसका खामियाजा भी पार्टी और प्रत्याशी को भुगतना पड़ा। लेकिन लोकसभा में मतदान कम न हो, वहीं प्रत्याशी को कवर्धा शहर से अधिक से अधिक लीड मिले इसके लिए कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टी के प्रत्याशी और उनके जिम्मेदार नेता जुटे हुए हैं। इसके चलते शहर में मंत्री व सांसद लगातार पहुंचते रहे।

कम दिखाई दिए भाजपा के नेता
विधानसभा चुनाव के समय भाजपा के प्रमुख पदाधिकारी प्रचार-प्रसार में जुटे थे, वह लोकसभा में प्रचार के फे्रम से गायब हैं। वहीं कुछ नेता केवल सांसद या फिर पूर्व मुख्यमंत्री कवर्धा आते हैं तभी दिखाई देते हैं। जबकि सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं को बराबर जिम्मेदारी मिली है, लेकिन वह काम करते दिखाई नहीं दे दिए। गिनती के पदाधिकारी काम कर रहे हैं।

कम रही कांग्रेस पदाधिकारी की रूचि
कांग्रेस के कुछ प्रमुख जिम्मेदारों की रूचि विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में दिखाई नहीं दिया। जब जिले के प्रभारी मंत्री शहर या गांव प्रचार के लिए पहुंचते तभी यह भी अचानक सक्रिय हो जाते हैं और उनके साथ निकलते है। इसका असर इनके साथी और कार्यकर्ताओं पर भी स्पष्ट दिखाई दिया। यह कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करते हैं।

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