सूखने लगे नदी-तालाब, निस्तारी के संकट से जूझ रहे जीव-जंतु

सूखने लगे नदी-तालाब, निस्तारी के संकट से जूझ रहे जीव-जंतु

Panch Ram Chandravanshi | Publish: Apr, 23 2019 11:30:51 AM (IST) Kawardha, Kabirdham, Chhattisgarh, India

तेज धूप व गर्मी के कारण शहर के बड़े मंदिर तालाब, भोजली तालाब, बावा तालाब, दर्री तालाब सहित कई अन्य तालाब में पानी आधे से भी कम हो गया है। हालात इतने बुरे हैं कि शहर की जीवनदायिनी कहलाने वाली एकमात्र संकरी नदी भी सूख चुकी है।

कवर्धा. शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र में निस्तारी के लिए कई ऐसे तालाब हैं, जो गर्मी के चलते सूखते जा रहे हैं। इन तालाबों में अब आधे से भी कम पानी रह गई है। मार्च के बाद अप्रैल भी समाप्त होने वाला है, लेकिन नगर पालिका प्रशासन ने अब तक बांध के पानी से तालाबों को रिचार्ज करने प्रक्रिया शुरू नहीं की है। तालाबों के सूखने से न सिर्फ शहरवासी बल्कि जीव-जंतु भी निस्तारी के संकट से जूझ रहे हैं।
अप्रैल माह के अंतिम दिनों में गर्मी ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सुबह से चलने वाली गर्म हवाएं देर शाम तक जारी है। धीरे-धीरे बढ़ती गर्मी से लोग बेचैनी महसूस करने लगे हैं। गर्मी का असर नदी, तालाब, कुओं जैसे जलस्त्रोतों पर भी पडऩे लगा है। तेज धूप व गर्मी के कारण शहर के बड़े मंदिर तालाब, भोजली तालाब, बावा तालाब, दर्री तालाब सहित कई अन्य तालाब में पानी आधे से भी कम हो गया है। हालात इतने बुरे हैं कि शहर की जीवनदायिनी कहलाने वाली एकमात्र संकरी नदी भी सूख चुकी है। तमाम कोशिशों के बाद भी इस नदी को नहीं बचाया जा सका है। चूंकि शहर में आज भी अधिकांश लोग निस्तारी के लिए इन प्राकृतिक जलस्त्रोतों पर ही आश्रित हैं। ऐसे में नदी-तालाबों के सूखने से गंभीर संकट मुंह खोलकर खड़े है। वहीं नगर पालिका प्रशासन द्वारा तालाबों को रिजार्च करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। यदि अनदेखी का दौर यूं ही चलता रहा, तो नदी-तालाब पूरी तरह से सूख जाएंगे।

चिंताजनक स्थिति
जिले के चार ब्लॉक मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में तालाबों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। नगर पंचायत बोड़ला और सहसपुर लोहारा में स्थित तालाब गर्मी के कारण सूखने की कगार पर पहुंच गई है। वहीं ग्रामीण ईलाकों के ज्यादातार तालाब सूख चुके हैं, जिन तालाब में पानी है व निस्तारी लायक नहीं है। तालाब में पानी कम कीचड़ ज्यादा है, जिसके चलते निस्तारी कर पाना संभव नहीं है। देखने में ये तालाब किसी डबरी की तरह मालूम होते हैं। संकट को भांपते हुए भी स्थानीय प्रशासन द्वारा तालाबों में पानी भरने कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। जबकि अब निस्तारी की समस्या होने लगी है।

पशु-पक्षी भी बेहाल
नगर स्थित तालाबों में पानी कम रहने से न सिर्फ इंसान बल्कि पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। गर्मियों में वे स्नान से लेकर पीने की व्यवस्था तक इन तालाबों पर निर्भर रहते हैं। तालाब और पोखरों की संख्या वैसे तो यहां कम ही है। आसपास गांवों में खोदे गए नए तालाबों में भी पानी के दर्शन दुर्लभ हैं। मवेशियों के सामने भीषण गर्मी पडऩे पर समस्या भी विकराल हो गई है।

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