व्यवसायिक बैंकों में किसानों का अब तक आधे-अधूरे कर्जमाफी

व्यवसायिक बैंकों में किसानों का अब तक आधे-अधूरे कर्जमाफी
Half-way debt relief

Panch Ram Chandravanshi | Publish: Jul, 20 2019 12:49:28 PM (IST) Kawardha, Kabirdham, Chhattisgarh, India

राष्ट्रीयकृत बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों को अलग-अलग बैंकों में २० से ४० प्रतिशत राशि ही कर्ज काफी के रुप में दी जा रही है। ऐसे में बचत राशि पटाने के लिए बैंक अधिकारी किसानों पर दबाव बना रहे हैं।

कवर्धा. जिला सहाकारी केन्द्रीय बैंक व छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के साथ ही व्यवसायिक बैंकों का कर्ज माफी की बात सुन किसान काफी उत्साहित थे, लेकिन बैंक पहुंचकर किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। क्योंकि कर्ज माफी प्रतिशत के रुप में दिया जा रहा है। वहीं किसानों को संतोषजनक जवाब भी नहीं मिल रहा है।
व्यवसायिक बैंकों से कर्ज लेने वाले किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार ने जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक व छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों का पूरा कर्ज माफ कर दिया है, लेकिन राष्ट्रीयकृत बैंक से कर्ज लेने वाले किसानों को अलग-अलग बैंकों में २० से ४० प्रतिशत राशि ही कर्ज काफी के रुप में दी जा रही है। ऐसे में बचत राशि पटाने के लिए बैंक अधिकारी किसानों पर दबाव बना रहे हैं। किसान कर्ज माफी को लेकर अश्वस्त थे। इसके चलते किसानों ने कर्ज का भुगतान नहीं किया था। अब सरकार के दोहरे मापदण्ड से किसान नाराज है। ग्राम गोपालभवना निवासी शत्रुहन चंद्रवंशी ने बताया कि उनका स्टेट बैंक में अल्पकालीन कृषि ऋण है। उनके केसीसी लिमिट ५० हजार रुपए है। दो माह पहले ही उसने ऋण चुका दिया है, लेकिन कर्जमाफी के रुप में २२९३५ रुपए ही आया है। यानि कर्जमाफी ५० प्रतिशत से भी कम हुआ है। किसान कर्जमाफी को छलावा बता रहे हैं।
काऊंटर बढ़ाने की मांग, अधिकारी ने नकारा
कई ऐसे भी थे जो केवल यह जाने के लिए बैंक पहुंच थे कि उनके खाते में कर्जमाफी का राशि आया है या नहीं। वहीं कई कर्ज चुनाने के लिए। लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। इस समस्या को देखते हुए किसानों ने बैंक मनेजर से अतिरिक्त काऊंटर लगाने की गुहार लगाई, लेकिन बैंक अधिकारी ने किसानों के मांगों को यह कहते हुए नकार दिया कि केसीसी एकाऊंट के काम को कोई दूसरा कर्मचारी नहीं दे सकते हैं। स्टेट बैंक पहुंचने वाले किसान दिन भर परेशान होते रहे। आखिरकार मायूश होकर घर लौट गए।
बैंक अधिकारी नहीं दे रहे संतोषप्रद जवाब
कर्जमाफी के रुप में बहुत ही कम राशि खाते में समायोजित करने पर किसानों ने बैंक अधिकारियों से बात की तो उनहे कोई संतोषप्रद जवाब नहीं मिला। कई बैंक वाले किश् तों में राशि डालने की बात कह रहे हैं, तो कई बैंक वाले जो छूट मिली है उसमें ही संतुष्ठ रहने कह रहे हैं। साथ ही कर्ज की बचत राशि का भुगतान करने दबाव बनाया जा रहा है।
बैंकों के चक्कर कांट रहे किसान
बैंक में इन दिनों किसानों की संख्या ज्यादा नजर आ रही है। किसान अपना पासबुक लेकर बैंक पहुंच रहे हैं और यह जानने में लगे हैं कि उनके खाते का अल्पकालीन ऋण माफ हुआ है या नहीं। लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। सबसे ज्यादा भीड़ स्टेट बैंक में देखने को मिला। स्टेट बैंक में केसीसी एकाऊट के लिए एक ही काऊंटर है, जिसे बैंक कर्मचारी चारों ओर से किसानों से घिरा हुआ है। सुबह से लेकर शाम तक केवल १५ से २० किसानों का ही काम हो पा रहा है, जिन-जिन किसानों का काम नहीं हो पाया वे मायूश होकर घर वापस लौट गए।

MP/CG लाइव टीवी

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned