व्हाट्सअप और यूट्यूब से सीखा हाइटेक खेती, अब कर रहा लाखों की आमदनी

जानिए कैसे एक पपीते ने बदला युवा किसान का जीवन

कवर्धा. सहसपुर लोहारा ब्लाक के ग्राम खड़ौदा में एक युवा किसान पुरानी खेती की पद्धति को छोड़ नई व हाईटेक किसानी की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने अपने पिता व चाचा के साथ खेती करने का तरीका सीखा | लेकिन धान और राहर तक ही सीमित रहे। इसमें लागत अधिक और लाभ कम होता रहा। इसके चलते युवा किसान ने यूट्यूब और व्हाट्सअप के सहारे हाईटेक खेती देखी और उसके अनुरूप उद्यानिकी पर ध्यान दिया। आज इस युवा किसान को प्रति एकड़ पर करीब 7 लाख रुपए की शुद्ध आमदनी हो रही है। इससे अब अन्य किसान प्रेरित हो रहे हैं। वहीं उद्यानिकी विभाग भी उक्त किसान की फसल से प्रेरित होकर इस पर डाक्यूमेंट्री बनाना चाहता है।आज का किसान नई तकनीक का उपयोग कर खेती-किसानी कर रहे हैं और अधिक लाभ भी ले रहे हैं। युवा किसान तो व्हाट्सअप और यूट्यूब से हाईटेक खेती करना सीख रहे हैं और दूसरों के लिए प्रेरक भी बन रहे हैं।

खेती पर 8.80 हजार की लागत

युवा किसान ने बताया की उसने अब तक पपीते की खेती पर प्रारंभिक से लेकर अब तक खेत की तैयारी, जुताई, पौधा खरीदी, खाद, दवाई और मजदूरी पर कुल 8.80 लाख रुपए खर्च किए गए। अभी15 मई तक पपीते की तोड़ाई होगी। मतलब मजदूरी पर18 हजार रुपए और खर्च होंगे। कुल उत्पादन 3402 क्विंटल पर कुल आमदनी 25 लाख रुपए का अनुमान है। इसमें कुल खर्च करीब 9 लाख ही है। वहीं बैंक के 9 लाख रुपए चुकाने के बाद भी शुद्ध आमदनी 7लाख होता है।

10 माह में पपीता हुए तैयार

9.4 एकड़ पर युवा किसान ने पपीता का रेडलेडी प्रति एकड़ पर करीब 777 पौधे रोपे। 10 माह में ही फसल तैयार होने लगी। बेहतर देखभाल और समय-समय पर खाद व दवाई के जरिए प्रति पेड़ से लगभग 40 किलोग्राम पपीता तोड़ा गया। प्रति एकड़ पर 394 क्विंटल उत्पादन हो रहा है। राशि में बात करें तो प्रति एकड़ पर 2.30 लाख रुपए के पपीते बिक्री किए गए। इसमें शुद्ध आमदनी1.36 लाख रुपए रही।

अब तक 21 लाख पपीते की बिक्री

खेत से अब तक 2952 क्विंटल पपीता बिक्री किया जा चुका है। इससे कुल आमदनी 21 लाख 62 हो चुकी है। इसमें शुद्ध आमदनी 12 लाख 82 रुपए हो चुका है। जबकि अभी 4 लाख रुपए का उत्पादन बिक्री होना बाकी है। अधिक खेत पर लागत भी अधिक लगती है। इसलिए युवा किसान ने बैंक से खेती के आधार पर प्रति एकड़ 90 हजार रुपए लोन लिए।9.4 एकड़ की खेती के लिए करीब नौ लाख रुपए का लोन दिया।


उत्तर प्रदेश में पपीते की डिमांड बढ़ी

पपीता के रेडलेडी की डिमांड उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक है। कवर्धा का पपीता बनारस, इलाहाबाद, आगरा , गोरखपुर, मुरादाबाद, फिरोजाबाद, लखनऊ, कानपुर, अलीगढ़ , बुलन्द शहर और दिल्ली के थोक मंडियों में बेचा गया। यहां से स्थानीय मंडी में व्यापारियों द्वारा ग्राहक तक पहुंचती है।


पपीते की कहानी युवा किसान की जुबानी

युवा किसान रुपेन्द्र जायसवाल ने कहा- पहली बार पपीता का खेती किया। इसके लिए व्हाट्सअप और यूट्यूब का भी सहारा लिया। उत्पादन काफी बेहतर रहा। नौ लाख रुपए खेती पर खर्च किए, जबकि अब तक 21 लाख रुपए का पपीता बेच चुका हूं। अभी करीब चार लाख रुपए का पपीता बेचना बाकी है। इसलिए इस बार 15 एकड़ में खेती करुंगा।।

उद्यानकी विभाग कबीरधाम के उपसंचालक आरके पाण्डेय ने कहा- ग्राम खदौड़ा का एक किसान पपिता की खेती करता है।यह युवा किसान लाखों रुपए इसके जरीए कमा रहा है। शासन की योजना के तहत इस किसानको अनुदान मिलेगा। वहीं अन्य पपीता के किसानो को भ्रमण के लिए ले जाकर किसान की इस तकनिकी की जानकारी देंगे।

चंदू निर्मलकर Desk
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