scriptIrrigation department kneels on the demand of farmers, ultimatum to st | किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने घुटने टेके, 15 दिन में शुरू करने का अल्टीमेटम | Patrika News

किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने घुटने टेके, 15 दिन में शुरू करने का अल्टीमेटम

किसान अब आरपार के मूड में है। सरकार को 15 दिनों के भीतर कार्य शुरू करने चेतावनी दिया गया है। नहर विस्तार न होने से 26 गांव के किसानों को बांध का पानी नहीं मिल रहा है, जिसे लेकर किसान बेहद नाराज हैं।

कवर्धा

Published: April 19, 2022 12:30:53 pm

कवर्धा. जिले के सहसपुर लोहारा विकासखंड़ अंतर्गत सुतियापाट बांध के नहर लाईनिंग विस्तार कार्य को लेकर किसान लामबंद हैं। लेकिन सिंचाई विभाग प्रशासकीय स्वीकृति के इंतजार में है। किसानों ने विभाग को 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। जबकि दूसरी ओर सिंचाई विभाग किसानों की मांग पर घुटने टेक चुका है।
जिले के किसान सुतियापाट जलाशय से नहर लाइनिंग कार्य जल्द शुरू कराना चाह रहे हैं जिसके लिए उन्होंने पिछले कई बार आवेदन दिया, निवेदन किया है। हड़ताल और चक्काजाम तक किया है, लेकिन शासन-प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रहा है। इसलिए किसान अब आरपार के मूड में है। सरकार को 15 दिनों के भीतर कार्य शुरू करने चेतावनी दिया गया है। नहर विस्तार न होने से 26 गांव के किसानों को बांध का पानी नहीं मिल रहा है, जिसे लेकर किसान बेहद नाराज हैं। भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष डोमन चंद्रवंशी ने बताया कि विडंबना है कि सुतियापाट जलाशय से बेमेतरा जिले के साजा के किसानों को पानी मिल रहा है जबकि कबीरधाम जिले के किसान इससे वंचित है। जलाशय में पर्याप्त पानी रहता है हर किसी को पानी मिले लेकिन जो जलाशय के करीब हैं उन्हें भी तो मिले, लेकिन यहीं के किसानों को खेती के लिए पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। किसानों की मांग पर जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता डीके भगौरिया का कहना है कि वर्ष 2018 में शासन ने नहर विस्तार के लिए 16 करोड़ की स्वीकृति दी थी, लेकिन कार्य शुरू न होने के चलते अब इसकी लागत बढ़ गई है। साथ ही नहर निर्माण के लिए भूमि देने वाले किसानों को ही 24 करोड़ रुपए का मुआवजा देना है, जिसके कारण नहर निर्माण का कार्य शुरू नहीं कर पा रहा हैं। बढ़ी हुई राशि करीब 4६ करोड़ रुपए का इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया है। जैसे ही स्वीकृति मिल जाती है, निर्माण का कार्य शुरू कर सकते हैं। आधे-अधूरे स्थिति में निर्माण कार्य कैसे शुरू करें।
प्रस्तावित कार्य ४६ करोड़ का
भू-अर्जन प्रकरण और छह माइनरों का समावेश करने पर लागत में वृद्धि हुई है। इसकी लागत 46 करोड़ 91 लाख रुपए हो गई है। प्रीलिमिनरी सर्वे में पुनरीक्षित प्राकलन के अनुसार 20 लाख रुपए, बी-लैण्ड, भू-अर्जन 28 करोड़ 14 लाख रूपए, छह माइनर के संलग्निकरण के कारण, सी मेसनरी पक्का कार्य 7 करोड़ 66 लाख रूपए, एल अर्थ वर्क मिट्टी कार्य बढ़कर 10 करोड़ 64 लाख रुपए की बहोत्तरी हुई है। इस प्रकार कुल वृद्धि 31 करोड़ 3 लाख रुपए की हुई है। इसके लिए प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है।
पूर्व में १६ करोड़ की स्वीकृति
सुतियापाट जलाशय मध्यम परियोजना की नहर की बांयी तट नहर का विस्तार कर 3250 हेक्टेयर में सिंचाई किया जाना प्रस्तावित है। इस कार्य के लिए 16 करोड़ 50 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त है, जिसमें भू-अर्जन के लिए 6 करोड़ 84 लाख रुपए का प्रावधान है। इस योजना में छह अलग-अलग माइनर नहर का निर्माण किया जाना है, जो प्राप्त प्रशासकीय स्वीकृति में प्रावधानित नहीं है। पुन: प्रशासकीय स्वीकृति के लिए प्राकलन में समस्त माइनर, मेन केनाल आदि का समावेश किया गया है।
कई मंत्रियों से मिले किसान
जिले के किसानों द्वारा सुतियापाट मध्यम जलाशय के नहर विस्तारीकरण की मांग काफी लंबे समय से की जा रही है। किसान इस मांग को लेकर कई मंत्रियों से मिल चुके हैं, लेकिन अब तक केवल निराशा ही हाथ लगी है। हालांकि नहर विस्तारीकरण के साथ-साथ सिंचाई क्षमता को बढ़ाते हुए छह अलग-अलग छोटी नहर विस्तारीकरण करने की कार्ययोजना है, लेकिन यह कारगर तभी है जबकि राज्य सरकार इसकी मंजूदी और राशि दे।
प्लास्टर टूटने लगी निर्माण पर उठ रहे सवाल
दूसरी ओर सुतियापाट जलाशय से बीजाबैरागी तक ८ किलोमीटर नहर लाइनिंग का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, लेकिन निर्माण पर अभी से सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्राम बीजाबैरागी तक करीब ८ करोड़ की लागत ८ किलोमीटर नहर लाईनिंग निर्माण का कार्य कराया जा रहा है जो पूर्णता की ओर है। इस नहर का विस्तार किया जा रहा है जो साजा की ओर जाता है, लेकिन इस निर्माण कार्य में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की खुलकर लापरवाही और अनियमितता सामने आई है। निर्माण कार्य पूर्ण होने से पहले ही जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने लगे हैं जिससे साफ तौर पर अंदाजा लगाया जा सकता है कि गुणवत्ता पर कितना ध्यान दिया जा रहा है। वहीं प्लास्टर में सीमेंट कम रेत की मात्रा उपयोग में ज्यादा किया गया है। आलम ये है कि पैर मारते ही प्लास्टर टूटने लगी है।
किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग ने घुटने टेके, 15 दिन में शुरू करने का अल्टीमेटम
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